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Moradabad News: एसईजेड में फैक्टरियों को 23 साल से पानी का इंतजार
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मुरादाबाद। एसईजेड (विशेष आर्थिक क्षेत्र) में फैक्टरियों को पानी सप्लाई के लिए 23 साल पहले बनाया गया ओवरहेड टैंक अभी तक चालू नहीं हो सका। इसकी वजह से फैक्टरी संचालकों को निजी संसाधनों से पानी की व्यवस्था करनी पड़ रही है। ओवरहेड टैंक चालू कराने के लिए फैक्टरी संचालकों की ओर से कई बार संबंधित विभाग को पत्र लिखा जा चुका है। एसईजेड में कुल 66 फैक्टरियां लगाई गई हैं।
पाकबड़ा-डींगरपुर रोड स्थित औद्योगिक क्षेत्र का एसईजेड (विशेष आर्थिक क्षेत्र) वर्ष 2003 में 251 एकड़ भूमि में बसाया गया। इसे पॉकेट ए और पॉकेट बी में बांटा गया है। इसमें निर्यातकों ने वर्ष 2007 से फैक्टरियां लगानी शुरू कीं। अब तक कुल 111 प्लॉट में 66 फैक्टरियां लगाई गई हैं। फैक्टरियों को पानी की सुविधा मुहैया कराने के लिए पॉकेट ए और पॉकेट बी में दो ओवरहेड टैंक बनाए गए हैं। 23 साल बीत गए लेकिन अभी तक ओवरहेड टैंक चालू नहीं हो सका है। जबकि इसे चालू करने के लिए एसईजेड के कई फैक्टरी संचालक संबंधित अधिकारी को पत्र लिख चुके हैं। मुरादाबाद एसईजेड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास अरोड़ा का कहना है कि एसईजेड में सबसे ज्यादा ओवरहेड टैंक चालू करने की जरूरत है। इसके चालू हो जाने से फैक्टरी संचालकों को जमीन से पानी नहीं निकालना पड़ेगा। एसईजेड में बना टैंक खराब हो रहा है। लाइटें जर्जर हो चुकी हैं। सीढ़ियां टूट रही हैं। अगर इसे चालू नहीं किया गया तो ओवरहेड टैंक और खराब हो जाएगा। मुरादाबाद एसईजेड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के वाइस प्रेसिडेंट विकास अग्रवाल ने बताया कि फैक्टरियों में प्लेटिंग का काम होता है। इसकी वजह से किसी फैक्टरी को 25 हजार लीटर तो किसी को 30 हजार लीटर पानी की जरूरत पड़ती है। ओवरहेड टैंक फैक्टरियों की सुविधा के लिए बनाया गया है लेकिन अभी तक इसे चालू नहीं किया गया।
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एसईजेड में 255 प्लाट हैं खाली
-एसईजेड में कुल 366 प्लाट हैं। इसमें 23 साल बाद भी 255 प्लाट खाली हैं। प्लाट खरीदने के लिए कारोबारी आगे नहीं आ रहे हैं क्योंकि एसईजेड में फैक्टरी लगाने के बाद वहां बनने वाले उत्पाद का केवल निर्यात किया जा सकता है। एरिया मैनेजर गेसू मौर्या ने बताया कि प्लाट देखने के लिए नोएडा, गाजियाबाद समेत अन्य जगहों के कारोबारी आ रहे हैं। लेकिन वह कस्टम ड्यूटी फ्री करने की बात करते हैं। कारोबारी इस शर्त पर फैक्टरी लगाना चाहते हैं कि उन्हें निर्यात के साथ घरेलू स्तर पर भी हस्तशिल्प उत्पाद की बिक्री करने दिया जाएगा। कस्टम ड्यूटी हटाई जाए।
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ओवरहेड टैंक चालू करने के लिए 40 प्रतिशत होनी चाहिएं फैक्टरियां
