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राहत पैकेज के लिए राजस्व सचिव से मिले निर्यातक
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मुरादाबाद। हस्तशिल्प उद्योग के लिए राहत पैकेज की मांग के साथ शहर के कुछ वरिष्ठ निर्यातकों ने गुरुवार को दिल्ली में रेवेन्यु सेक्रेटरी से मुलाकात की। प्रतिनिधि मंडल में ईपीसीएच के पदाधिकारी भी शामिल रहे। निर्यातकों ने रेवेन्यु सेक्रेटरी से मांग की है कि इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) की सुविधा निर्यातकों को दी जाए। इसके अलावा हस्तशिल्प पर जीएसटी की दरें कम करने और कस्टम की ओर से जारी रिस्की एक्सपोर्टर्स की सूची में शामिल निर्यातकों के रिफंड नहीं रोकने की मांग भी रेवेन्यु सेक्रेटरी के सामने रखी गई।
निर्यातक अजय गुप्ता और सतपाल के नेतृत्व में निर्यातकों का प्रतिनिधि मंडल दिल्ली में रेवेन्यु सेक्रेटरी और जीएसटी बोर्ड के चेयरमैन डा. अजय भूषण पांडेय से मिला। निर्यातकों ने कहा कि जीएसटी लागू होने के समय निर्यातकों के पास जो स्टॉक पहले से पड़ा था, उस पर वह टैक्स चुका चुके थे। लेकिन उस स्टॉक पर उन्हें टैक्स का क्रेडिट नहीं मिला। निर्यातकों फॉरेन एक्सचेंज पर लग रहे 0.4 प्रतिशत कनवर्जन चार्ज का भी विरोध किया। निर्यातकों ने कहा कि जीएसटी लागू होने से पहले हस्तशिल्प उत्पाद टैक्स फ्री थे। अब दरें ज्यादा हैं, लिहाजा इन्हें कम किया जाए। हस्तशिल्प में मुख्य मुकाबला चीन से बताते हुए निर्यातकों ने रेवेन्यु सेक्रेटरी से कहा है कि यदि तुरंत कोई राहत पैकेज नहीं मिला तो हस्तशिल्प निर्यात में 40 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। नई मशीनरी और पुरानी मशीनरी की खरीद पर समान रूप से 18 फीसदी टैक्स को भी निर्यातकों ने अव्यवहारिक बताया है। पार्टनरशिप फर्मों के बंटवारे की दशा में टैक्स वसूली को भी निर्यातकों ने गलत बताया। रिस्की निर्यातकों की सूची पर निर्यातकों का कहना था कि यदि सूची में शामिल स्थापित निर्यातकों के भी रिफंड रोक दिए गए तो इसका निर्यात पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। वार्ता के दौरान ज्वाइंट सेक्रेटरी लोहानी भी मौजूद रहे। प्रतिनिधि मंडल में मोहम्मद इकबाल शम्सी, अब्दुल अजीम, ईपीसीएच से डिप्टी डायरेक्टर राजेश रावत भी शामिल थे।
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निर्यातक अजय गुप्ता और सतपाल के नेतृत्व में निर्यातकों का प्रतिनिधि मंडल दिल्ली में रेवेन्यु सेक्रेटरी और जीएसटी बोर्ड के चेयरमैन डा. अजय भूषण पांडेय से मिला। निर्यातकों ने कहा कि जीएसटी लागू होने के समय निर्यातकों के पास जो स्टॉक पहले से पड़ा था, उस पर वह टैक्स चुका चुके थे। लेकिन उस स्टॉक पर उन्हें टैक्स का क्रेडिट नहीं मिला। निर्यातकों फॉरेन एक्सचेंज पर लग रहे 0.4 प्रतिशत कनवर्जन चार्ज का भी विरोध किया। निर्यातकों ने कहा कि जीएसटी लागू होने से पहले हस्तशिल्प उत्पाद टैक्स फ्री थे। अब दरें ज्यादा हैं, लिहाजा इन्हें कम किया जाए। हस्तशिल्प में मुख्य मुकाबला चीन से बताते हुए निर्यातकों ने रेवेन्यु सेक्रेटरी से कहा है कि यदि तुरंत कोई राहत पैकेज नहीं मिला तो हस्तशिल्प निर्यात में 40 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। नई मशीनरी और पुरानी मशीनरी की खरीद पर समान रूप से 18 फीसदी टैक्स को भी निर्यातकों ने अव्यवहारिक बताया है। पार्टनरशिप फर्मों के बंटवारे की दशा में टैक्स वसूली को भी निर्यातकों ने गलत बताया। रिस्की निर्यातकों की सूची पर निर्यातकों का कहना था कि यदि सूची में शामिल स्थापित निर्यातकों के भी रिफंड रोक दिए गए तो इसका निर्यात पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। वार्ता के दौरान ज्वाइंट सेक्रेटरी लोहानी भी मौजूद रहे। प्रतिनिधि मंडल में मोहम्मद इकबाल शम्सी, अब्दुल अजीम, ईपीसीएच से डिप्टी डायरेक्टर राजेश रावत भी शामिल थे।
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