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पांच दिन में पांच पॉजिटिव केस...पांच सौ होते नहीं लगेगी देर
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मुरादाबाद। जिले में पांच दिन में पांच संक्रमित मिल चुके हैं। ये संख्या भले ही कम हो, लेकिन पांच से पांच सौ होते देर नहीं लगेगी। मार्च में बरती गई लापरवाही ने अप्रैल में कोरोना के सारे रिकार्ड तोड़ दिए थे। ऐसे में संभावित तीसरी लहर को देखते हुए अभी से सावधान हो जाइए। सामाजिक दूरी का पालने करें और मास्क जरूर लगाएं। वरना अप्रैल-मई जैसे हालात से फिर जूझना पड़ सकता है।
इस साल जनवरी में जिले में 203 लोग कोरोना संक्रमित पाए गए थे। फरवरी में संक्रमण की रफ्तार में कमी आई और सिर्फ 60 पॉजिटिव केस मिले। संक्रमित मरीजों की संख्या कम होने पर लोगों ने लापरवाही बरती। सामाजिक दूरी टूटी और लोगों ने मास्क से मुंह मोड़ लिया। नतीजतन फरवरी की तुलना में मार्च में पांच गुना अधिक पॉजिटिव केस मिले। अप्रैल में कोरोना संक्रमण के फैलाव से हाहाकार मच गया। 17 महीने के संक्रमण काल में अप्रैल महीने में सबसे अधिक 16087 पॉजिटिव केस मिले थे। दूसरी ओर जून और जुलाई में मरीजों की संख्या में गिरावट आई। जून में 131 और जुलाई में सिर्फ 15 पॉजिटिव केस मिले। ऐसे में एक बार फिर लोग लापरवाह होने लगे हैं। सोशल डिस्टेंस तो दूर मास्क पहनने से भी गुरेज करने लगे हैं। सैनिटाइजर का इस्तेमाल तो बंद ही कर दिया है। इस बीच अगस्त के पांच दिन में पांच लोग संक्रमित मिल चुके हैं। इसमें दो भाई शामिल हैं, जो फिर से संक्रमण की चेन बनने की ओर इशारा करते हैं। अगर फरवरी-मार्च की तरह लापरवाही बरती गई तो हालात अप्रैल-मई जैसे होने में ज्यादा समय नहीं लगेंगे।
उतार के बाद संक्रमण दर पकड़ती है रफ्तार
मुरादाबाद। डिस्टिक एपिडिमियोलॉजिस्ट अजीजुर्रहीम का कहना है कि 17 महीने के कोरोना संक्रमण काल के आंकड़ों पर गौर करें तो उतार के बाद संक्रमण की दर फिर से रफ्तार पकड़ती है। पिछले साल जुलाई, अगस्त और सितंबर तेजी से मरीज बढ़े थे। लेकिन इसके बाद संक्रमित मरीजों की संख्या में कमी आई। इस साल मार्च में संक्रमित मरीजों की संख्या में वृद्धि शुरू हुई। अप्रैल और मई में हालात बेकाबू रहे। ऐसे में हमें सबक लेने की जरूरत है। अभी से एहतियात बरतें।
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सात महीने के आंकड़े
जनवरी -----203
फरवरी------60
मार्च--------313
अप्रैल-------16087
मई---------10363
जून---------131
जुलाई-------15
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इस साल जनवरी में जिले में 203 लोग कोरोना संक्रमित पाए गए थे। फरवरी में संक्रमण की रफ्तार में कमी आई और सिर्फ 60 पॉजिटिव केस मिले। संक्रमित मरीजों की संख्या कम होने पर लोगों ने लापरवाही बरती। सामाजिक दूरी टूटी और लोगों ने मास्क से मुंह मोड़ लिया। नतीजतन फरवरी की तुलना में मार्च में पांच गुना अधिक पॉजिटिव केस मिले। अप्रैल में कोरोना संक्रमण के फैलाव से हाहाकार मच गया। 17 महीने के संक्रमण काल में अप्रैल महीने में सबसे अधिक 16087 पॉजिटिव केस मिले थे। दूसरी ओर जून और जुलाई में मरीजों की संख्या में गिरावट आई। जून में 131 और जुलाई में सिर्फ 15 पॉजिटिव केस मिले। ऐसे में एक बार फिर लोग लापरवाह होने लगे हैं। सोशल डिस्टेंस तो दूर मास्क पहनने से भी गुरेज करने लगे हैं। सैनिटाइजर का इस्तेमाल तो बंद ही कर दिया है। इस बीच अगस्त के पांच दिन में पांच लोग संक्रमित मिल चुके हैं। इसमें दो भाई शामिल हैं, जो फिर से संक्रमण की चेन बनने की ओर इशारा करते हैं। अगर फरवरी-मार्च की तरह लापरवाही बरती गई तो हालात अप्रैल-मई जैसे होने में ज्यादा समय नहीं लगेंगे।
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उतार के बाद संक्रमण दर पकड़ती है रफ्तार
मुरादाबाद। डिस्टिक एपिडिमियोलॉजिस्ट अजीजुर्रहीम का कहना है कि 17 महीने के कोरोना संक्रमण काल के आंकड़ों पर गौर करें तो उतार के बाद संक्रमण की दर फिर से रफ्तार पकड़ती है। पिछले साल जुलाई, अगस्त और सितंबर तेजी से मरीज बढ़े थे। लेकिन इसके बाद संक्रमित मरीजों की संख्या में कमी आई। इस साल मार्च में संक्रमित मरीजों की संख्या में वृद्धि शुरू हुई। अप्रैल और मई में हालात बेकाबू रहे। ऐसे में हमें सबक लेने की जरूरत है। अभी से एहतियात बरतें।
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सात महीने के आंकड़े
जनवरी -----203
फरवरी------60
मार्च--------313
अप्रैल-------16087
मई---------10363
जून---------131
जुलाई-------15