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Moradabad News: परीक्षा सिर पर... किताबों का पता नहीं
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मुरादाबाद। एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों की संख्या जिले में करीब 80 है। अकेले हिंदू कॉलेज में 10 हजार से ज्यादा विद्यार्थी हैं। 80 कॉलेजों के एक लाख से ज्यादा विद्यार्थियों की परीक्षाएं सिर पर हैं और नए पाठ्यक्रम की किताबों का अता-पता नहीं है। नई शिक्षा नीति के तहत सिलेबस को कुछ हिस्सों में बांट दिया गया है, तो कुछ नए टॉपिक भी जोड़े गए हैं।
ऐसे में विद्यार्थियों को पुरानी किताबों में नए टॉपिक नहीं मिल रहे हैं। कई कक्षाओं केे सिलेबस में बड़ा बदलाव हुआ है। इसके कारण विद्यार्थी परेशान हैं। शिक्षक व्हाट्सएप के जरिये कई किताबों को मिलाकर बनाए नोट्स उन्हें उपलब्ध करा रहे हैं। इन्हीं के जरिये पढ़ाई चल रही है। विडंबना यह है कि किसी के पास विद्यार्थियों की इस समस्या का हल नहीं है।
हिंदू कॉलेज में बीए, बीएससी, बीकॉम, बीबीए, एमए, एमएससी, एमकॉम आदि की कक्षाएं कई विषयों के साथ संचालित होती हैं। हर कक्षा के विद्यार्थियों को किताबों से संबंधित समस्या है। हालांकि, लाइब्रेरी में उपलब्ध अलग-अलग किताबों के टटोलने के बाद विद्यार्थियों को काफी टॉपिक मिल जाते हैं लेकिन संपूर्ण समाधान नहीं मिलता। किसी भी एक किताब में पूरा सिलेबस नहीं है। आए दिन विद्यार्थी कॉलेजों के पुस्तकालयों में किताबें टटोलते नजर आते हैं। बाजारों में निजी बुक स्टॉल्स पर भी नई शिक्षा नीति के तहत बदले पाठ्यक्रम की सभी किताबें उपलब्ध नहीं हैं। जानकारों का कहना है कि यूजीसी से किताबों के लिए कॉलेजों को मिलने वाली राशि भी कम है। इस कारण लाइब्रेरी में सभी किताबें उपलब्ध नहीं हो पाती हैं।
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इस तरह समझें किताबों का गणित
केजीके कॉलेज में छात्र संख्या : 10500
हिंदू कॉलेज में छात्र संख्या : 14000
केजीके कॉलेज में पुस्तकों की संख्या करीब : 70,000
हिंदू कालेज में पुस्तकों की संख्या करीब : 1,00,000
पुस्तकालय शुल्क 27 रुपये
यूजीसी से हर साल प्रति विषय : 50000 रुपये
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किताबें न होने के कारण बढ़ी गेसपेपर की मांग
बाजार में किताबें न होने के लिए पाठ्यक्रम में बदलाव के साथ विद्यार्थी सिर्फ गेसपेपर लेकर काम चलाना चाहते हैं। इसकी वजह से बाजार में किताबों से ज्यादा गेसपेपर की मांग है। परीक्षाओं के नजदीक आते आते क्वेश्चन बैंक, अनसोल्ड पेपर व गेसपेपर की मांग बढ़ने लगी है। पुस्तक विक्रेता तक इस वजह से किताबों से ज्यादा गेसपेपर पर फोकस कर रहे हैं। शहर में स्टेशन रोड, बुध बाजार व रामगंगा विहार में किताबों की दुकानों पर यही स्थिति है।
वर्जन
