फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Moradabad News ›   FIR should be registered against the responsible, the girl is not known even on the second day

खुला बाल आश्रय गृह से फरार किशोरी

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 06 Aug 2021 02:42 AM IST
विज्ञापन
FIR should be registered against the responsible, the girl is not known even on the second day
मुरादाबाद। खुला बाल आश्रय गृह से बुधवार को दीवार फांदकर फरार हुई 13 वर्षीय किशोरी का दूसरे दिन गुरुवार को शाम तक कुछ पता नहीं लग सका है। गुरुवार को जब बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष व सदस्यों ने निरीक्षण किया तो संस्था की लापरवाही उजागर हुई। सदस्यों का कहना है कि बालिका की जिम्मेदारी रेलवे चाइल्ड लाइन को दी गई थी, लेकिन उन्होंने आपस में मिलीभगत से बालिका को खुला बाल आश्रय गृह में रखा। वहां की व्यवस्थाओं और संस्था के पदाधिकारी व कर्मचारियों के जवाबों पर नाराजगी व्यक्त करते हुए शुक्रवार को बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत होने के निर्देश दिए। वहीं, किशोरी के माता-पिता गुरुवार रात मायूस होकर लौट गए। वहीं, इस संबंध में राज्य बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष डॉ. विशेष गुप्ता ने कहा कि दोनों संस्थाओं के जिम्मेदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होनी चाहिए, क्योंकि किशोरी का इस तरह फरार हो जाना बहुत बड़ा मामला है।
विज्ञापन

बाल कल्याण समिति के सदस्य हरी मोहन गुप्ता ने बताया कि उन्होंने अध्यक्ष अमित कौशल के साथ संस्था का गुरुवार को दोबारा निरीक्षण किया है। वहां पर शोभना ग्रामोद्योग सेवा समिति द्वारा संचालित खुला बाल आश्रय गृह की सचिव शोभना गुप्ता और रेलवे चाइल्ड लाइन के समन्वयक अतीक फारुखी व अन्य कर्मचारियों से पूछताछ की है। अमित कौशल ने बताया कि दो अगस्त को किशोरी की जिम्मेदारी रेलवे चाइल्ड लाइन को सौंपी थी। नियम है कि खुला बाल आश्रय गृह में दस वर्ष से ऊपर की बालिका नहीं रखी जा सकती है। दोनों संस्थाओं का संचालन शोभना गुप्ता कर रही हैं, इसलिए उन्होंने किशोरी को खुला बाल आश्रय गृह में रख लिया, जबकि वह दूसरी संस्था की किशोरी को अपने यहां नहीं रख सकती हैं। हमने उनसे दोनों संस्थाओं के बाइलॉज के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि यह अलग-अलग हैं। रेलवे स्टेशन पर ही बच्चों को रखने की वैकल्पिक व्यवस्था बनाई जानी चाहिए थी। खुला बाल आश्रय गृह में रेलवे चाइल्ड लाइन के लिए जिस कमरे को वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में रखा है उसकी स्थिति बहुत खराब है। उसमें पंखा और लाइट तक की सुविधा नहीं है। उन्होंने यह व्यवस्था किस प्रावधान के तहत की है, इसके संबंध में भी कागजात मांगे हैं। मैं उनके अभी तक के जवाबों से संतुष्ट नहीं हूूं। इसलिए शुक्रवार को बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत होने के निदे्रश दिए हैं।
विज्ञापन

यह है मामला
नेपाल निवासी 13 वषी्रय किशोरी एक अगस्त को रेलवे चाइल्ड लाइन को स्टेशन पर मिली थी। दो अगस्त को सीडब्ल्यूसी के समक्ष प्रस्तुत की गई। वहां पर सीडब्ल्यूसी के सदस्यों ने किशोरी के परिजनों से बात की तो उन्होंने चार अगस्त तक आने को कहा था। इस पर सदस्यों रेलवे चाइल्ड लाइन को जिम्मेदारी दे दी थी, लेकिन चाइल्ड लाइन के सदस्यों ने उसे खुला बाल आश्रय गृह भेज दिया था। यहां से बुधवार सुबह साढ़े छह बजे किशोरी दीवार फांदकर फरार हो गई।
विज्ञापन
विज्ञापन

इनसेट....
परिजनों के मायूसी के जिम्मेदार दोनों संस्थाओं के पदाधिकारी
राज्य बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष डॉ. विशेष गुप्ता का कहना है कि बाल कल्याण समिति को किशोरी की सुरक्षा में लापरवाही बरतने के मामले में रेलवे चाइल्ड लाइन और खुला बाल आश्रय गृह के पदाधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवानी चाहिए। परिजन बिना किशोरी को लिए मायूस होकर लौटे हैं, इसके लिए दोनों संस्थाओं के पदाधिकारी जिम्मेदार हैं। केयर प्रोटेक्शन वाली किशोरी का भागना बड़ी बात है। सीडब्ल्यूसी को जिलाधिकारी के संज्ञान में भी मामले को लाना चाहिए। नोटिस जारी कर पूछें कि जब रेलवे चाइल्ड लाइन को जिम्मेदारी सौंपी तो बालिका को खुला बाल आश्रय गृह क्यों भेजा।
वर्जन...
पुलिस और हम किशोरी को ढूंढ रहे हैं। लापरवाही बरतने वाली सदस्य से स्पष्टीकरण लिया जा रहा है। हमारे यहां किशोरी को रात में रखने की व्यवस्था नहीं थी, इसलिए उसे वहां रखा गया था, क्योंकि दोनों संस्था की संचालक एक ही हैं। बड़े बच्चों के लिए संस्था में अलग कमरा लिया है। चाइल्ड लाइन के लिए कई बार स्टेशन सुप्रीटेंडेंट से कमरा देने की मांग की है, लेकिन वह नहीं मिला। हम अलग से ही कमरे की व्यवस्था कर रहे हैं।

अतीक सिद्दीकी, समन्वयक, रेलवे चाइल्ड लाइन।
24 घंटे में अधिकारियों को सूचना देने का नियम है। एक्ट के अनुसार उसके अंदर अधिकारियों को सूचना दी थी। इसके अलावा सिविल लाइंस थाने में भी शिकायत की है। जिले में कोई ऐसी व्यवस्था नहीं है, जहां बड़ी उम्र के बच्चों को रोका जाए। दोनों संस्था हमारी हैं, इसलिए उन्हें रखना पड़ा है।
शोभना गुप्ता, सचिव, शोभना ग्रोमोद्योग सेवा समिति।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed