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Moradabad News: श्रीमद्भागवत कथा में श्री कृष्ण के जन्म और कंस वध का प्रसंग सुनकर झूमे भक्त
Sat, 11 Oct 2025 02:28 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मुरादाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, मुरादाबाद
Updated Sat, 11 Oct 2025 02:28 AM IST
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ठाकुरद्वारा। गांव गोपीवाला में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में शुक्रवार को कथा व्यास ने भगवान श्री कृष्ण के जन्म और कंस वध की के प्रसंग का मनमोहक वर्णन किया।
उन्होंने बताया कि बुराई का अंत निश्चित है। जिसे सुनकर पंडाल में भगवान श्री कृष्ण के जयकारे गूंजते रहे। वृंदावन से आए पंडित नरेश कुमार पाठक ने पूजा अर्चना के बाद भागवत कथा प्रस्तुत की। कथा व्यास ने कहा कि मथुरा में कंस के अत्याचार से जनता दुखी थी। उसने अपनी बहन देवकी और बहनोई वासुदेव को उनकी आठवीं संतान के डर से दोनों को कारागार में डाल दिया था। कारागार में ही देवकी ने बच्चों को जन्म दिया। सात बच्चों का हंसने कंस ने निर्दयता से मार दिया था। आकाशवाणी के अनुसार भगवान श्री विष्णु ने देवकी के आठवें बच्चे के रूप जन्म लिया। उनका नाम श्री कृष्ण पड़ा। वासुदेव भगवान के निर्देश अनुसार श्री कृष्ण को गोकुल में नंद बाबा और यशोदा के यहां छोड़ आये। कंस ने उन्हें मरवाने का काफी प्रयास किया लेकिन असफल हो जाने पर उसने उन्हें साजिश के अंतर्गत मथुरा बुलाया। वहां पर भी कंस ने श्री कृष्ण बलराम को मरवाने के कई प्रयास किए लेकिन असफल हो गया अंत में श्री कृष्ण ने कंस के दरबार में पहुंचकर उसके पहलवानों को चित्त करने के बाद कंस का वध कर दिया। कथा व्यास ने बताया कि बुराई के रास्ते पर चलने वाले का अंत एक दिन निश्चित है। इसलिए हमें अच्छे कार्य करने चाहिए और सत्य के मार्ग पर चलना चाहिए। कंस का वध होते ही पंडाल में श्री कृष्ण के जयकारे गूंजने लगते हैं। कार्यक्रम में पंडित अनिल कुमार शर्मा, खूब सिंह,उपदेश सिंह, भू प्रकाश सिंह, बबीता धर्मेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।
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उन्होंने बताया कि बुराई का अंत निश्चित है। जिसे सुनकर पंडाल में भगवान श्री कृष्ण के जयकारे गूंजते रहे। वृंदावन से आए पंडित नरेश कुमार पाठक ने पूजा अर्चना के बाद भागवत कथा प्रस्तुत की। कथा व्यास ने कहा कि मथुरा में कंस के अत्याचार से जनता दुखी थी। उसने अपनी बहन देवकी और बहनोई वासुदेव को उनकी आठवीं संतान के डर से दोनों को कारागार में डाल दिया था। कारागार में ही देवकी ने बच्चों को जन्म दिया। सात बच्चों का हंसने कंस ने निर्दयता से मार दिया था। आकाशवाणी के अनुसार भगवान श्री विष्णु ने देवकी के आठवें बच्चे के रूप जन्म लिया। उनका नाम श्री कृष्ण पड़ा। वासुदेव भगवान के निर्देश अनुसार श्री कृष्ण को गोकुल में नंद बाबा और यशोदा के यहां छोड़ आये। कंस ने उन्हें मरवाने का काफी प्रयास किया लेकिन असफल हो जाने पर उसने उन्हें साजिश के अंतर्गत मथुरा बुलाया। वहां पर भी कंस ने श्री कृष्ण बलराम को मरवाने के कई प्रयास किए लेकिन असफल हो गया अंत में श्री कृष्ण ने कंस के दरबार में पहुंचकर उसके पहलवानों को चित्त करने के बाद कंस का वध कर दिया। कथा व्यास ने बताया कि बुराई के रास्ते पर चलने वाले का अंत एक दिन निश्चित है। इसलिए हमें अच्छे कार्य करने चाहिए और सत्य के मार्ग पर चलना चाहिए। कंस का वध होते ही पंडाल में श्री कृष्ण के जयकारे गूंजने लगते हैं। कार्यक्रम में पंडित अनिल कुमार शर्मा, खूब सिंह,उपदेश सिंह, भू प्रकाश सिंह, बबीता धर्मेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।
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