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Moradabad News: किराये के ऊपर जीएसटी से व्यापारियों पर बढ़ा बोझ
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मुरादाबाद। नगर निगम की दुकानों के किराये को लेकर व्यापारियों और निगम के बीच एक बार फिर असमंजस की स्थिति बन गई है। 400 रुपये प्रति वर्गमीटर निर्धारित किराये के अतिरिक्त 18 प्रतिशत जीएसटी की मांग किए जाने पर व्यापारियों ने नाराजगी जताई है। व्यापारियों का कहना है कि जीएसटी का भुगतान करने से उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन इसे 400 रुपये प्रति वर्गमीटर की निर्धारित किराये की राशि में ही समायोजित किया जाना चाहिए। अलग से जीएसटी लेने पर छोटे दुकानदारों का मासिक खर्च बढ़ जाएगा।
बुध बाजार, चौमुखापुल, टाउनहॉल के व्यापारियों ने कहा कि छह से सात वर्गमीटर की दुकान पर 400 रुपये प्रति वर्गमीटर के हिसाब से मासिक किराया करीब 2400 से 2800 रुपये बनता है। इस पर 18 प्रतिशत जीएसटी अलग से लिया जाता है तो करीब 432 से 500 रुपये अतिरिक्त देने होंगे। व्यापारियों का कहना है कि छोटे कारोबारियों के लिए यह अतिरिक्त राशि भी आर्थिक बोझ बढ़ाने वाली है। संयुक्त व्यापार मंडल उत्तर प्रदेश के पदाधिकारियों ने बताया कि कारोबार पहले से ही कई तरह के खर्चों से प्रभावित है। ऐसे में निर्धारित किराये के ऊपर अलग से जीएसटी वसूलने से दुकानदारों पर अतिरिक्त भार पड़ेगा। व्यापारियों का कहना है कि करीब छह महीने से नगर निगम की ओर से किराये नहीं लिए गए हैं। संयुक्त व्यापार मंडल उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ उपाध्यक्ष दीपक कत्याल ने कहा कि व्यापारियों को जीएसटी देने से कोई इन्कार नहीं है। मांग केवल इतनी है कि 400 रुपये प्रति वर्गमीटर की निर्धारित राशि में ही जीएसटी को समायोजित किया जाए, जिससे दुकानदारों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े। व्यापारी रतन भाटिया ने बताया कि किराये की दर पहले से निर्धारित है। अब 400 रुपये प्रति वर्गमीटर के किराये पर अलग से 18 प्रतिशत जीएसटी मांगा जा रहा है।
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बुध बाजार, चौमुखापुल, टाउनहॉल के व्यापारियों ने कहा कि छह से सात वर्गमीटर की दुकान पर 400 रुपये प्रति वर्गमीटर के हिसाब से मासिक किराया करीब 2400 से 2800 रुपये बनता है। इस पर 18 प्रतिशत जीएसटी अलग से लिया जाता है तो करीब 432 से 500 रुपये अतिरिक्त देने होंगे। व्यापारियों का कहना है कि छोटे कारोबारियों के लिए यह अतिरिक्त राशि भी आर्थिक बोझ बढ़ाने वाली है। संयुक्त व्यापार मंडल उत्तर प्रदेश के पदाधिकारियों ने बताया कि कारोबार पहले से ही कई तरह के खर्चों से प्रभावित है। ऐसे में निर्धारित किराये के ऊपर अलग से जीएसटी वसूलने से दुकानदारों पर अतिरिक्त भार पड़ेगा। व्यापारियों का कहना है कि करीब छह महीने से नगर निगम की ओर से किराये नहीं लिए गए हैं। संयुक्त व्यापार मंडल उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ उपाध्यक्ष दीपक कत्याल ने कहा कि व्यापारियों को जीएसटी देने से कोई इन्कार नहीं है। मांग केवल इतनी है कि 400 रुपये प्रति वर्गमीटर की निर्धारित राशि में ही जीएसटी को समायोजित किया जाए, जिससे दुकानदारों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े। व्यापारी रतन भाटिया ने बताया कि किराये की दर पहले से निर्धारित है। अब 400 रुपये प्रति वर्गमीटर के किराये पर अलग से 18 प्रतिशत जीएसटी मांगा जा रहा है।
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