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Moradabad News: भाजपा के हर दांव ने सपा को दी मात

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 24 Nov 2024 07:09 AM IST
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Every move of BJP defeated SP
मुरादाबाद। भाजपा प्रत्याशी रामवीर सिंह को कुंदरकी का किंग बनाने के लिए पार्टी की ओर से चला गया हर दांव सफल रहा। मुस्लिमों को रिझाने के लिए जहां भाजपा ने मुस्लिम पन्ना प्रमुख बनाए, अल्पसंख्यक सम्मेलन करवाया, वहीं रामवीर सिंह का बूथ मैनेजमेंट और समाजवादी पार्टी की अंतर्कलह भी भाजपा की जीत का अहम कारण बनी।
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कुंदरकी विधानसभा सीट पर लगातार दो चुनाव हारने और 2022 के चुनाव में टिकट कटने के बाद भी रामवीर सिंह जनता के बीच डटे रहे। आमताैर पर भाजपा से दूर रहने वाले मुस्लिम मतदाताओं को रिझाने के लिए उन्होंने हर जतन किया। मुस्लिमों में हाजी रिजवान के विरोध को भांपते हुए चुनाव को भाजपा बनाम सपा बनने नहीं दिया। इसके बाद चुनावी समीकरण उनके पक्ष में होते चले गए।
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रामवीर ने सपा की अंतर्कलह के बीच अपने बेहतर रिश्ते और बूथ मैनेजमेंट को हथियार बनाया और मुस्लिम मतों में सेंध लगाकर कुंदरकी में भाजपा का 31 साल का वनवास खत्म कर दिया। रिकाॅर्ड मतों चुनाव जीतकर रामवीर कुंदरकी से भाजपा के दूसरे विधायक बने। इससे पहले कुंदरकी विधानसभा सीट पर भाजपा को 1993 में चंद्र विजय सिंह ने जीत दिलाई थी।
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मुरादाबाद जिले की कुंदरकी विधानसभा सीट पर 1967 से 2022 तक 15 बार चुनाव हुए। इन 15 चुनावों में सबसे अधिक चार बार समाजवादी पार्टी को जीत मिली है, जबकि बसपा, कांग्रेस, जनता दल और जनता पार्टी दो-दो बार विजयी रही। इसके अलावा एक बार, भाजपा, निर्दलीय और भारतीय क्रांति दल को जीत मिली थी। अब उपचुनाव में भाजपा को दूसरी जीत मिली। भाजपा की जीत और सपा की हार के कारणों पर सलाम खां की रिपोर्ट...।
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रामवीर बनाम रिजवान

उपचुनाव में मतदाताओं के बीच इस बात की खूब चर्चा रही कि चुनाव में हार-जीत से प्रदेश सरकार के बनने-बिगड़ने पर कोई असर नहीं पड़ेगा। इसके अलावा मतदाताओं में प्रदेश में भाजपा की सरकार होने के कारण कुंदरकी से सपा प्रत्याशी के जीतने पर क्षेत्र के बेहतर विकास की संभावना कम दिखी। ऐसी स्थिति में पूरा चुनाव रामवीर बनाम रिजवान हुआ। सपा उम्मीदवार हाजी रिजवान कुंदरकी उपचुनाव को भाजपा बनाम सपा बनाने में असफल रहे। इसका सीधा फायदा भाजपा प्रत्याशी रामवीर सिंह मिला। हाजी रिजवान कुंदरकी सीट से तीन बार विधायक रहे। पांच साल सत्ता में भी रहे, लेकिन अपेक्षित विकास नहीं हुआ। जिसे लेकर तुर्कों को छोड़ मुस्लिमों की दूसरी बिरादरी में काफी विरोध भी रहा। उनकी नाराजगी रामवीर के प्रति सहानुभूति बनती गई।

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मुस्लिम मतों में सेंध

करीब 65 फीसदी मुस्लिम आबादी वाली कुंदरकी विधानसभा सीट पर सभी की नजरें सपा के परंपरागत मुस्लिम मतों पर ही रहीं। भाजपा को छोड़ सभी प्रमुख दलों ने मुस्लिम प्रत्याशियों पर ही दांव लगाया। इसके अलावा निर्दलीय उम्मीदवार भी मुस्लिम जमात से ही रहे। कुंदरकी विधानसभा सीट पर दो बार चुनाव हार चुके रामवीर सिंह ने भी पूरा जोर मुस्लिम मतों में सेंध लगाने पर ही दिया। इसके लिए विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिम सम्मेलन कराया। इनमें डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक, भाजपा अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष बासित अली समेत अन्य बड़े नेता शामिल हुए। इन्होंने भी मुस्लिम वोटरों को साधने में कोई कसर नहीं छोड़ी। ब्रजेश पाठक ने अपने भाषण में सपा के लिए मुसलमानों को तेजपत्ता बताया था। इसके अलावा मुस्लिमों के बीच दूरी है न खाई है, रामवीर हमारा भाई है नारा भी खूब चला। सम्मेलनों में रामवीर सिंह का टोपी लगाकर मंच पर बैठना भी चर्चा का विषय रहा। इसका रामवीर को फायदा मिला।

