फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Moradabad News ›   Government colony deserted for twenty years, property worth crores lying in dust

Moradabad News: बीस साल से वीरान सरकारी कॉलोनी, करोड़ों की संपत्ति पर धूल

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 25 Jul 2026 02:36 AM IST
विज्ञापन
Government colony deserted for twenty years, property worth crores lying in dust
मुरादाबाद। सरकारी अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए बनाई गई बुद्धि विहार सेक्टर-3 की एक पूरी कॉलोनी पिछले करीब 20 साल से वीरान पड़ी है। 17 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बने करीब 100 सरकारी आवास आज तक आबाद नहीं हो सके। रखरखाव के अभाव में करोड़ों रुपये की यह सरकारी संपत्ति धीरे-धीरे खंडहर में बदल रही है, जबकि शहर में कई विभागों के कर्मचारी आज भी सरकारी आवास का इंतजार कर रहे हैं।
विज्ञापन



इन आवासों का निर्माण आवास विकास परिषद ने कस्टम विभाग के साथ समन्वय कर कराया था। पुराने रिकॉर्ड के मुताबिक वर्ष 2004-05 में यह आवास बने थे। कॉलोनी में अधिकारियों, लिपिकीय संवर्ग और तृतीय श्रेणी कर्मचारियों के लिए अलग-अलग श्रेणी के आवास बनाए गए थे। निर्माण पूरा होने के बाद आवास विकास परिषद ने पूरी कॉलोनी संबंधित विभाग को हैंडओवर कर दी, लेकिन इसके बाद आवासों का आवंटन नहीं हो सका। नतीजा यह रहा कि पूरी कॉलोनी दो दशक से सूनी पड़ी है।
विज्ञापन


परिसर में 80, 110 और 150 वर्गमीटर श्रेणी के आवास बनाए गए थे। इनमें आवासीय परिसरों के अलावा कुछ डबल स्टोरी फ्लैट भी शामिल हैं। सभी मकानों में दरवाजे, खिड़कियां, बिजली फिटिंग और अन्य मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई थीं। लंबे समय तक उपयोग न होने से अब भवनों की दीवारों में सीलन और दरारें आ गई हैं। कई मकानों के दरवाजे और खिड़कियां क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। परिसर में झाड़ियां उग आई हैं और जगह-जगह गंदगी फैली हुई है। यदि जल्द इनका उपयोग नहीं किया गया तो इन्हें दोबारा रहने योग्य बनाने में भी बड़ी रकम खर्च करनी पड़ेगी। आवास विकास परिषद का कहना है कि निर्माण पूरा होने के बाद कॉलोनी संबंधित विभाग को सौंप दी गई थी। वहीं विभागीय अधिकारियों के अनुसार यह संपत्ति अब सेंट्रल जीएसटी के अधीन है और इसके उपयोग को लेकर कार्ययोजना तैयार की जा रही है। हालांकि अभी तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। ऐसे में करोड़ों रुपये की यह सरकारी कॉलोनी जिम्मेदार विभागों की उदासीनता की मिसाल बनकर खड़ी है।
विज्ञापन
विज्ञापन



वर्जन
इन आवासों के संबंध में अधिक जानकारी नहीं है। यदि निर्माण कस्टम विभाग के लिए कराया गया था तो आवास विकास परिषद ने निर्माण पूरा होने के बाद इन्हें संबंधित विभाग को हैंडओवर कर दिया होगा। अब इनके उपयोग का निर्णय संबंधित विभाग को ही लेना है।

- अरविंद कुमार, अधिशासी अभियंता, आवास विकास परिषद
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed