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Moradabad News: लाखों की दवा गटकने के बाद भी चूहे नहीं हुए कम, लाचार हुआ निगम

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 19 Dec 2025 02:09 AM IST
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Even after consuming medicines worth lakhs, the number of rats did not decrease, leaving the corporation helpless.
मुरादाबाद। शहर में सिर्फ आवारा कुत्तों और बंदरों का ही भय नहीं है बल्कि चूहे भी पुराने शहर के लिए सबसे बड़ा खतरा बने हुए हैं। मंडी चौक, असालतपुरा, डेहरिया, चौमुखपुल, गलशहीद, किसरौल, मुफ्ती टोला, कटरा बंशीधर और मुगलपुरा आदि वार्डों में चूहों ने जमीन से लेकर मकानों की नींव तक को खोखला कर दिया है। सीवर लाइनों के रास्ते चूहों ने घरों के नीचे सुरंगें बना ली हैं। कई स्थानों पर दीवारों में छेद कर दिए,जिससे दरवाजे तक खोखले हो चुके हैं।
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पुराने शहर के इन घनी आबादी वाले इलाकों में रात के समय चूहों के कुतरने की आवाजें आम हो चुकी हैं। लोगों को डर है कि उनके घरों की नींव भी यह चूहे सुरंग खोदकर कमजोर कर दे रहे हैं। इन चूहों से परेशान होकर नगर निगम की बोर्ड बैठक में पार्षदों ने कई बार अपनी आवाज भी उठाई है। लगातार शिकायतों के बाद नगर निगम ने चूहों को पकड़ने का जिम्मा केंद्रीय भंडारण निगम को सौंपा था और पायलट प्रोजेक्ट के रूप में वार्ड नंबर-41 असालतपुरा भूड़ में अभियान चलाया। इसमें रसायनिक विधि से करीब एक हजार से अधिक चूहे पकड़े भी गए लेकिन इसके बाद न तो इस पायलट प्रोजेक्ट का लागू किया गया और न ही कोई अन्य वैकल्पिक व्यवस्था की गई। पार्षदों का कहना है कि समस्या जस की तस है।
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वार्ड नंबर 41 के पार्षद मो. परवेज का कहना है कि लखनऊ की टीम ने गलशहीद कब्रिस्तान के अलावा एक अन्य मोहल्ले में अभियान चलाया था। इससे दोनों मोहल्लों में छह महीने तक कोई भी शिकायत नहीं प्राप्त हुई थी। इसका फायदा हुआ था लेकिन पायलट प्रोजेक्ट के बाद ही इसे बंद कर दिया गया। यह अभियान निरंतर हर वार्ड में चलाया जाना चाहिए।
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मंडी चौक के रजत वर्मा ने बताया कि रात में चूहों के कुतरने की आवाज आती है और सुबह सड़क पर मिट्टी बिखरी रहती है। रीता शुभम का कहना है कि चूहों ने घर का काफी सामान बर्बाद कर दिया है, दवाइयां डालने के बावजूद कोई असर नहीं हो रहा है। उन्होंने बच्चों के नए कपड़े एक दराज में रखे थे लेकिन चूहों ने उन्हें पूरी तरह से कुतर दिया। विनोद सक्सेना ने कहा कि लकड़ी का कोई सामान सुरक्षित नहीं है। पूरी रात किचन से बर्तनों के गिरने की आवाजें आती रहती हैं।

