मुरादाबाद में एसएसपी आवास प्रकरण: एसआईटी जांच में सरकारी निकली जमीन, किराया वसूलने वालों पर अब कसेगी नकेल
मुरादाबाद एसएसपी आवास के फर्जी कागज बनाने के मामले में एसआईटी जांच पूरी हो गई है। पता चला है कि यह जमीन सरकारी है। अब किराया वसूलने वालों के खिलाफ जल्द कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
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मुरादाबाद एसएसपी आवास की जमीन के मामले की एसआईटी जांच पूरी हो गई है। जांच में एसएसपी आवास की जमीन सरकारी होने की पुष्टि हुई है। एसआईटी शीघ्र ही अपनी रिपोर्ट मंडलायुक्त को सौंपेगी। एसएसपी आवास की जमीन के फर्जी कागज बनाने और अवैध ढंग से किराया वसूलने का मामला प्रकाश में आया।
इसके बाद मंडलायुक्त ने जांच के लिए अपर आयुक्त सर्वेश गुप्ता के नेतृत्व में एक कमेटी गठित की थी। टीम ने इस मामले में नगर निगम, पुलिस और तहसील के रिकार्डों की छानबीन की। इसमें पुराने कई रिकाॅर्ड गायब मिले। अपर आयुक्त का कहना है कि जांच लगभग पूरी हो गई है।
अभी तक की जांच में स्पष्ट हो गया है कि एसएसपी आवास सरकारी जमीन पर ही बना है। इस मामले में शीघ्र ही मंडलायुक्त को जांच रिपोर्ट सौंपी जाएगी। एसआईटी की जांच रिपोर्ट में जमीन को लेकर अन्य फर्जीवाड़े का भी खुलासा हो सकता है।
पुलिस भी मुकदमे की कर रही जांच
एसएसपी ने इस फर्जीवाड़े के खिलाफ सिविल लाइंस थाने में दो भाइयों के खिलाफ केस दर्ज कराया था। पुलिस की जांच से पता चला कि सौ साल से नगर निगम में एसएसपी आवास की जमीन आईपीएस हाउस के नाम से दर्ज है।
आरोप है कि एसएसपी आवास की जमीन को अपनी बताकर एक व्यक्ति 16 साल तक किराया वसूलता रहा। 2019 में किराया बढ़ाने का मामला कोर्ट पहुंच गया। बाद में एसएसपी हेमराज मीना ने जमीन के रिकाॅर्ड की छानबीन कराई।
खुद को जमीन का मालिक बताने वाले का रिकाॅर्ड जब राजस्व विभाग में नहीं मिला तो एसएसपी ने किराया देना बंद कर दिया। इसके बाद मुकदमा दर्ज कराया गया। इस मुकदमे की विवेचना पुलिस इंस्पेक्टर राजेंद्र सिंह कर रहे हैं।
एसएसपी बंगले पर 1927 से 2003 तक किसी ने अपना मालिकाना हक नहीं जताया था। 2003-04 में एक अधिवक्ता ने इस बंगले को अपना बताते हुए कोर्ट में दावा ठोक दिया। इसके बाद एसएसपी पांच हजार रुपये प्रतिमाह किराये का भुगतान करने लगे थे।