{"_id":"67391a52fd45ba464c00fcd4","slug":"electrical-equipment-was-examined-in-the-womens-hospital-moradabad-news-c-15-1-mbd1005-523676-2024-11-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Moradabad News: महिला अस्पताल में की गई इलेक्टि्रक उपकरणों की जांच","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Moradabad News: महिला अस्पताल में की गई इलेक्टि्रक उपकरणों की जांच
विज्ञापन
मुरादाबाद। झांसी मेडिकल काॅलेज में हुए अग्निकांड के बाद शनिवार को महिला जिला अस्पताल का प्रशासन भी हरकत में आ गया। शनिवार सुबह ही इलेक्ट्रीशियन बुलाकर सभी इलेक्टि्रक प्वाइंट की जांच करवाई गई। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ने बताया कि लगातार उपकरण चलने से आग लगने का खतरा रहता है। जांच में सभी व्यवस्थाएं ठीक मिलीं।
जिला महिला अस्पताल में शनिवार को करीब 52 महिला मरीज और 40 बच्चे भर्ती थे। इनमें से 13 बच्चे एसएनसीयू में भर्ती थे। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ने बताया कि बच्चों के उपचार के लिए लगातार बाडी वार्मर, हीटर, वेंटीलेटर, एसी को संचालित किया जाता है। हर वक्त उपकरणों के चलने की वजह से कई बार लोड बढ़ जाता है। ऐसे में आग लगने की संभावना रहती है। उन्होंने बताया कि बच्चे के एक बेड के पास लगे स्विच में ऑक्सीजन, वॉर्मर आदि के लगभग आठ प्वाइंट होते हैं। यदि एक प्वाइंट पर भी लोड बढ़ा तो शॉर्ट सर्किट का डर रहता है। इसलिए शनिवार को इलेक्ट्रीशियन बुलाकर सभी प्वाइंट की जांच की गई।
-- -- -- -- -- -
70 सिलिंडर, 80 हजार लीटर पानी
एमसीएच विंग की एनओसी अप्रैल 2024 तक के लिए थी। जिला महिला अस्पताल के साथ अभी इसका भी नवीनीकरण होना है। सीएमएस का कहना है कि आग से बचाव के लिए अस्पताल में 70 सिलिंडर और दो टैंक में 40-40 हजार लीटर पानी की उपलब्धता है। शनिवार को सिलिंडर में गैस के प्रेशर की भी जांच की गई।
विज्ञापन
-- -- -- -- -
एसएनसीयू सहित बिल्डिंग के अन्य हिस्सों में भी स्प्रिंकलर लगवाए गए हैं। तकनीकी समस्या की वजह से एनओसी नहीं मिल पा रही है। सभी इलेक्टि्रक प्वाइंट, सिलिंडर आदि की व्यवस्था परखी गई, जो ठीक मिली। इसके अलावा दो इमरजेंसी गेट भी हैं। एक गेट मैदान की तरफ खुलता है।
डॉ. निर्मला पाठक, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला महिला अस्पताल
विज्ञापन
जिला महिला अस्पताल में शनिवार को करीब 52 महिला मरीज और 40 बच्चे भर्ती थे। इनमें से 13 बच्चे एसएनसीयू में भर्ती थे। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ने बताया कि बच्चों के उपचार के लिए लगातार बाडी वार्मर, हीटर, वेंटीलेटर, एसी को संचालित किया जाता है। हर वक्त उपकरणों के चलने की वजह से कई बार लोड बढ़ जाता है। ऐसे में आग लगने की संभावना रहती है। उन्होंने बताया कि बच्चे के एक बेड के पास लगे स्विच में ऑक्सीजन, वॉर्मर आदि के लगभग आठ प्वाइंट होते हैं। यदि एक प्वाइंट पर भी लोड बढ़ा तो शॉर्ट सर्किट का डर रहता है। इसलिए शनिवार को इलेक्ट्रीशियन बुलाकर सभी प्वाइंट की जांच की गई।
विज्ञापन
70 सिलिंडर, 80 हजार लीटर पानी
एमसीएच विंग की एनओसी अप्रैल 2024 तक के लिए थी। जिला महिला अस्पताल के साथ अभी इसका भी नवीनीकरण होना है। सीएमएस का कहना है कि आग से बचाव के लिए अस्पताल में 70 सिलिंडर और दो टैंक में 40-40 हजार लीटर पानी की उपलब्धता है। शनिवार को सिलिंडर में गैस के प्रेशर की भी जांच की गई।
विज्ञापन
एसएनसीयू सहित बिल्डिंग के अन्य हिस्सों में भी स्प्रिंकलर लगवाए गए हैं। तकनीकी समस्या की वजह से एनओसी नहीं मिल पा रही है। सभी इलेक्टि्रक प्वाइंट, सिलिंडर आदि की व्यवस्था परखी गई, जो ठीक मिली। इसके अलावा दो इमरजेंसी गेट भी हैं। एक गेट मैदान की तरफ खुलता है।
डॉ. निर्मला पाठक, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला महिला अस्पताल