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Moradabad News: अस्पताल से छुट्टी के बाद तबीयत बिगड़ी तो आयुष्मान कार्ड भी नाकाम

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 13 Aug 2026 02:22 AM IST
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Even the Ayushman card proved ineffective when health deteriorated after discharge from the hospital.
मुरादाबाद। गरीब और जरूरतमंद परिवारों को पांच लाख तक का मुफ्त इलाज देने वाली आयुष्मान भारत योजना में एक ऐसी समस्या आ रही है, जिससे मरीज परेशान हैं। अस्पताल से इलाज कराकर घर लौटने के एक-दो दिन बाद यदि मरीज की तबीयत फिर बिगड़ जाए तो अस्पताल आयुष्मान कार्ड पर दोबारा भर्ती करने से इन्कार कर देते हैं। मरीजों को बताया जाता है कि 15 दिन पूरे होने के बाद ही दोबारा आयुष्मान का लाभ मिलेगा। ऐसे में मजबूर होकर मरीजों को निजी अस्पतालों में पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं या फिर सरकारी अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
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हालांकि, योजना के नियमों की पड़ताल करने पर सामने आया कि आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में ऐसा कोई स्पष्ट नियम नहीं है, जिसमें यह लिखा हो कि डिस्चार्ज के बाद 15 दिन तक मरीज दोबारा भर्ती नहीं हो सकता। योजना के कई पैकेजों में डिस्चार्ज के बाद 15 दिन तक की दवाएं और फॉलोअप उपचार शामिल हैं। एक ही बीमारी के लिए बहुत कम समय में दोबारा भर्ती होने पर क्लेम की जांच या विशेष अनुमति की प्रक्रिया हो सकती है, लेकिन इसे इलाज पर रोक नहीं माना गया है। इसके बावजूद मरीजों का आरोप है कि अस्पताल इसी तकनीकी प्रक्रिया को 15 दिन का नियम बताकर उन्हें वापस भेज देते हैं। इससे सबसे ज्यादा परेशानी गंभीर मरीजों और गरीब परिवारों को उठानी पड़ रही है।
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केस-1 : सांस उखड़ी तो फिर नहीं मिला आयुष्मान का सहारा



कटघर निवासी 76 वर्षीय मुन्नी देवी का फेफड़ों के संक्रमण का इलाज आयुष्मान कार्ड से हुआ। दिल्ली रोड स्थित अस्पताल के आईसीयू से छुट्टी मिलने के दो दिन बाद अचानक सांस लेने में तकलीफ बढ़ गई। परिजन उन्हें दोबारा अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन आयुष्मान कार्ड पर दोबारा भर्ती करने से मना कर दिया गया। कहा गया कि 15 दिन इंतजार करना होगा। मजबूरी में निजी जांच और दवाओं पर हजारों रुपये खर्च करने पड़े।
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केस-2 : ऑपरेशन सफल, लेकिन संक्रमण का खर्च खुद उठाया

बिलारी की एक महिला वीरवती (56) का पित्त की थैली का ऑपरेशन कांठ रोड स्थित एक निजी अस्पताल में आयुष्मान योजना से हुआ। तीन दिन बाद ऑपरेशन वाले स्थान पर संक्रमण हो गया। परिवार का कहना है कि दोबारा भर्ती से पहले आयुष्मान क्लेम में दिक्कत बताई गई। इलाज में देरी न हो, इसलिए पहले निजी खर्च से दवाएं और जांच करानी पड़ीं।

केस-3 : सीने में दर्द उठा, फिर भी नहीं मिला तत्काल लाभ



कांठ क्षेत्र के 56 वर्षीय हृदय रोगी प्रेम पाल सिंह को कांठ रोड स्थित अस्पताल से इलाज के बाद घर भेज दिया गया। अगले ही दिन सीने में तेज दर्द होने पर परिजन उन्हें वापस अस्पताल लाए। उनका कहना है कि अस्पताल प्रबंधन ने कहा कि 15 दिन से पहले इसी केस में दोबारा भर्ती करना संभव नहीं है। मजबूरन परिजनों ने मरीज का उपचार निजी खर्च पर शुरू कराया गया, बाद में आगे की प्रक्रिया पूरी हुई।


अस्पतालों को एक ही बीमारी में दोबारा भर्ती के लिए कुछ तकनीकी प्रक्रियाओं का पालन करना पड़ता है। कई बार नया क्लेम भेजने से पहले चिकित्सकीय कारण और अतिरिक्त स्वीकृति आवश्यक होती है। लेकिन यह व्यवस्था मरीज के इलाज में बाधा नहीं बननी चाहिए। यदि मरीज की हालत गंभीर है तो अस्पताल को स्पेशल केस में अनुमति लेनी चाहिए।



- डॉ. आरके शर्मा, डिप्टी सीएमओ
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