{"_id":"66d41c5e8bb2df81700e925a","slug":"every-10th-policeman-is-a-victim-of-depression-in-moradabad-2024-09-01","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"UP: यहां डिप्रेशन में हर 10वां पुलिसकर्मी... खुदकुशी तक की बात करते हैं कुछ कर्मचारी; सामने आई ये दो बड़ी वजह","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
UP: यहां डिप्रेशन में हर 10वां पुलिसकर्मी... खुदकुशी तक की बात करते हैं कुछ कर्मचारी; सामने आई ये दो बड़ी वजह
Sun, 01 Sep 2024 03:27 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 01 Sep 2024 03:27 PM IST
सार
यूपी के इस जिले में हर 10वां पुलिसकर्मी डिप्रेशन का शिकार हो रहा है। केंद्रीय पुलिस अस्पताल में रोजाना औसतन 150 से 200 पुलिसकर्मी इलाज कराने पहुंचते हैं। अस्पताल पहुंचने वाले अधिकतर पुलिसकर्मी डिप्रेशन में हैं।
विज्ञापन
policeman
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
जिन पुलिसकर्मियों के कंधों पर दूसरों की हिफाजत की जिम्मेदारी है, वही तनाव में हैं। केंद्रीय पुलिस अस्पताल में प्रतिदिन ऐसे तमाम पुलिसकर्मी इलाज कराने पहुंच रहे हैं, जो तनाव में हैं। मनोचिकित्सकों का मानना है कि काम के दबाव और परिवार से दूर रहने के कारण पुलिसकर्मियों में डिप्रेशन तेजी से बढ़ रहा है।
हर 10वां पुलिसकर्मी किसी न किसी वजह से डिप्रेशन का शिकार है। जिले में सिविल पुलिस के अलावा पुलिस अकादमी, पीटीसी, पीटीएस और तीनों पीएसी में भी 10 हजार से ज्यादा पुलिस अधिकारी और कर्मचारियों की तैनाती है।
सभी पुलिसकर्मियों और इनके परिवारों के इलाज के लिए सिविल लाइंस में केंद्रीय पुलिस अस्पताल है। यहां प्रतिदिन औसतन 150 से 200 पुलिसकर्मी इलाज कराने पहुंचते हैं। हैरान करने वाली बात ये है कि अस्पताल पहुंचने वाले अधिकतर पुलिसकर्मी डिप्रेशन में हैं।
विज्ञापन
इलाज करने वाले डॉक्टर इन्हें दवा के साथ-साथ दिनचर्या में बदलाव की सलाह दे रहे हैं। कुछ पुलिसकर्मी सीपीएच, जिला अस्पताल के अलावा निजी मनोचिकित्सकों के पास भी इलाज कराने पहुंच रहे हैं। मनोचिकित्सकों का कहना है कि कुछ पुलिसकर्मी तो इस हद तक तनाव में होते हैं कि आत्महत्या की बात करते हैं।
विज्ञापन
हर 10वां पुलिसकर्मी किसी न किसी वजह से डिप्रेशन का शिकार है। जिले में सिविल पुलिस के अलावा पुलिस अकादमी, पीटीसी, पीटीएस और तीनों पीएसी में भी 10 हजार से ज्यादा पुलिस अधिकारी और कर्मचारियों की तैनाती है।
विज्ञापन
सभी पुलिसकर्मियों और इनके परिवारों के इलाज के लिए सिविल लाइंस में केंद्रीय पुलिस अस्पताल है। यहां प्रतिदिन औसतन 150 से 200 पुलिसकर्मी इलाज कराने पहुंचते हैं। हैरान करने वाली बात ये है कि अस्पताल पहुंचने वाले अधिकतर पुलिसकर्मी डिप्रेशन में हैं।
विज्ञापन
