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हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट पर एमईआईएस के साथ ड्रा बैक भी होगा खत्म
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मुरादाबाद। अमेरिका के दबाव की दोहरी मार मुरादाबाद के हस्तशिल्प उद्योग पर पड़ने जा रही है। अमेरिका के एतराज के बाद विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) ने भारत सरकार से एमईआईएस लाइसेंस के साथ ही निर्यातकों को दिया जाने वाला ड्यूटी ड्रा बैक भी खत्म करने खत्म करने को कहा है। वाणिज्य मंत्रालय ने इस बारे में ईपीसीएच से आंकड़े मांगे हैं। इससे निर्यातकों में खलबली मची है। अमेरिका भारतीय निर्यातकों से जीएसपी का दर्जा पहले ही छीन चुका है। जिसके चलते अमेरिकी बाजारों में भारतीय उत्पाद महंगे हो गए हैं।
निर्यात को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार निर्यातकों को टोटल जीएसटी रिफंड देने के साथ ही एमईआईएस लाइसेंस के रूप में पांच से सात फीसदी की प्रोत्साहन राशि भी देती है। धातु और कांच पर सात फीसदी व लकड़ी के उत्पादों के निर्यात पर निर्यातकों को कुल निर्यात का पांच फीसदी रकम केंद्र सरकार प्रोत्साहन राशि के रूप में देती है। इसके साथ ही निर्यात होने वाले उत्पादों को बनाने में जिन धातुओं का उपयोग होता है उनमें से कई विदेशों से आयात होती हैं। इनके आयात पर जो आयात शुल्क लगता है सरकार उसे भी ड्रा बैक के रूप में निर्यातकों को लौटा देती है। लेकिन अब डब्ल्यूटीओ के दबाव में सरकार इन सभी को खत्म करने जा रही है। ईपीसीएच के पूर्व चेयरमैन सतपाल का कहना है कि इस मामले में वाणिज्य मंत्रालय में निर्यातकों को पक्ष रखा जा रहा है। सभी आंकड़े इकट्ठा करके ईपीसीएच को भी भेजे जा रहे हैं। जिन्हें सरकार के सामने रखा जाएगा। सतपाल का कहना है कि मुरादाबाद से करीब 8.5 हजार करोड़ रुपये का सालाना निर्यात होता है। सरकार से मिलने वाली सभी रियायतें खत्म होने की दशा में मुरादाबाद के हस्तशिल्प उद्योग को करीब दो हजार करोड़ रुपये का नुकसान होगा। अमेरिका पहले ही जीएसपी खत्म करके निर्यातकों को झटका दे चुका है। निर्यातकों का कहना है कि अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर पांच से सात फीसदी आयात शुल्क लगाने के बाद अमेरिकी थोक खरीददारों ने उन पर उत्पादों के दाम कम करने के लिए दबाव डाला है। शिपमेंट के करीब पहुंच चुके कारोेबारी आदेशों को बनाए रखने के लिए निर्यातकों ने उत्पादों के दामों में दो से तीन फीसदी तक की कमी भी की है। निर्यातकों का कहना है कि ऐसे हालात में यदि रियायतें भी छिन गईं तो हस्तशिल्प उद्योग पर संकट मंडरा जाएगा। हालांकि ईपीसीएच के महानिदेशक राकेश कुमार का कहना है कि इन रियायतों के बदले में सरकार से आरओएससीएल स्कीम की मांग निर्यातकों के लिए की जा रही है।
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निर्यात को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार निर्यातकों को टोटल जीएसटी रिफंड देने के साथ ही एमईआईएस लाइसेंस के रूप में पांच से सात फीसदी की प्रोत्साहन राशि भी देती है। धातु और कांच पर सात फीसदी व लकड़ी के उत्पादों के निर्यात पर निर्यातकों को कुल निर्यात का पांच फीसदी रकम केंद्र सरकार प्रोत्साहन राशि के रूप में देती है। इसके साथ ही निर्यात होने वाले उत्पादों को बनाने में जिन धातुओं का उपयोग होता है उनमें से कई विदेशों से आयात होती हैं। इनके आयात पर जो आयात शुल्क लगता है सरकार उसे भी ड्रा बैक के रूप में निर्यातकों को लौटा देती है। लेकिन अब डब्ल्यूटीओ के दबाव में सरकार इन सभी को खत्म करने जा रही है। ईपीसीएच के पूर्व चेयरमैन सतपाल का कहना है कि इस मामले में वाणिज्य मंत्रालय में निर्यातकों को पक्ष रखा जा रहा है। सभी आंकड़े इकट्ठा करके ईपीसीएच को भी भेजे जा रहे हैं। जिन्हें सरकार के सामने रखा जाएगा। सतपाल का कहना है कि मुरादाबाद से करीब 8.5 हजार करोड़ रुपये का सालाना निर्यात होता है। सरकार से मिलने वाली सभी रियायतें खत्म होने की दशा में मुरादाबाद के हस्तशिल्प उद्योग को करीब दो हजार करोड़ रुपये का नुकसान होगा। अमेरिका पहले ही जीएसपी खत्म करके निर्यातकों को झटका दे चुका है। निर्यातकों का कहना है कि अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर पांच से सात फीसदी आयात शुल्क लगाने के बाद अमेरिकी थोक खरीददारों ने उन पर उत्पादों के दाम कम करने के लिए दबाव डाला है। शिपमेंट के करीब पहुंच चुके कारोेबारी आदेशों को बनाए रखने के लिए निर्यातकों ने उत्पादों के दामों में दो से तीन फीसदी तक की कमी भी की है। निर्यातकों का कहना है कि ऐसे हालात में यदि रियायतें भी छिन गईं तो हस्तशिल्प उद्योग पर संकट मंडरा जाएगा। हालांकि ईपीसीएच के महानिदेशक राकेश कुमार का कहना है कि इन रियायतों के बदले में सरकार से आरओएससीएल स्कीम की मांग निर्यातकों के लिए की जा रही है।
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