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UP: दिल्ली की गाजीपुर मंडी तक खुशबू फैला रहे ऊमरा गोपालपुर के फूल, 300 बीघे में हो रही खेती

Mon, 19 Dec 2022 10:54 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद Published by: शाहरुख खान Updated Mon, 19 Dec 2022 10:54 AM IST
सार

फूलों के व्यवसाय के लिहाज से ऊमरा गोपालपुर का नाम अब दिल्ली की गाजीपुर मंडी तक जाना जाता है। गेंदे की विभिन्न प्रजातियों और गुलदाऊदी के फूलों की सप्लाई दिल्ली के अलावा अलीगढ़, बरेली, मुरादाबाद जिले के कई शहरों में हो रही है

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Flowers of Umra Gopalpur are spreading fragrance till Delhi Ghazipur market
300 बीघे में हो रही खेती - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मुरादाबाद के बिलारी क्षेत्र के गांव ऊमरा गोपालपुर में 30 साल पहले रमन सिंह सैनी ने जब पारंपरिक खेती छोड़कर फूलों की फसल उगाने का निर्णय लिया तो गांव के कुछ लोग उनके इस कदम से चौंके थे। जैसे-जैसे उनके फूलों की खुशबू कारोबार की शक्ल में दूर तक फैली तो इस रास्ते पर और लोग भी चल पड़े। 
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अब गांव की 800 बीघा कृषि भूमि में से 300 बीघा में फूलों की खेती हो रही है। करीब एक हजार की आबादी वाले इस गांव में सौ से ज्यादा लोग फूलों की खेती से जुड़े हैं। फूलों के व्यवसाय के लिहाज से ऊमरा गोपालपुर का नाम अब दिल्ली की गाजीपुर मंडी तक जाना जाता है। 
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गेंदे की विभिन्न प्रजातियों और गुलदाऊदी के फूलों की सप्लाई दिल्ली के अलावा अलीगढ़, बरेली, मुरादाबाद जिले के कई शहरों में हो रही है। गांव की जमीन पर उग रहे फूल दो स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं के जीवकोपार्जन में भी योगदान दे रहे हैं। ये महिलाएं अपने समूह के माध्यम से बैंक से कर्ज लेकर फूलों की खेती कर रही हैं। 
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गांव को मिली नई पहचान
रमन सिंह सैनी की पत्नी अब ग्राम पंचायत ऊमरा गोपालपुर की प्रधान भी हैं। रमन सिंह सैनी बताते हैं कि फूलों की खेती ने गांव को नई पहचान दी है।

काफी लाभकारी है फूलों की खेती

ऊमरा गोपालपुर गांव निवासी किसान राजेंद्र सैनी का कहना है कि एक बीघा में फूलों की खेती से साल भर में दस से 12 हजार रुपये तक की आय हो जाती है। यह बदलाव पारंपरिक्र खेती के मुकाबले काफी फायदेमंद है।

फूलों की खेती का भी हो बीमा
बाबू सिंह सैनी का कहना है कि तेज बारिश और आंधी में फूलों की खेती को नुकसान पहुंचता है, जिसकी भरपाई फसल बीमा से नहीं हो पाती। उनकी मांग है कि फूलों की खेती को बीमे का लाभ दिया जाए।

स्वयं सहायता समूह की पदाधिकारी हेमलता सैनी बताती हैं कि फूलों का काम करने वाले परिवारों को दीपावली का बेसब्री से इंतजार रहता है। उस समय मांग के साथ कीमत बढ़ने से फूल उत्पादकों को अच्छा लाभ मिलता है।
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