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नाबार्ड को हाईकोर्ट ने फटकारा, मांगी रिपोर्ट
ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद
Updated Thu, 05 Jan 2017 12:53 PM IST
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प्रथमा बैंक में कृषि ऋण माफी और राहत योजना 2008 में 20 करोड़ के घोटाला मामले में हाईकोर्ट की बेंच ने नाबार्ड को फटकार लगाई और 30 जनवरी तक रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए हैं।
प्रथमा बैंक में कृषि ऋण माफी और राहत योजना 2008 में करोड़ों का घोटाला समाने आया था। इस पर नाबार्ड को जांच की जिम्मेदारी देते हुए कोर्ट ने 28 अगस्त 2016 तक नाबार्ड से घोटाले की जांच कर रिपोर्ट मांगी थी।
याचिकाकर्ता के वकील राजवींदर सिंह ने बताया कि नाबार्ड ने इस घोटाले की जांच नहीं की और कोर्ट द्वारा दिए गए समय से दो महीने बाद 12 सितंबर 2016 को कोर्ट को बताया कि नाबार्ड कोई बैंकिंग संस्था नहीं है। इसलिए नाबार्ड इस घोटाले की जांच करने में असमर्थ है।
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नाबार्ड ने कोर्ट से अपने आदेश में संशोधन की मांग की। वकील राजवींदर सिंह ने बताया कि 16 दिसंबर को कोर्ट की बेंच ने नाबार्ड को फटकार लगाते हुए कहा कि नाबार्ड जांच करने से बच रहा है और तरह-तरह के बहाने बना रहा है। नाबार्ड जांच को टालने की कोशिश कर रहा है।
कोर्ट ने कहा कि नाबार्ड इस घोटाले की जांच के लिए बैंकिंग मामलों के एक्सपर्ट नियुक्त कर सकते हैं लेकिन नाबार्ड ने ऐसा नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि नाबार्ड घोटाले की जांच करने के लिए सक्षम है। नाबार्ड इसके लिए वह चार्टर अकाउंटेंट या फर्म से मदद लेकर जांच करें और 30 जनवरी तक शपथ पत्र के साथ कोर्ट में जांच रिपोर्ट पेश करे।
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प्रथमा बैंक में कृषि ऋण माफी और राहत योजना 2008 में करोड़ों का घोटाला समाने आया था। इस पर नाबार्ड को जांच की जिम्मेदारी देते हुए कोर्ट ने 28 अगस्त 2016 तक नाबार्ड से घोटाले की जांच कर रिपोर्ट मांगी थी।
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याचिकाकर्ता के वकील राजवींदर सिंह ने बताया कि नाबार्ड ने इस घोटाले की जांच नहीं की और कोर्ट द्वारा दिए गए समय से दो महीने बाद 12 सितंबर 2016 को कोर्ट को बताया कि नाबार्ड कोई बैंकिंग संस्था नहीं है। इसलिए नाबार्ड इस घोटाले की जांच करने में असमर्थ है।
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नाबार्ड ने कोर्ट से अपने आदेश में संशोधन की मांग की। वकील राजवींदर सिंह ने बताया कि 16 दिसंबर को कोर्ट की बेंच ने नाबार्ड को फटकार लगाते हुए कहा कि नाबार्ड जांच करने से बच रहा है और तरह-तरह के बहाने बना रहा है। नाबार्ड जांच को टालने की कोशिश कर रहा है।
कोर्ट ने कहा कि नाबार्ड इस घोटाले की जांच के लिए बैंकिंग मामलों के एक्सपर्ट नियुक्त कर सकते हैं लेकिन नाबार्ड ने ऐसा नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि नाबार्ड घोटाले की जांच करने के लिए सक्षम है। नाबार्ड इसके लिए वह चार्टर अकाउंटेंट या फर्म से मदद लेकर जांच करें और 30 जनवरी तक शपथ पत्र के साथ कोर्ट में जांच रिपोर्ट पेश करे।