इलाज करने वाले डॉक्टर इन्हें दवा के साथ-साथ दिनचर्या में बदलाव की सलाह दे रहे हैं। कुछ पुलिसकर्मी सीपीएच, जिला अस्पताल के अलावा निजी मनोचिकित्सकों के पास भी इलाज कराने पहुंच रहे हैं। मनोचिकित्सकों का कहना है कि कुछ पुलिसकर्मी तो इस हद तक तनाव में होते हैं कि आत्महत्या की बात करते हैं।
पुलिसकर्मियों में डिप्रेशन तेजी से बढ़ रहा है। इन पुलिसकर्मियों को इलाज के साथ ही काउंसलिंग के जरिये डिप्रेशन से निकालने का प्रयास किया जा रहा है। जरूरत पड़ने पर उन्हें जिला अस्पताल भी रेफर किया जाता है। पुलिसकर्मियों में काम का दबाव और छुट्टी न मिलने के कारण इस तरह की समस्याएं बढ़ रही हैं। -डॉ. एनआर आर्य, सीएमएम, सीपीएच
पुलिसकर्मियों को तनाव मुक्त रखने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उनके लिए पुलिस लाइन में जिम बनाए गए हैं। इसके अलावा थाने में खाली समय में पुलिसकर्मियों के खेलने की व्यवस्था की गई है। पुलिसकर्मियों से संबंधित फाइलों का लगातार निस्तारण किया जा रहा है। इसके अलावा उन्हें आराम के लिए छुट्टियां भी दी जा रही हैं।- सतपाल अंतिल, एसएसपी
पुलिसकर्मियों के तनाव के मुख्य कारण
- शिकायत मिलने पर अफसर तुरंत पुलिसकर्मियों की जांच का आदेश दे देते हैं।
- केसों की जांच में देरी होने पर अफसरों से फटकार लगना।
- लंबे समय तक आवास की व्यवस्था न हो पाना।
- दिन-रात ड्यूटी के दबाव के चलते आराम न मिलना।
- त्योहारों और खास मौके पर छुट्टी न मिल पाना
- दिनभर चौराहों पर ड्यूटी करना।
- परिवार को समय न दे पाना।
- शिकायत मिलने पर अफसर तुरंत पुलिसकर्मियों की जांच का आदेश दे देते हैं।
- केसों की जांच में देरी होने पर अफसरों से फटकार लगना।
- लंबे समय तक आवास की व्यवस्था न हो पाना।
- दिन-रात ड्यूटी के दबाव के चलते आराम न मिलना।
- त्योहारों और खास मौके पर छुट्टी न मिल पाना
- दिनभर चौराहों पर ड्यूटी करना।
- परिवार को समय न दे पाना।
तनाव से बचने के उपाय
प्रतिदिन सुबह-शाम जरूर टहलें, योग करें, अपनों के बीच रहें, किसी भी बात को मन में दबाकर न रखें, कोई समस्या हो तो दोस्तों, परिवार वालों से बात करें, किसी मामले में तुरंत हार न मानें, भरपूर मात्रा में पानी पीएं, पोषक तत्वों से भरपूर भोजन करें, हरी पत्तेदार सब्जियां, मौसमी फल खाएं।
प्रतिदिन सुबह-शाम जरूर टहलें, योग करें, अपनों के बीच रहें, किसी भी बात को मन में दबाकर न रखें, कोई समस्या हो तो दोस्तों, परिवार वालों से बात करें, किसी मामले में तुरंत हार न मानें, भरपूर मात्रा में पानी पीएं, पोषक तत्वों से भरपूर भोजन करें, हरी पत्तेदार सब्जियां, मौसमी फल खाएं।
काम का दबाव, छुट्टी न मिलने के कारण पुलिसकर्मी अपने परिवार को समय नहीं दे पाते हैं। ड्यूटी के दबाव के चलते नींद पूरी न होने के कारण उनमें चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है। छोटी-छोटी गलतियों पर वह गुस्सा जल्दी करने लगते हैं। मेरे पास कई पुलिसकर्मी इलाज करा रहे हैं। पुलिसकर्मियों को अपने लिए समय निकालना चाहिए। -डॉ. नीरज गुप्ता, मनोचिकित्सक