सारा सिलेबस एक ही किताब में न होने की बात ठीक है, लेकिन अच्छे लेखक एक ही किताब में कई टॉपिक कवर करते हैं। हो सकता है विद्यार्थियों को अलग-अलग किताबें पढ़नी पढ़ रही हों, लेकिन सिलेबस का ज्यादातर हिस्सा पुस्तकों में मिल जा रहा है। हम पुस्तकालय में हर वर्ष किताबों की संख्या बढ़ा रहे हैं।
- प्रो. एसएस रावत, प्राचार्य हिंदू कॉलेज
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ऐसे में विद्यार्थियों को पुरानी किताबों में नए टॉपिक नहीं मिल रहे हैं। कई कक्षाओं केे सिलेबस में बड़ा बदलाव हुआ है। इसके कारण विद्यार्थी परेशान हैं। शिक्षक व्हाट्सएप के जरिये कई किताबों को मिलाकर बनाए नोट्स उन्हें उपलब्ध करा रहे हैं। इन्हीं के जरिये पढ़ाई चल रही है। विडंबना यह है कि किसी के पास विद्यार्थियों की इस समस्या का हल नहीं है।
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हिंदू कॉलेज में बीए, बीएससी, बीकॉम, बीबीए, एमए, एमएससी, एमकॉम आदि की कक्षाएं कई विषयों के साथ संचालित होती हैं। हर कक्षा के विद्यार्थियों को किताबों से संबंधित समस्या है। हालांकि, लाइब्रेरी में उपलब्ध अलग-अलग किताबों के टटोलने के बाद विद्यार्थियों को काफी टॉपिक मिल जाते हैं लेकिन संपूर्ण समाधान नहीं मिलता। किसी भी एक किताब में पूरा सिलेबस नहीं है। आए दिन विद्यार्थी कॉलेजों के पुस्तकालयों में किताबें टटोलते नजर आते हैं। बाजारों में निजी बुक स्टॉल्स पर भी नई शिक्षा नीति के तहत बदले पाठ्यक्रम की सभी किताबें उपलब्ध नहीं हैं। जानकारों का कहना है कि यूजीसी से किताबों के लिए कॉलेजों को मिलने वाली राशि भी कम है। इस कारण लाइब्रेरी में सभी किताबें उपलब्ध नहीं हो पाती हैं।
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इस तरह समझें किताबों का गणित
केजीके कॉलेज में छात्र संख्या : 10500
हिंदू कॉलेज में छात्र संख्या : 14000
केजीके कॉलेज में पुस्तकों की संख्या करीब : 70,000
हिंदू कालेज में पुस्तकों की संख्या करीब : 1,00,000
पुस्तकालय शुल्क 27 रुपये
यूजीसी से हर साल प्रति विषय : 50000 रुपये
किताबें न होने के कारण बढ़ी गेसपेपर की मांग
बाजार में किताबें न होने के लिए पाठ्यक्रम में बदलाव के साथ विद्यार्थी सिर्फ गेसपेपर लेकर काम चलाना चाहते हैं। इसकी वजह से बाजार में किताबों से ज्यादा गेसपेपर की मांग है। परीक्षाओं के नजदीक आते आते क्वेश्चन बैंक, अनसोल्ड पेपर व गेसपेपर की मांग बढ़ने लगी है। पुस्तक विक्रेता तक इस वजह से किताबों से ज्यादा गेसपेपर पर फोकस कर रहे हैं। शहर में स्टेशन रोड, बुध बाजार व रामगंगा विहार में किताबों की दुकानों पर यही स्थिति है।
वर्जन
सारा सिलेबस एक ही किताब में न होने की बात ठीक है, लेकिन अच्छे लेखक एक ही किताब में कई टॉपिक कवर करते हैं। हो सकता है विद्यार्थियों को अलग-अलग किताबें पढ़नी पढ़ रही हों, लेकिन सिलेबस का ज्यादातर हिस्सा पुस्तकों में मिल जा रहा है। हम पुस्तकालय में हर वर्ष किताबों की संख्या बढ़ा रहे हैं।
- प्रो. एसएस रावत, प्राचार्य हिंदू कॉलेज