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Moradabad News: कुड़का नदी पर अतिक्रमण बड़ी समस्या, उफनाने पर बाढ़ मचाती है तबाही
Wed, 29 Jul 2026 02:15 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मुरादाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, मुरादाबाद
Updated Wed, 29 Jul 2026 02:15 AM IST
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ठाकुरद्वारा। नगर के नंगलिया रोड मोहल्ला ताली वार्ड आठ और पांच के क्षेत्र को वीआईपी कॉलोनी क्षेत्र के नाम से भी जाना जाता है लेकिन क्षेत्र में रहने वाली करीब एक लाख की आबादी के लिए कुड़का नदी एक बड़ी समस्या बनी हुई है। इस क्षेत्र में कई कोचिंग सेंटर भी हैं। इनमें पढ़ने वाले हजारों छात्रों को भी नदी से परेशानी होती है। नदी पहले इस क्षेत्र में सुचारू बहती थी लेकिन नदी के आसपास आबादी बसने के बाद इसके किनारों पर पक्का निर्माण कर लिया गया है और नदी नाले के रूप में परिवर्तित हो गई है।
नदी को रतूपुरा चौराहे के पास अतिक्रमण कर इसके बहाव को पूरी तरह रोक दिया गया है। बारिश के महीने में यह नदी विकराल रूप धारण कर लेती है नदी में अधिक बारिश होने पर बाढ़ आ जाती है और उसका पानी घरों के अंदर और सड़कों पर तीन से चार फीट तक भर जाता है। हर वर्ष यहां के नागरिकों को लाखों का आर्थिक नुकसान होता है और अनेक समस्याएं भी होती है। इस क्षेत्र के नागरिक 2015 से नदी पर किए गए अवैध निर्माण को हटाने, उसे खुदाई कर घर करने और उसकी साफ-सफाई की मांग कर रहे हैं लेकिन इनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। मई से जून 2026 तक क्षेत्र के नागरिक तीन बार डीएम, एसडीएम को ज्ञापन दे चुके हैं। उनके आदेश पर नगर पालिका कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रही है। एसडीएम जितेंद्र सिंह वीर बाल के आदेश पर नगर पालिका ने कमालपुरी मार्ग पर कुड़का नदी के पुल पर सफाई के नाम पर खानापूर्ति की। जबकि अंदर नदी की विशेष साफ-सफाई और अतिक्रमण हटाने की जरूरत नहीं समझी है। लगातार समस्या के निराकरण के लिए संघर्ष कर रहे हैं नागरिक अब एक अगस्त को संपूर्ण समाधान दिवस में समस्या को फिर उठाएंगे। दो दिन पहले नदी की सफाई के लिए जेसीबी लेकर पहुंचे नगर पालिका के कर्मचारियों को नागरिकों ने अपना विरोध दर्ज कर वापस लौटा दिया।
यहां के निवासी जलालुद्दीन ने बताया कि वह 2015 से नदी से हर वर्ष होने वाले नुकसान को रोकने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं लेकिन शिकायत के बाद भी नगर पालिका और प्रशासन पर कोई असर नहीं है। शिकायत होने पर सिर्फ खानापूर्ति कर मामला रफा-दफा कर दिया जाता है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष यहां के नागरिक तीन बार नदी की समस्या को समाधान दिवस, मुख्यमंत्री पोर्टल पर उठा चुके हैं। कोई समाधान नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि रविवार को नगर पालिका के कुछ कर्मचारी जेसीबी लेकर नदी की सफाई की खानापूर्ति करने आए थे इस पर लोगों ने वहां से जेसीबी को लौटा दिया। कहा से अब बारिश का मौसम शुरू हो गया है इस समय साफ सफाई कर खानापूर्ति न करें।
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इस क्षेत्र के निवासी कोचिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष अमित कुमार ने बताया कि कुड़का नदी का बहाव अतिक्रमण के कारण बाधित है। उन्होंने बताया कि नगर पालिका को साफ सफाई से पहले काशीराम कॉलोनी जाने वाली सड़क की पुलिया पर एक दीवार (बांध) का निर्माण करना चाहिए ताकि पीछे से आने वाला पानी घरों के अंदर न घुसे।
श्वेता सक्सेना ने बताया कि नदी में बाढ़ आने पर घरों के अंदर पानी घुस जाता है हजारों का नुकसान होता है परिवार के लोग बेघर हो जाते हैं और घरों की छत के ऊपर रहने को मजबूर होते हैं वहीं पर खाना बनाया जाता है। घरों के अंदर पानी के साथ सांप भी आ जाते हैं।
