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कोरोना टेस्ट : शासनादेश में उलझा विभाग, मनमानी फीस वसूल रहीं प्राइवेट लैब
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मुरादाबाद। शासन ने प्राइवेट पैथोलॉजी लैब में कोविड टेस्ट की फीस निर्धारित कर दी है। दो महीने में दो बार फीस निर्धारित की गई। लेकिन प्राइवेट पैथोलॉजी लैब वाले निर्धारित नई फीस को दरकिनार कर पुरानी से भी अधिक रुपये वसूल रहे हैं। वहीं स्वास्थ्य विभाग नया जीओ नहीं मिलने की बात कर रहा है।
कोरोना संक्रमण बढ़ते फैलाव को देखते हुए प्रदेश सरकार ने जांच का दायरा बढ़ाने के लिए प्राइवेट पैथोलॉजी लैब में भी कोविड-19 टेस्ट कराने का फैसला लिया था। साथ ही मरीजों से कोविड टेस्ट केनाम पर मनमानी वसूली ना हो, इसके लिए फीस भी निर्धारित कर दिया। सितंबर में शासन ने प्राइवेट लैब में आरटीपीसीआर टेस्ट की फीस 1600 रुपये तय किया था। वहीं नवंबर माह में कोविड टेस्ट की फीस में कटौती करते हुए शासन ने 600 रुपये निर्धारित कर दिया। लेकिन प्राइवेट लैब में नई और पुरानी फीस का दरकिनार कर दिया गया है। यहां मरीजों से कोविड टेस्ट केनाम पर मनमानी वसूली की जा रही है। कही 2200 तो कहीं 2500 रुपये लिए जा रहे हैं। दूसरी ओर सेहत महकमा प्राइवेट लैब मे कोविड टेस्ट की फीस से संबंधित नया जीओ मिलने से इंकार किया है। फिलहाल शहर में न तो पुराने शासनादेश से टेस्टिंग की फीस ली जा रही और न ही नए शासनोदश से।
- प्राइवेट लैब में कोरोना टेस्ट की फीस शासन ने निर्धारित कर रखी है। अगर किसी लैब में निर्धारित फीस से अधिक रुपये वसूल किए जा रहे तो उनकेखिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - डा. डीके प्रेमी, एसीएमओ
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विभाग केअधिकारी भी फीस से अंजान
मुरादाबाद। मरीज ही नहीं स्वास्थ्य विभाग के कई अधिकारी भी कोविड-19 की प्राइवेट लैब में जांच की निर्धारित फीस से अंजान है। इसका भी प्राइवेट लैब वाले फायदा उठा रहे हैं। जानकारी नहीं होने पर मरीज भी निर्धारित फीस से अधिक रुपये देते हैं।
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कोरोना संक्रमण बढ़ते फैलाव को देखते हुए प्रदेश सरकार ने जांच का दायरा बढ़ाने के लिए प्राइवेट पैथोलॉजी लैब में भी कोविड-19 टेस्ट कराने का फैसला लिया था। साथ ही मरीजों से कोविड टेस्ट केनाम पर मनमानी वसूली ना हो, इसके लिए फीस भी निर्धारित कर दिया। सितंबर में शासन ने प्राइवेट लैब में आरटीपीसीआर टेस्ट की फीस 1600 रुपये तय किया था। वहीं नवंबर माह में कोविड टेस्ट की फीस में कटौती करते हुए शासन ने 600 रुपये निर्धारित कर दिया। लेकिन प्राइवेट लैब में नई और पुरानी फीस का दरकिनार कर दिया गया है। यहां मरीजों से कोविड टेस्ट केनाम पर मनमानी वसूली की जा रही है। कही 2200 तो कहीं 2500 रुपये लिए जा रहे हैं। दूसरी ओर सेहत महकमा प्राइवेट लैब मे कोविड टेस्ट की फीस से संबंधित नया जीओ मिलने से इंकार किया है। फिलहाल शहर में न तो पुराने शासनादेश से टेस्टिंग की फीस ली जा रही और न ही नए शासनोदश से।
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- प्राइवेट लैब में कोरोना टेस्ट की फीस शासन ने निर्धारित कर रखी है। अगर किसी लैब में निर्धारित फीस से अधिक रुपये वसूल किए जा रहे तो उनकेखिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - डा. डीके प्रेमी, एसीएमओ
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विभाग केअधिकारी भी फीस से अंजान
मुरादाबाद। मरीज ही नहीं स्वास्थ्य विभाग के कई अधिकारी भी कोविड-19 की प्राइवेट लैब में जांच की निर्धारित फीस से अंजान है। इसका भी प्राइवेट लैब वाले फायदा उठा रहे हैं। जानकारी नहीं होने पर मरीज भी निर्धारित फीस से अधिक रुपये देते हैं।