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रामवीर की सक्रियता

भाजपा उम्मीदवार रामवीर सिंह की जीत में उनके बूथ मैनेजमेंट के साथ-साथ क्षेत्र में उनकी पकड़, चुनावों में हार मिलने के बाद भी सक्रिय रहना मददगार बना। रामवीर सिंह ने सपा के वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए भाजपा के पन्ना प्रमुखों में गांव के मुस्लिमों को शामिल किया। इन पन्ना प्रमुखों ने अपनी बिरादरी के वोटरों को बूथों तक पहुंचाने का काम किया। इसके अलावा हाजी रिजवान से असंतुष्ट मुस्लिम और गैर मुस्लिम मतदाताओं को भी रामवीर अपनी ओर करने में सफल रहे। इसके लिए वह लगातार असंतुष्टों के संपर्क में रहे। पिछले सात वर्षों में प्रदेश में भाजपा की सरकार होने पर रामवीर ने अपने स्तर से गांव-गांव लोगों की समस्याओं के समाधान भी कराए, जिसने मतदाताओं को अपनी ओर रिझाने का काम किया।

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सपा में आपसी खींचतान

समाजवादी पार्टी में जिले की सियासत में खींचतान चल रही है। करीब छह महीने बाद भी जिला कार्यकारिणी का गठन नहीं हो सका है। इसका असर कुंदरकी उपचुनाव पर भी पड़ा। सपा के जनप्रतिनिधियों ने बड़े नेताओं के साथ मंच तो साझा किए, लेकिन क्षेत्र में प्रचार-प्रसार में हिस्सा लेने से बचते ही रहे। टिकट के दावेदार भी चुनाव प्रचार से दूर ही रहे। मुरादाबाद की सपा सांसद का अखिलेश यादव की सभा में देरी से पहुंचना और रामपुर में आजम खां के घर अधिक समय देना भी चुनाव के दाैरान चर्चा का विषय बना रहा।

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सपा का अत्यधिक आत्मविश्वास

मुस्लिम वोटरों की संख्या को देखते हुए जिले में मुरादाबाद देहात के बाद कुंदरकी विधानसभा सीट सपा की सबसे मजबूत सीट मानी जाती रही है। इसके अलावा पिछले पांच में से चार चुनावों के परिणाम भी पार्टी के पक्ष में रहे। वहीं सपा ने तीन चुनाव जीत चुके हाजी रिजवान पर दांव लगाया था। जीत के आंकड़े और मुस्लिम मतदाताओं की बहुलता को देखते हुए सपा नेता अत्यधिक आत्मविश्वास में रहे। ऐसी स्थिति में मतदान से पहले ही सपाई चुनाव परिणाम अपने पक्ष में मान बैठे। यही वजह रही कि आत्मविश्वास में डूबे सपाई न मुस्लिम मतों के बिखराव की स्थिति को भांप सके और न ही भाजपा की रणनीति को समझ पाए। वहीं पार्टी बिना जिला कार्यकारिणी के उपचुनाव में कूद पड़ी। सपा जनप्रतिनिधियों और पदाधिकारियों ने चुनाव को हल्के में लिया और खामियाजा भुगतना पड़ा।
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कांग्रेस की उपचुनाव से दूरी

सपा उम्मीदवार घोषित होने तक जिले के कांग्रेसी कुंदरकी सीट पर अपना दावा करते रहे। चुनाव की तारीख घोषित होने से दो दिन पहले कुंदरकी विधानसभा क्षेत्र में हुए एक कार्यक्रम में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय और सहारनपुर के सांसद इमरान मसूद समेत अन्य नेता पहुंचे थे, लेकिन गठबंधन की बात नहीं बन पाई। कहने के लिए कुंदरकी सीट पर हाजी रिजवान इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार रहे, लेकिन चुनाव के दाैरान गठबंधन जैसी कोई बात नहीं दिखी। कांग्रेस के अधिकांश नेताओं ने चुनाव प्रचार से दूरी बनाए रखी। बड़े नेताओं के कार्यक्रमों में कांग्रेस के कुछ नेता दिखे तो जरूर, लेकिन लोकसभा चुनाव की तरह सक्रिय नजर नहीं आए।


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रिजवान का पार्टी बदलना

जिले के कद्दावर सपाइयों में हाजी रिजवान का नाम शुमार है। जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीतकर सियासत शुरू करने वाले हाजी रिजवान ने पहला विधानसभा चुनाव वर्ष 1996 में लड़ा था। इस चुनाव में वह बसपा उम्मीदवार हाजी अकबर से महज दो साै वोटों से हार गए थे। इसके बाद वह लगातार 2002, 2007, 2012 और 2017 में सपा के उम्मीदवार बने। इसमें से तीन बार 2002, 2012 और 2017 में उन्हें जीत भी मिली, लेकिन 2022 में टिकट कटने पर हाजी रिजवान बसपा के टिकट पर चुनाव मैदान उतर गए। वह चुनाव भी हारे, साथ ही अखिलेश यादव का विश्वास भी। उपचुनाव में सपा ने उन्हें टिकट दिया, लेकिन अखिलेश यादव ने अपनी सभा में हाजी रिजवान के बसपा में शामिल होने पर चुटकी भी ली थी। उन्होंने मंच से कहा था कि हाजी रिजवान प्रीपेड और पोस्टपेड पार्टी में चले गए थे। रिजवान दो बार निर्दलीय भी चुनाव लड़े चुके हैं।
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