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Moradabad News: आधी रोटी खाएं लेकिन बच्चों को जरूर पढ़ाएंः महमूद अशरफ

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 21 Nov 2025 01:52 AM IST
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Eat half the bread but definitely teach it to children: Mahmood Ashraf
मुरादाबाद। शिक्षा किसी भी समाज की रीढ़ होती है। आधी रोटी खाएं लेकिन बच्चों को जरूर पढ़ाएं। क्योंकि शिक्षा रोशनी देता है, सोच बदलता है और सही-गलत की पहचान कराता है। यह बातें बृहस्पतिवार को दीवान का बाजार स्थित एक बैंक्वेट हॉल में आयोजित जश्ने मखदूम अशरफ एवं इस्लाहे मुआशरा कार्यक्रम में सज्जादानशीन सैयद महमूद अशरफ अशरफी ने अपनी तकरीर के दौरान कही।
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किछौछा शरीफ खानकाहे हसनिया सरकार-ए-कला के सज्जादाननशीन महमूद अशरफी ने अपनी तकरीर में आगे समाज सुधार और अच्छे चरित्र के बारे में भी विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि एक बेहतर समाज वही बनता है जहां पड़ोसी, परिवार और समुदाय के बीच मोहब्बत व आदर का रिश्ता हो। उन्होंने लोगों से घरों का माहौल दीनी बनाने और बच्चों को दोनों तरह की तालीम धार्मिक व आधुनिक दिलाने की अपील की।
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उन्होंने कहा कि शिक्षा इंसान की सोच बदल देता है और उसे सही रास्ता चुनने की क्षमता देता है। भले ही आधी रोटी खानी पड़े लेकिन बच्चों की पढ़ाई पर कभी समझौता मत करो। उन्होंने यह बात दोहराते हुए कहा कि तालीम ही आने वाली पीढ़ियों को मजबूती देगी।
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सज्जादानशीन ने नमाज की अहमियत पर बोलते हुए कहा कि नमाज इंसान को बुरे रास्तों से बचाती है और उसके चरित्र में नर्मी, ईमानदारी और अनुशासन पैदा करती है। उन्होंने बताया कि अगर घरों में कुरान की तिलावत, अच्छी बातें और सकारात्मक माहौल होगा तो बच्चे खुद-ब-खुद सही दिशा में आगे बढ़ेंगे।


इससे पहले कार्यक्रम की शुरुआत कारी अब्दुल्ला नईमी की तिलावत से हुई। इसके बाद नातख्वान इरफान अशरफी और असद अशरफी ने अपने कलाम से माहौल को रूहानी रंग में रंग दिया। जलसे में अमन, सौहार्द और इंसानी भलाई को लेकर कई उलेमा ने भी अपने विचार रखे। उलेमा ने कहा कि मुसलमान की पहचान उसके अच्छे व्यवहार, नर्मी और इंसाफ से होती है इसलिए हर हाल में अखलाक को प्राथमिकता देनी चाहिए। समाज में बढ़ रही दूरियों और गलतफहमियों को मिटाने के लिए सबको मिलकर काम करना होगा। जलसे में मदरसा जामिया नईमिया के प्रधानाचार्य मुफ्ती अय्यूब खां नईमी, मुफ्ती सुलेमान नईमी, बाकर अली नईमी, सज्जादानशीन सूफी सिब्ते नबी, मौलाना तंजीम अशरफी समेत कई लोग मौजूद रहे।
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