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अलविदा ट्रैजेडी किंग:... जब मुशायरे में आए सलीम ने संभल को दिया मोहब्बत का पैगाम, भा गया था यहां के कबाब का स्वाद
Thu, 08 Jul 2021 01:41 PM IST
प्राची प्रियम
अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
Published by: प्राची प्रियम
Updated Thu, 08 Jul 2021 01:41 PM IST
सार
मुशायरे में दिलीप कुमार ने एक गजल पढ़ी थी जबकि ओमप्रकाश और जानी वॉकर ने लोगों को खूब हंसाया था। 1978 का मुशायरा इंडो-पाक मुशायरा था, मुशायरा दो हिस्सों में हुआ था। दिन के मुशायरे में दिलीप कुमार शामिल हुए थे।
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मुशायरे में आए दिलीप कुमार
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
फिल्म अभिनेता दिलीप कुमार का संभल से गहरा नाता रहा है। वो यहां दो बार आए थे। पहली बार 1973 में और दूसरी बार 1978 में। दोनों बार नखासा में मुशायरे हुए जिसमें उन्होंने शिरकत की। पहली बार के हशमत बिल्डिंग में आयोजित मुशायरे की सदारत की थी।
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सुभाष चंद्र बोस के करीबी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी जनरल शाहनवाज उनके साथ ही आए थे। जनरल शाहनवाज चीफ गेस्ट थे। दूसरी बार हशमत बिल्डिंग के सामने खाली मैदान में 1978 में मुशायरा हुआ था। उनके साथ हास्य अभिनेता ओमप्रकाश और जॉनी वाकर भी आए थे। नेशनल लाइब्रेरी दीपा सराय ने मुशायरे कराए थे।
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मुशायरे में दिलीप कुमार ने एक गजल पढ़ी थी जबकि ओमप्रकाश और जानी वॉकर ने लोगों को खूब हंसाया था। 1978 का मुशायरा इंडो-पाक मुशायरा था, मुशायरा दो हिस्सों में हुआ था। दिन के मुशायरे में दिलीप कुमार शामिल हुए। रात्रि में फिर मुशायरा हुआ जिसमें तमाम शायरों ने कलाम पेश किए। मुशायरे में दोनों मुल्कों के संबंधों को लेकर चर्चा हुई और दिलीप कुमार ने मोहब्बत का पैगाम दिया था।
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संभल के बच्चों की तालीम की चिंता भी जताई थी दिलीप कुमार ने
तालीम के मामले में संभल इतना पिछड़ा हुआ क्यों हैं। इस बात की चिंता दिलीप कुमार को थी। 1973 और 1978 में दिलीप कुमार जब यहां आए तो उन्होंने संभल के चुनिंदा लोगों से कहा था कि अगर वे तालीम के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए कोई कदम उठाते हैं तो उसमें सहयोग मिलेगा।
इसके बाद जब नेशनल लाइब्रेरी दीपासराय से जुड़े लोगों ने फंड जुटाया और एमआईएम नर्सरी स्कूल की स्थापना की। इस स्कूल की फंडिंग के लिए ही 1978 में वहं दोबारा आए थे। जबकि इस स्कूल की स्थापना पहले मुशायरे में हो गई। यह बात दीगर है कि यह स्कूल अब संचालित नहीं है। संवाद
दिलीप कुमार को भा गए थे संभल के कबाब
संभल में बनने वाले कबाब फिल्म अभिनेता दिलीप कुमार को इतना भाए थे कि मुंबई जाकर भी वह उनका स्वाद नहीं भूले। जब कोई संभल से उनसे मिलता था तो वे संभल के कबाब का जिक्र करना नहीं भूलते थे।
उन्होंने रूबी रिसाले में संभल की यादों को लिखा तो उसमें कबाब का भी जिक्र किया था। उन्हें जानने वाले लोग बताते हैं कि दोनों बार के मुशायरों में दिलीप कुमार ने संभल के कबाब को बड़े चाव से खाया था।