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एस्टीमेट की रकम बनी पहाड़, लोगों को सरकारी मदद की दरकार
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मुरादाबाद। बिना बिजली के दो साल से परेशानी झेल रहे मैनाठेर के लोगों के लिए एस्टीमेट की धनराशि पहाड़ बनी हुई है। 2.11 लाख रुपये का एस्टीमेट जिलाधिकारी के हस्तक्षेप के बाद तकरीबन 1.30 लाख रुपये तक तो पहुंच गया है। लेकिन संबंधित क्षेत्र में सभी मजदूर वर्ग के लोग हैं, ऐसे में उनके लिए यह रकम जुटाना बड़ी चुनौती हो गया है।
इसके बावजूद उन्होंने मिल बांटकर 70,000 हजार रुपये जमा किए हैं। लोगों का कहना है कि कई वर्षों से पेट काटकर जमा किए रुपये देने के बाद इतनी धनराशि इकट्ठी हुई। इससे ज्यादा रुपये जमा करना हमारे लिए असंभव है। अब समस्या के सामाधान के लिए सरकारी मदद की दरकार है। लोगों ने मेयर विनोद अग्रवाल से गुहार लगाने का निर्णय लिया है। ज्ञात हो कि थाना मझोला क्षेत्र में राजकीय कन्या इंटर कॉलेज से आगे ग्राम ढक्का के पास मैनाठेर में अलग अलग जगहों से आकर 14 परिवार बसे हैं। दो साल से ये परिवार बिजली आपूर्ति की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन कहीं भी इनकी सुनवाई नहीं हो पाई है। विद्युत निगम ने लाइन बिछाने और खंभे लगाने के लिए सर्वे के बाद इन्हें 2,11,008 रुपये का एस्टीमेट थमा दिया। इतनी रकम जुटाने में अक्षम लोगों ने शनिवार को जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन किया था। इसके बाद जिलाधिकारी ने उन्हें विद्युत निगम के एक्सईएन शैलेंद्र गौतम के पास भेजा। डीएम के हस्तक्षेप से एस्टीमेट की धनराशि पुनर्निर्धारित होकर 1,30,000 हजार तक पहुंच गई है। सब्जी बेचकर, ठेला चलाकर और मजदूरी कर जीवन यापन करने वाले इन परिवारों ने का कहना है कि इतनी बड़ी रकम वह जमा नहीं कर पाएंगे। उन्होंने मिल बांटकर जमा किए 70 हजार रुपये में बिजली कनेक्शन देने या महापौर की ओर से सरकारी सहायता मिलने की मांग की है।
लोगों के वर्जन (फोटो)
घर में बच्चे बीमार हैं। दिन भर मजदूरी करने के बाद 500 रुपये मिलते हैं। इनमें से 250 रुपये बच्चों की दवा में खर्च हो जाते हैं। महीने भर के राशन, शाक-सब्जी, बच्चों के दूध के लिए भी संघर्ष करना पड़ता है। लोगों से रुपये उधार लेने पड़ते हैं। एस्टीमेट की रकम कैसे जमा करें।
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- नंद किशोर
कर्ज लेकर, किसी तरह रुपये जमा करके मकान बनाया था। अब पिछले दो साल से बिजली कनेक्शन के लिए भटक रहे हैं। जो थोड़े बहुत रुपये थे वो एस्टीमेट की धनराशि जमा करने के लिए दे दिए। रोजमर्रा का खर्च कैसे होगा, यह भी नहीं पता।
- निर्मला
विद्युत निगम ने एस्टीमेट कम किया है लेकिन, यह रकम हम सब मिलकर भी जमा नहीं कर पा रहे हैं। सभी 14 परिवारों ने मिलकर 70 हजार रुपये जमा किए हैं। इन रुपयों में कनेक्शन नहीं मिल रहा है। हम सबने महापौर से गुहार लगाने का निर्णय लिया है।
- ललित कुमार
सरकारी मददद मिले तो हम लोगों के घरों में भी उजाला आएगा। पूरे शहर में सब जगह विद्युत आपूर्ति है। हमारे घरों में ही अंधेरा रहता है। महापौर से उम्मीद है, वह हमारी मदद कर सकते हैं।
- अर्जुन सिंह
महापौर का वर्जन (फोटो)
