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Moradabad News: रेलवे ट्रैक पर मिले पत्थर का कैमिकल एनालिसिस करेंगे फॉरेंसिक टीम
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मुरादाबाद। नैनी दून एक्सप्रेस मामले में रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों ने जांच तेज कर दी है। डीआरएम राजकुमार सिंह ने आरपीएफ कमांडेंट शानमुग वडिवेल एस के साथ मौका मुआयना किया। साथ ही जांच टीम को पत्थर का मिलान करने के लिए पंजाब के राजपुरा भेजा गया है। फॉरेंसिक टीम इस पत्थर क कैमिकल एनालिसिस करेगी।
जानकारों का मानना है कि ट्रैक पर मिला पत्थर उत्तर प्रदेश में नहीं पाया जाता। मंगलवार को नैनी दून एक्सप्रेस के स्योहारा से गुजरने से थोड़ी देर पहले मालगाड़ी गुजरी थी। कोयला लदी यह मालगाड़ी पंजाब के राजपुरा पावर प्लांट गई थी। जांच टीम को वहां भेजकर उस मालगाड़ी में रखे पत्थरों से ट्रैक पर रखे पत्थर का मिलान करने के लिए कहा गया है। अधिकारियों का कहना है कि हो सकता है कि पत्थर मालगाड़ी से गिरकर ट्रैक पर आ गया। फिलहाल पत्थर का टुकड़ा फॉरेंसिक लैब भेज दिया गया है। जांच टीम जल्द से जल्द इस निष्कर्ष पर पहुंचने की कोशिश कर रही है कि आखिरकार ट्रैक पर 60 किलो से ज्यादा वजन का यह पत्थर कहां से आया। कुछ दिन बाद रेलवे की सुरक्षा व संरक्षा बिदुओं पर जीएम के साथ बैठक है। इस बैठक में भी यह मामला उठेगा, इसलिए अधिकारी तेजी से जांच कर रहे हैं। डीआरएम राजकुमार सिंह का कहना है कि ट्रैक पर पत्थर कहां से आया, इसका पता लगाने के लिए जांच चल रही है।
यह था मामला
मंगलवार रात हरिद्वार से काठगोदाम जा रही (12091) नैनी दून एक्सप्रेस शाम 7:30 बजे स्योहारा से आगे मेवा नवादा पहुंची तो इंजन के पहिये के बीच में बड़ा पत्थर फंस गया था। 60 किलो से ज्यादा वजन के इस पत्थर से इंजन का कैटलगार्ड भी क्षतिग्रस्त हो गया था। बोगियों के हिलने व जोर से कट-कट की आवाज आने पर ड्राइवर ने समझदारी से ट्रेन रोकर हादसा बचाया। ड्राइवर के बयान के मुताबिक ट्रैक के आसपास कोई नहीं था। उस क्षेत्र में आम नागरिकों का आवागमन भी नहीं है, इसलिए जांच टीम असमंजस में है कि पत्थर कहां से आया।
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जानकारों का मानना है कि ट्रैक पर मिला पत्थर उत्तर प्रदेश में नहीं पाया जाता। मंगलवार को नैनी दून एक्सप्रेस के स्योहारा से गुजरने से थोड़ी देर पहले मालगाड़ी गुजरी थी। कोयला लदी यह मालगाड़ी पंजाब के राजपुरा पावर प्लांट गई थी। जांच टीम को वहां भेजकर उस मालगाड़ी में रखे पत्थरों से ट्रैक पर रखे पत्थर का मिलान करने के लिए कहा गया है। अधिकारियों का कहना है कि हो सकता है कि पत्थर मालगाड़ी से गिरकर ट्रैक पर आ गया। फिलहाल पत्थर का टुकड़ा फॉरेंसिक लैब भेज दिया गया है। जांच टीम जल्द से जल्द इस निष्कर्ष पर पहुंचने की कोशिश कर रही है कि आखिरकार ट्रैक पर 60 किलो से ज्यादा वजन का यह पत्थर कहां से आया। कुछ दिन बाद रेलवे की सुरक्षा व संरक्षा बिदुओं पर जीएम के साथ बैठक है। इस बैठक में भी यह मामला उठेगा, इसलिए अधिकारी तेजी से जांच कर रहे हैं। डीआरएम राजकुमार सिंह का कहना है कि ट्रैक पर पत्थर कहां से आया, इसका पता लगाने के लिए जांच चल रही है।
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यह था मामला
मंगलवार रात हरिद्वार से काठगोदाम जा रही (12091) नैनी दून एक्सप्रेस शाम 7:30 बजे स्योहारा से आगे मेवा नवादा पहुंची तो इंजन के पहिये के बीच में बड़ा पत्थर फंस गया था। 60 किलो से ज्यादा वजन के इस पत्थर से इंजन का कैटलगार्ड भी क्षतिग्रस्त हो गया था। बोगियों के हिलने व जोर से कट-कट की आवाज आने पर ड्राइवर ने समझदारी से ट्रेन रोकर हादसा बचाया। ड्राइवर के बयान के मुताबिक ट्रैक के आसपास कोई नहीं था। उस क्षेत्र में आम नागरिकों का आवागमन भी नहीं है, इसलिए जांच टीम असमंजस में है कि पत्थर कहां से आया।
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