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Moradabad News: टीएफआईसी का मिले लाभ तो लैंप सरीखे हस्तशिल्प उत्पाद हों कामयाब

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 30 Apr 2026 02:07 AM IST
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Handicraft products like lamps can be successful if they get the benefit of TFIC.
मुरादाबाद। पश्चिम एशिया युद्ध से मिले कारोबारी झटके के बीच पीतलनगरी के कारोबारियों को हर तरह की सब्सिडी, रियायत और लाभ देने वाली स्कीमें याद आने लगी हैं। सब्सिडी भुगतान की देरी भी अखर रही है। इसी तरह कुछ समय पहले तक मिलने वाली कन्सेशनल ड्यूटी फॉर मैन्युफैक्चरिंग (टीएफआईसी) स्कीम की सुविधा फिर बहाल किए जाने की मांग जोर पकड़ रही है। निर्यातकों का कहना है कि इस स्कीम के बंद होने से शहर के निर्यातकों को हर साल 75 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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बताते हैं कि टीएफआईसी के तहत 100 करोड़ सालाना हस्तशिल्प उत्पाद निर्यात करने पर पांच प्रतिशत आयातित वस्तुओं पर ड्यूटी नहीं लगती थी। करीब छह साल से यह स्कीम बंद हो चुकी है। इसकी वजह से पीतलनगरी में खास डिजाइन से तैयार होने वाले लैंप और घड़ी का कारोबार प्रभावित हुआ है। अब निर्यातकों को विदेशों से लैंप के पार्ट्स, लैंप की फिटिंग और घड़ी के उपकरण मंगाने पर पूरी कस्टम ड्यूटी देनी पड़ रही है।
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निर्यातकों के मुताबिक दुबई, जर्मनी, जापान समेत अन्य देशों से लैंप के पार्ट्स, लैंप की फिटिंग और घड़ी की मशीन समेत अन्य जरूरी सामान का आयात करना होता है। टीएफआईसी बंद होने की वजह से आयात किए गए सामान पर 25 प्रतिशत कस्टम ड्यूटी देनी पड़ रही है। इसकी वजह से आयात किए जा रहे सामान काफी महंगे पड़ रहे हैं। तैयार माल काफी महंगा होता जा रहा है। इन स्थितियों में खासकर लैंप और घड़ी का व्यापार प्रभावित हुआ है। पिछले पांच वर्षों में लैंप और घड़ी के निर्यात का काम करीब 20 प्रतिशत घटा है। करीब 350 करोड़ का सालाना निर्यात कम हुआ है।
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आंकड़ों के हिसाब से जिले के 200 निर्यातक लैंप और घड़ी के कारोबार से जुड़े हैं। स्थिति में बदलाव से अब करीब 1400 करोड़ रुपये का सालाना निर्यात हो रहा है।

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सामने आ रहीं चुनौतियां

निर्यातकों के अनुसार आयातित इलेक्ट्रिकल फिटिंग महंगी हो गई है। वर्किंग कैपिटल की आवश्यकता बढ़ गई है। चीन और वियतनाम के मुकाबले लागत काफी ज्यादा होने से कारोबार प्रभावित हो रहा है।

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इन उत्पादों पर मिलता है स्कीम का लाभ

डेकोरेटिव लैंप, हैंडमेड झूमर, वॉल लाइट्स, कैंडल स्टाइल लाइटिंग, मेटल एवं ग्लास बेस्ड लाइटिंग, होटल एवं हॉस्पिटैलिटी लाइटिंग, एक्सपोर्ट क्वालिटी डेकोरेटिव इलेक्ट्रिकल फिटिंग।

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वर्जन...

-टीएफआईसी बंद होने से कारोबार काफी प्रभावित हुआ है। अब 50 लाख का सामान आयात करने पर कस्टम ड्यूटी के साथ-साथ जीएसटी भी देना पड़ता है। लैंप और घड़ी का निर्यात भी घटा है। -विकास अग्रवाल, वाइस प्रेसिडेंट, मुरादाबाद एसईजेड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन

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-टीएफआईसी चालू करने के लिए कई बार मांग की गई लेकिन अभी तक इसे चालू नहीं किया गया। इस स्कीम का लाभ मिलने पर लैंप जैसे हस्तशिल्प उत्पाद की कीमत कम होती थी। साथ ही सामान आयात करने पर छूट मिल जाती है। इससे काफी फायदा मिलता था। -सुरेश गुप्ता, चेयरमैन, आईआईए हैंडीक्राफ्ट डेवलेपमेंट कमेटी


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-उपकरण महंगे होने की वजह से हस्तशिल्प उत्पादों की कीमतें बढ़ गई हैं। वैश्विक प्रतिस्पर्धा में हम पिछड़ रहे हैं। चीन से मुकाबला करना काफी मुश्किल हो गया है। हमारी मांग है कि टीएफआईसी स्कीम को फिर से लागू किया जाए ताकि कम कीमत पर हस्तशिल्प उत्पादों का निर्यात किया जा सके। -जेपी सिंह, चेयरमैन, यस
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