गीता देवी ने बताया है नदी में बाढ़ आने से सड़क पर खड़ी गाड़ियां पानी में डूब जाती है। कोचिंग सेंटरों पर पढ़ने वाले बच्चों की पढ़ाई बाधित हो जाती है। तीन से चार फीट तक पानी सड़कों पर भर जाता है। इस बड़ी समस्या की ओर नगर पालिका और प्रशासन कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष मोहम्मद इरफान सैफी का कहना है कि नदी की सफाई करना नगर पालिका परिषद का काम नहीं है। फिर भी उन्होंने अधिकारियों के आदेश पर कुड़का नदी की सफाई करने का निर्णय लिया था उनका कहना है कि एडीएम प्रशासन ने भी यहां आकर नदी का निरीक्षण किया। अध्यक्ष के अनुसार एडीएम ने बिना डीएम की अनुमति के नदी पर कोई भी कार्य करने से मना कर दिया है।
फोटो 10 से 15
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नदी को रतूपुरा चौराहे के पास अतिक्रमण कर इसके बहाव को पूरी तरह रोक दिया गया है। बारिश के महीने में यह नदी विकराल रूप धारण कर लेती है नदी में अधिक बारिश होने पर बाढ़ आ जाती है और उसका पानी घरों के अंदर और सड़कों पर तीन से चार फीट तक भर जाता है। हर वर्ष यहां के नागरिकों को लाखों का आर्थिक नुकसान होता है और अनेक समस्याएं भी होती है। इस क्षेत्र के नागरिक 2015 से नदी पर किए गए अवैध निर्माण को हटाने, उसे खुदाई कर घर करने और उसकी साफ-सफाई की मांग कर रहे हैं लेकिन इनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। मई से जून 2026 तक क्षेत्र के नागरिक तीन बार डीएम, एसडीएम को ज्ञापन दे चुके हैं। उनके आदेश पर नगर पालिका कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रही है। एसडीएम जितेंद्र सिंह वीर बाल के आदेश पर नगर पालिका ने कमालपुरी मार्ग पर कुड़का नदी के पुल पर सफाई के नाम पर खानापूर्ति की। जबकि अंदर नदी की विशेष साफ-सफाई और अतिक्रमण हटाने की जरूरत नहीं समझी है। लगातार समस्या के निराकरण के लिए संघर्ष कर रहे हैं नागरिक अब एक अगस्त को संपूर्ण समाधान दिवस में समस्या को फिर उठाएंगे। दो दिन पहले नदी की सफाई के लिए जेसीबी लेकर पहुंचे नगर पालिका के कर्मचारियों को नागरिकों ने अपना विरोध दर्ज कर वापस लौटा दिया।
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यहां के निवासी जलालुद्दीन ने बताया कि वह 2015 से नदी से हर वर्ष होने वाले नुकसान को रोकने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं लेकिन शिकायत के बाद भी नगर पालिका और प्रशासन पर कोई असर नहीं है। शिकायत होने पर सिर्फ खानापूर्ति कर मामला रफा-दफा कर दिया जाता है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष यहां के नागरिक तीन बार नदी की समस्या को समाधान दिवस, मुख्यमंत्री पोर्टल पर उठा चुके हैं। कोई समाधान नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि रविवार को नगर पालिका के कुछ कर्मचारी जेसीबी लेकर नदी की सफाई की खानापूर्ति करने आए थे इस पर लोगों ने वहां से जेसीबी को लौटा दिया। कहा से अब बारिश का मौसम शुरू हो गया है इस समय साफ सफाई कर खानापूर्ति न करें।
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इस क्षेत्र के निवासी कोचिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष अमित कुमार ने बताया कि कुड़का नदी का बहाव अतिक्रमण के कारण बाधित है। उन्होंने बताया कि नगर पालिका को साफ सफाई से पहले काशीराम कॉलोनी जाने वाली सड़क की पुलिया पर एक दीवार (बांध) का निर्माण करना चाहिए ताकि पीछे से आने वाला पानी घरों के अंदर न घुसे।
श्वेता सक्सेना ने बताया कि नदी में बाढ़ आने पर घरों के अंदर पानी घुस जाता है हजारों का नुकसान होता है परिवार के लोग बेघर हो जाते हैं और घरों की छत के ऊपर रहने को मजबूर होते हैं वहीं पर खाना बनाया जाता है। घरों के अंदर पानी के साथ सांप भी आ जाते हैं।
गीता देवी ने बताया है नदी में बाढ़ आने से सड़क पर खड़ी गाड़ियां पानी में डूब जाती है। कोचिंग सेंटरों पर पढ़ने वाले बच्चों की पढ़ाई बाधित हो जाती है। तीन से चार फीट तक पानी सड़कों पर भर जाता है। इस बड़ी समस्या की ओर नगर पालिका और प्रशासन कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष मोहम्मद इरफान सैफी का कहना है कि नदी की सफाई करना नगर पालिका परिषद का काम नहीं है। फिर भी उन्होंने अधिकारियों के आदेश पर कुड़का नदी की सफाई करने का निर्णय लिया था उनका कहना है कि एडीएम प्रशासन ने भी यहां आकर नदी का निरीक्षण किया। अध्यक्ष के अनुसार एडीएम ने बिना डीएम की अनुमति के नदी पर कोई भी कार्य करने से मना कर दिया है।
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