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एकादशी व्रत करने से होती है मोक्ष की प्राप्ति
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मुरादाबाद। दीनदयाल नगर संगम भवन में रविवार को हरिनाम संकीर्तन का आयोजन हुआ। अमृत वर्षा करते हुुए कथा व्यास धीरशांत अर्धमौनी ने बताया कि आषाढ़ माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी को हरिशयनी एकादशी कहा जाता है। यह एकादशी पुण्यमयी स्वर्ग और मोक्ष प्रदान करने वाली होती है।
उन्होंने बताया कि हरिशयनी एकादशी के दिन भगवान श्री कृष्ण का एक स्वरूप राजा बलि के यहां रहता है और दूसरा क्षीरसागर में शेषनाग की शैय्या पर देवोत्थान एकादशी तक शयन करता हैं। इस एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी तक मनुष्य को भलीभांति धर्म का आचरण करना चाहिए। जो मनुष्य एकादशी व्रत का अनुष्ठान करते हैं, वह परम गति को प्राप्त होते हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि जो मनुष्य दीपदान करके पलाश के पत्ते पर भोजन करता है। हरि भजन में रमन हो जाता है। उस व्यक्ति को स्वर्ग की प्राप्ति होती हैं। इस अवधि में मनुष्य को भूमि पर शयन करना चाहिए। जो व्यक्ति चातुर्मास में ब्रह्मचर्य का पालन करता है। वह सभी प्रकार के पापों से मुक्त हो जाता है। संकीर्तन में सुधांशु कौशिक, नीलम कौशिक, वर्षा कौशिक, सृष्टि कौशिक, सुुधा गुप्ता, अक्षेंद्र सारस्वत, सारिका अग्रवाल, दक्ष कौशिक, देवांश अग्रवाल, अथर्व कौशिक, सारिका अग्रवाल, सपना चौधरी, पायल मग्गू मौजूद रहे। संवाद
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उन्होंने बताया कि हरिशयनी एकादशी के दिन भगवान श्री कृष्ण का एक स्वरूप राजा बलि के यहां रहता है और दूसरा क्षीरसागर में शेषनाग की शैय्या पर देवोत्थान एकादशी तक शयन करता हैं। इस एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी तक मनुष्य को भलीभांति धर्म का आचरण करना चाहिए। जो मनुष्य एकादशी व्रत का अनुष्ठान करते हैं, वह परम गति को प्राप्त होते हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि जो मनुष्य दीपदान करके पलाश के पत्ते पर भोजन करता है। हरि भजन में रमन हो जाता है। उस व्यक्ति को स्वर्ग की प्राप्ति होती हैं। इस अवधि में मनुष्य को भूमि पर शयन करना चाहिए। जो व्यक्ति चातुर्मास में ब्रह्मचर्य का पालन करता है। वह सभी प्रकार के पापों से मुक्त हो जाता है। संकीर्तन में सुधांशु कौशिक, नीलम कौशिक, वर्षा कौशिक, सृष्टि कौशिक, सुुधा गुप्ता, अक्षेंद्र सारस्वत, सारिका अग्रवाल, दक्ष कौशिक, देवांश अग्रवाल, अथर्व कौशिक, सारिका अग्रवाल, सपना चौधरी, पायल मग्गू मौजूद रहे। संवाद
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