-एरिया मैनेजर गेसू मौर्या का कहना है कि ओवरहेड टैंक चालू करने के लिए एसईजेड में 40 प्रतिशत फैक्टरियों का होना अनिवार्य है। अभी तक एसईजेड में 30 प्रतिशत ही फैक्टरियां लगाई गई हैं। अगर ओवरहेड टैंक चालू कर दिया गया तो पानी के दबाव से लाइनें फट जाएंगी। क्योंकि पानी चालू करने के बाद इसका अधिक से अधिक फैक्टरियों में उपयोग होना चाहिए। अभी तक पानी के लिए केवल चार से पांच लोगों ने कनेक्शन लिया है।
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पाकबड़ा-डींगरपुर रोड स्थित औद्योगिक क्षेत्र का एसईजेड (विशेष आर्थिक क्षेत्र) वर्ष 2003 में 251 एकड़ भूमि में बसाया गया। इसे पॉकेट ए और पॉकेट बी में बांटा गया है। इसमें निर्यातकों ने वर्ष 2007 से फैक्टरियां लगानी शुरू कीं। अब तक कुल 111 प्लॉट में 66 फैक्टरियां लगाई गई हैं। फैक्टरियों को पानी की सुविधा मुहैया कराने के लिए पॉकेट ए और पॉकेट बी में दो ओवरहेड टैंक बनाए गए हैं। 23 साल बीत गए लेकिन अभी तक ओवरहेड टैंक चालू नहीं हो सका है। जबकि इसे चालू करने के लिए एसईजेड के कई फैक्टरी संचालक संबंधित अधिकारी को पत्र लिख चुके हैं। मुरादाबाद एसईजेड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास अरोड़ा का कहना है कि एसईजेड में सबसे ज्यादा ओवरहेड टैंक चालू करने की जरूरत है। इसके चालू हो जाने से फैक्टरी संचालकों को जमीन से पानी नहीं निकालना पड़ेगा। एसईजेड में बना टैंक खराब हो रहा है। लाइटें जर्जर हो चुकी हैं। सीढ़ियां टूट रही हैं। अगर इसे चालू नहीं किया गया तो ओवरहेड टैंक और खराब हो जाएगा। मुरादाबाद एसईजेड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के वाइस प्रेसिडेंट विकास अग्रवाल ने बताया कि फैक्टरियों में प्लेटिंग का काम होता है। इसकी वजह से किसी फैक्टरी को 25 हजार लीटर तो किसी को 30 हजार लीटर पानी की जरूरत पड़ती है। ओवरहेड टैंक फैक्टरियों की सुविधा के लिए बनाया गया है लेकिन अभी तक इसे चालू नहीं किया गया।
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एसईजेड में 255 प्लाट हैं खाली
-एसईजेड में कुल 366 प्लाट हैं। इसमें 23 साल बाद भी 255 प्लाट खाली हैं। प्लाट खरीदने के लिए कारोबारी आगे नहीं आ रहे हैं क्योंकि एसईजेड में फैक्टरी लगाने के बाद वहां बनने वाले उत्पाद का केवल निर्यात किया जा सकता है। एरिया मैनेजर गेसू मौर्या ने बताया कि प्लाट देखने के लिए नोएडा, गाजियाबाद समेत अन्य जगहों के कारोबारी आ रहे हैं। लेकिन वह कस्टम ड्यूटी फ्री करने की बात करते हैं। कारोबारी इस शर्त पर फैक्टरी लगाना चाहते हैं कि उन्हें निर्यात के साथ घरेलू स्तर पर भी हस्तशिल्प उत्पाद की बिक्री करने दिया जाएगा। कस्टम ड्यूटी हटाई जाए।
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ओवरहेड टैंक चालू करने के लिए 40 प्रतिशत होनी चाहिएं फैक्टरियां
-एरिया मैनेजर गेसू मौर्या का कहना है कि ओवरहेड टैंक चालू करने के लिए एसईजेड में 40 प्रतिशत फैक्टरियों का होना अनिवार्य है। अभी तक एसईजेड में 30 प्रतिशत ही फैक्टरियां लगाई गई हैं। अगर ओवरहेड टैंक चालू कर दिया गया तो पानी के दबाव से लाइनें फट जाएंगी। क्योंकि पानी चालू करने के बाद इसका अधिक से अधिक फैक्टरियों में उपयोग होना चाहिए। अभी तक पानी के लिए केवल चार से पांच लोगों ने कनेक्शन लिया है।