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पूर्व डीपीआरओ ने बिना ग्राम सभाओं की बैठकें बुलाए खर्च किए 5.77 करोड़
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मुरादाबाद। प्रशासकों के कार्यकाल के दौरान जिले में बरती गई गड़बड़ियों के मामले में आरोपों से घिरे तत्कालीन डीपीआरओ राजेश कुमार पर गड़बड़ी करने वालों को बचाने के आरोप पहले ही लगते रहे हैं, लेकिन अब छजलैट विकास खंड में प्रशासक रहते हुए उनके स्वयं के द्वारा भी तमाम गड़बड़ियां किए जाने का मामला भी सामने आया है। कार्य योजना के लिए बिना ग्राम सभाओं की बैठकें बुलाए पूर्व डीपीआरओ ने सिर्फ पांच माह में आनन-फानन पौने छह करोड़ रुपये विकास के नाम पर खर्च कर दिए। यही नहीं कमियों को छिपाने के उद्देश्य से ई-स्वराज वेबसाइट पर प्रस्तावित कार्ययोजना के अभिलेख अपलोड करने के स्थान पर सादे और अपठनीय पेपर अपलोड कर दिए। इसके चलते पहले से ही विभिन्न आरोपों से घिरे तत्कालीन डीपीआरओ राजेश कुमार (अब गाजियाबाद के डीपीआरओ) की मुश्किल कुछ और बढ़ सकती है।
पंचायत चुनाव के दौरान पूर्व प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने व नवनिर्वाचित प्रधानों के शपथ ग्रहण, समिति गठित होने तक (26 दिसंबर 2020 से 27 मई 2021 तक) ग्राम पंचायतों की बागडोर एडीओ पंचायत व ग्राम पंचायत सचिव के हाथों में रहीं। करीब पांच माह के इस कार्यकाल में इन प्रशासकों ने आनन-फानन नियम कायदे ताक पर रख कर विकास के नाम पर जमकर धन खर्च किया।
जिले के सभी आठ विकास खंडों में इस कार्यकाल के दौरान करीब 38 करोड़ रुपये विकास के नाम पर खर्च किए गए। इसमें सिर्फ छजलैट विकास खंड में पौने छह करोड़ रुपये खर्च किए गए। खास बात यह है कि इस विकास खंड में कोई एडीओ (पंचायत) पहले से तैनात नहीं था, लिहाजा तत्कालीन डीपीआरओ स्वयं इसके प्रशासक रहे। तत्कालीन डीपीआरओ पर जिले के अधिकांश विकास खंडों में 80 वाटर कूलर बाजार से अधिक दाम पर अनियमित ढंग से क्रय करवाने के आरोप पहले ही लग चुके हैं। जिस फर्म को उनके रहते बिना कार्य कराए भुगतान के आरोप कुछ प्रशासकों पर लगे थे उसी कार्तिक इंटर प्राइजेज नामक फर्म से डीपीआरओ ने विकास खंड छजलैट में 23 वाटर कूलरों की खरीद की।
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विकास खंड की 82 ग्राम पंचायतों में से सबसे अधिक 28.64 लाख रुपये के विकास कार्य ग्राम पंचायत मोढ़ा में कराए गए। वहां प्राइमरी स्कूल में कायाकल्प, सफाई किट, सोलर लाइट और शमशानघाट, पंचायत भवन निर्माण, सीसी टायल्स आदि कार्य किया गया। इसमें से अधिकांश कार्य व भुगतान चालू वित्तीय वर्ष में ही किया गया। नए वित्तीय वर्ष में कराए जाने वाले कार्य से पहले उसकी कार्ययोजना ग्राम सभा की बैठक में बननी चाहिए। ग्रामीणों के मुताबिक लेकिन ऐसा नहीं किया गया। बिना ग्राम सभा की बैठक बुलाए ही कार्ययोजना की खानापूर्ति कर कार्य के एवज में करोड़ों रुपये का भुगतान कर दिया गया।