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- लखनऊ की टीम ने ऐसे पकड़े थे चूहे
मुरादाबाद। लखनऊ से आई केंद्रीय भंडारण निगम की टीम ने असालतपुरा में पायलट प्रोजेक्ट के तहत करीब एक हजार से अधिक चूहों को पकड़ा था। तीन महीने तक चले इस अभियान के लिए निगम ने करीब डेढ़ लाख रुपये का टेंडर किया था। पायलट प्रोजेक्ट में लखनऊ की टीम ने चूहों के सक्रिय स्थानों पर और उनके बिलों के आसपास आटा, बेसन व केमिकल से तैयार गोली को रखा था। चूहे इसे खाते थे और कुछ ही देर के बाद इनकी मौत हो जाती थी। अगले दिन टीम के सदस्य उन्हीं स्थानों से मरे चूहों को उठाकर मैनाठेर स्थित पशु दाहगृह ले जाते थे। ब्यूरो
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- बोर्ड की बैठक में उठ चुका है मुद्दा
मुरादाबाद। चूहों से होने वाले नुकसान का मुद्दा नगर निगम के पिछली कई बोर्ड बैठकों में लगातार उठ रहा है। नेता विपक्ष अनुभव मेहरोत्रा इसकी अगुआई करते हैं। अनुभव मेहरोत्रा के इस मुद्दे पर अन्य वार्डों के पार्षदों ने उनका समर्थन किया, लेकिन इसके बावजूद इन चूहों पर काबू पाने के लिए कोई ठोस योजना नहीं बन सकी है। ब्यूर
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क्या बोले पार्षद
- मेरे वार्ड के अताई, गणेश, वल्लभ, साहू, पुजारी गली, मंडी बांस समेत गुजराती मोहल्ले में इन चूहों का काफी आतंक हैं। लोग परेशान होकर मुझसे समस्या का निस्तारण कराने का अनुरोध करते हैं। कई बार बोर्ड बैठक में यह मुद्दा उठाया लेकिन कोई भी रास्ता नहीं निकाला गया। यह बड़ी समस्या है इसे मजाक का विषय नहीं समझा जाना चाहिए। - अनुभव मेहरोत्रा, पार्षद, चौमुखपुल
- कोविड के समय से ही सीवर लाइन के रास्ते यह चूहे पुराने शहर में आ गए। पहले इनका अड्डा स्टेशन हुआ करता था। अब पुराने शहर में इनका आतंक है। वार्ड के कई मोहल्लों में हर घर में इन चूहों का आतंक है। पायलट प्रोजेक्ट अगर सफल था तो इसे अन्य वार्डों में भी लागू किया जाना चाहिए था। - मोअज्जम अली, पार्षद, मुगलपुरा
- मेरे वार्ड में पायलट प्रोजेक्ट हुआ। छह महीने तक बड़ी राहत रही। इस अभियान को निरंतर चलाया जाता तो शायद इनपर काबू पाया जा सकता था। अब फिर से चूहों की संख्या बढ़ गई है। उस समय हजार की संख्या में चूहे पकड़े गए थे। - मो. परवेज, पार्षद, असालतपुरा भूड़
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- मंडी चौक के आयुर्वेदिक दवाओं के बड़े विक्रेता प्रियांशु रस्तोगी के गोदाम में चूहों ने अब तक पांच लाख रुपये से अधिक की दवाएं नष्ट कर दी हैं। चूहे पैकेट कुतर देते हैं और दवाइयों की बोतलों को भी खोखला कर देते है। कई स्टॉक पूरी तरह से खराब हो चुके हैं। प्रियांशु का कहना है कि महंगी दवाइयों और रसायनों का भी कोई असर नहीं हो रहा है। इस नुकसान से कैसे बचा जाए कुछ भी समझ नहीं आ रहा है।



- अताई मोहल्ले की सोनम ने बताया कि उन्होंने छह महीने पहले ही नया फ्रिज खरीदा था लेकिन एक सप्ताह के भीतर ही चूहों ने उसके तार कुतर दिए। दरवाजे और लकड़ी का फर्नीचर भी चूहों ने खोखला कर दिया है। चूहों को पकड़ने की तमाम कोशिशें कर ली लेकिन कोई भी सफलता नहीं मिली है। यह समस्या गहरी है और पूरा मोहल्ला इन चूहों के आतंक से जूझ रहा है।




- वल्लभ मोहल्ले के संजय रस्तोगी बताते हैं कि उनकी कार को चूहे कई बार नुकसान पहुंचा चुके हैं। साथ ही घर में हाल ही के दिनों में नए फर्नीचर लगाए थे। चूहे सोफे के अंदर घुस गए हैं। समझ नहीं आ रहा इन्हें कैसे भगाया जाए। पार्षद से शिकायत की तो उन्होंने निगम में फिर से यह मुद्दा उठाने की बात कही है। अगर पायलट प्रोजेक्ट को सफलता मिली है तो इसे अन्य वार्डों में भी किया जाना चाहिए।
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