मैनाठेर के लोगों की समस्या मेरे संज्ञान में आई है। स्थानीय लोग मेरे कार्यालय में आकर मिलें और अपना प्रार्थना पत्र दें। हम लोगों के घरों तक बिजली पहुंचाने के लिए हरसंभव मदद करेंगे।
- विनोद अग्रवाल, महापौर
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इसके बावजूद उन्होंने मिल बांटकर 70,000 हजार रुपये जमा किए हैं। लोगों का कहना है कि कई वर्षों से पेट काटकर जमा किए रुपये देने के बाद इतनी धनराशि इकट्ठी हुई। इससे ज्यादा रुपये जमा करना हमारे लिए असंभव है। अब समस्या के सामाधान के लिए सरकारी मदद की दरकार है। लोगों ने मेयर विनोद अग्रवाल से गुहार लगाने का निर्णय लिया है। ज्ञात हो कि थाना मझोला क्षेत्र में राजकीय कन्या इंटर कॉलेज से आगे ग्राम ढक्का के पास मैनाठेर में अलग अलग जगहों से आकर 14 परिवार बसे हैं। दो साल से ये परिवार बिजली आपूर्ति की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन कहीं भी इनकी सुनवाई नहीं हो पाई है। विद्युत निगम ने लाइन बिछाने और खंभे लगाने के लिए सर्वे के बाद इन्हें 2,11,008 रुपये का एस्टीमेट थमा दिया। इतनी रकम जुटाने में अक्षम लोगों ने शनिवार को जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन किया था। इसके बाद जिलाधिकारी ने उन्हें विद्युत निगम के एक्सईएन शैलेंद्र गौतम के पास भेजा। डीएम के हस्तक्षेप से एस्टीमेट की धनराशि पुनर्निर्धारित होकर 1,30,000 हजार तक पहुंच गई है। सब्जी बेचकर, ठेला चलाकर और मजदूरी कर जीवन यापन करने वाले इन परिवारों ने का कहना है कि इतनी बड़ी रकम वह जमा नहीं कर पाएंगे। उन्होंने मिल बांटकर जमा किए 70 हजार रुपये में बिजली कनेक्शन देने या महापौर की ओर से सरकारी सहायता मिलने की मांग की है।
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लोगों के वर्जन (फोटो)
घर में बच्चे बीमार हैं। दिन भर मजदूरी करने के बाद 500 रुपये मिलते हैं। इनमें से 250 रुपये बच्चों की दवा में खर्च हो जाते हैं। महीने भर के राशन, शाक-सब्जी, बच्चों के दूध के लिए भी संघर्ष करना पड़ता है। लोगों से रुपये उधार लेने पड़ते हैं। एस्टीमेट की रकम कैसे जमा करें।
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- नंद किशोर
कर्ज लेकर, किसी तरह रुपये जमा करके मकान बनाया था। अब पिछले दो साल से बिजली कनेक्शन के लिए भटक रहे हैं। जो थोड़े बहुत रुपये थे वो एस्टीमेट की धनराशि जमा करने के लिए दे दिए। रोजमर्रा का खर्च कैसे होगा, यह भी नहीं पता।
- निर्मला
विद्युत निगम ने एस्टीमेट कम किया है लेकिन, यह रकम हम सब मिलकर भी जमा नहीं कर पा रहे हैं। सभी 14 परिवारों ने मिलकर 70 हजार रुपये जमा किए हैं। इन रुपयों में कनेक्शन नहीं मिल रहा है। हम सबने महापौर से गुहार लगाने का निर्णय लिया है।
- ललित कुमार
सरकारी मददद मिले तो हम लोगों के घरों में भी उजाला आएगा। पूरे शहर में सब जगह विद्युत आपूर्ति है। हमारे घरों में ही अंधेरा रहता है। महापौर से उम्मीद है, वह हमारी मदद कर सकते हैं।
- अर्जुन सिंह
महापौर का वर्जन (फोटो)
मैनाठेर के लोगों की समस्या मेरे संज्ञान में आई है। स्थानीय लोग मेरे कार्यालय में आकर मिलें और अपना प्रार्थना पत्र दें। हम लोगों के घरों तक बिजली पहुंचाने के लिए हरसंभव मदद करेंगे।
- विनोद अग्रवाल, महापौर