पंचायतराज विभाग की ई-स्वराज वेबसाइट के अवलोकन से भी इसकी पुष्टि होती है। कार्ययोजना का प्रस्ताव ई-वेबसाइट पर लोड किया जाना अनिवार्य है, लेकिन यहां ऐसा नहीं किया गया। विकास कार्यों की खामी को छुपाने के लिए ई-स्वराज वेबसाइट की कार्ययोजना की पीडीएफ फाइल में किसी ग्राम पंचायत में सादे कागज, किसी में अपठनीय अभिलेख, तो किसी में अंत्योदय योजना का फार्मेट अपलोड कर कर्तव्यों की इतिश्री कर ली गई। इससे प्रशासकों के कार्यकाल के दौरान पंचायतीराज मंत्री के गृह ब्लाक में कराए गए 5.77 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की वैधानिकता पर ही सवालिया निशान लग गया है।
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पंचायत चुनाव के दौरान पूर्व प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने व नवनिर्वाचित प्रधानों के शपथ ग्रहण, समिति गठित होने तक (26 दिसंबर 2020 से 27 मई 2021 तक) ग्राम पंचायतों की बागडोर एडीओ पंचायत व ग्राम पंचायत सचिव के हाथों में रहीं। करीब पांच माह के इस कार्यकाल में इन प्रशासकों ने आनन-फानन नियम कायदे ताक पर रख कर विकास के नाम पर जमकर धन खर्च किया।
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जिले के सभी आठ विकास खंडों में इस कार्यकाल के दौरान करीब 38 करोड़ रुपये विकास के नाम पर खर्च किए गए। इसमें सिर्फ छजलैट विकास खंड में पौने छह करोड़ रुपये खर्च किए गए। खास बात यह है कि इस विकास खंड में कोई एडीओ (पंचायत) पहले से तैनात नहीं था, लिहाजा तत्कालीन डीपीआरओ स्वयं इसके प्रशासक रहे। तत्कालीन डीपीआरओ पर जिले के अधिकांश विकास खंडों में 80 वाटर कूलर बाजार से अधिक दाम पर अनियमित ढंग से क्रय करवाने के आरोप पहले ही लग चुके हैं। जिस फर्म को उनके रहते बिना कार्य कराए भुगतान के आरोप कुछ प्रशासकों पर लगे थे उसी कार्तिक इंटर प्राइजेज नामक फर्म से डीपीआरओ ने विकास खंड छजलैट में 23 वाटर कूलरों की खरीद की।
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विकास खंड की 82 ग्राम पंचायतों में से सबसे अधिक 28.64 लाख रुपये के विकास कार्य ग्राम पंचायत मोढ़ा में कराए गए। वहां प्राइमरी स्कूल में कायाकल्प, सफाई किट, सोलर लाइट और शमशानघाट, पंचायत भवन निर्माण, सीसी टायल्स आदि कार्य किया गया। इसमें से अधिकांश कार्य व भुगतान चालू वित्तीय वर्ष में ही किया गया। नए वित्तीय वर्ष में कराए जाने वाले कार्य से पहले उसकी कार्ययोजना ग्राम सभा की बैठक में बननी चाहिए। ग्रामीणों के मुताबिक लेकिन ऐसा नहीं किया गया। बिना ग्राम सभा की बैठक बुलाए ही कार्ययोजना की खानापूर्ति कर कार्य के एवज में करोड़ों रुपये का भुगतान कर दिया गया।
पंचायतराज विभाग की ई-स्वराज वेबसाइट के अवलोकन से भी इसकी पुष्टि होती है। कार्ययोजना का प्रस्ताव ई-वेबसाइट पर लोड किया जाना अनिवार्य है, लेकिन यहां ऐसा नहीं किया गया। विकास कार्यों की खामी को छुपाने के लिए ई-स्वराज वेबसाइट की कार्ययोजना की पीडीएफ फाइल में किसी ग्राम पंचायत में सादे कागज, किसी में अपठनीय अभिलेख, तो किसी में अंत्योदय योजना का फार्मेट अपलोड कर कर्तव्यों की इतिश्री कर ली गई। इससे प्रशासकों के कार्यकाल के दौरान पंचायतीराज मंत्री के गृह ब्लाक में कराए गए 5.77 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की वैधानिकता पर ही सवालिया निशान लग गया है।