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शहर की हवा सुधारने के लिए समर्पित किए जीवन के 10 साल
Tue, 28 Feb 2023 05:38 PM IST
ranjeett ranjeett
अमर उजाला ब्यूरो मुरादाबाद
अमर उजाला ब्यूरो मुरादाबाद
Published by: ranjeett ranjeett
Updated Tue, 28 Feb 2023 05:38 PM IST
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मुरादाबाद
- फोटो : अमर उजाला
मुरादाबाद। बुद्धि विहार निवासी डॉ. अतुल चौहान ने शहर की हवा सुधारने के लिए अपने जीवन का एक दशक समर्पित कर दिया है। आगे भी इस कार्य को जारी रखने के लिए वह लगे हुए हैं। शहर में वायु प्रदूषण व एक्यूआई कम करने के लिए डॉ. अतुल भारत सरकार के एयर एक्शन प्लान पर काम कर रहे हैं।
वर्ष 2013 में वह हिंदू कॉलेज से प्रो. डॉ. अनामिका त्रिपाठी के मार्गदर्शन में पीएचडी कर रहे थे। उस दौरान उनके शोध का विषय परिवेशीय वायु में उपस्थित धातु के कणों से होने वाली बीमारियां रहीं। इस शोध के लिए उन्होंने जब शहर की वायु गुणवत्ता को परखा तो उसमें धातु के सूक्ष्म कण मिले। इसके बाद अलग अलग मोहल्लों में जाकर देखा। तब पता चला कि शहर में कई स्थानों पर पीतल भट्ठियां व ई-कचरा जलने से वायु में यह कण पाए जा रहे हैं। इससे लोगों को आंखों का इंफेक्शन, टीबी व कैंसर जैसी बीमारियां हो रही थीं।
इस पर उन्होंने नेशनल एयर मॉनिटरिंग प्रोग्राम से जुड़कर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को जानकारी देनी शुरू की। बोर्ड ने विभिन्न विभागों के साथ सिटी एक्शन प्लान तैयार किया। इसके तहत शहर में वायु प्रदूषण कम करने के लिए कई प्रयास किए गए।
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ई-कचरे का दोहन कम करने के लिए कानून बनाया गया। कई धाराएं बढ़ाई गईं। पीतल का काम करने वाले लोगों को पर्यावरण फ्रेंडली भट्ठियां वितरित की गईं। कुछ वर्षों में बेहतर परिणाम देखने को मिले।
परिस्थितियां गंभीर थीं, इसलिए उन्होंने पीएचडी पूर्ण होने के बाद भी यह कार्य जारी रखने की इच्छा जताई। इसमें डॉ. अनामिका त्रिपाठी ने उनका सहयोग किया। अब डॉ. अतुल भारत सरकार के एयर एक्शन प्लान पर काम कर रहे हैं। इसमें उद्योगों को गैस बेस्ड बनाने पर काम किया जा रहा है। फिलहाल कई उद्योगों में दहन के लिए लकड़ी व अन्य ईंधनों का प्रयोग किया जाता है। उस प्लान के तहत उद्योगों को पीएनजी से जोड़ा जाएगा।
नेसा ने किया सम्मानित
डॉ. अतुल को उनके कार्यों के लिए राष्ट्रीय पर्यावरण एवं विज्ञान अकादमी की ओर से जूनियर रीसर्च साइंटिस्ट अवार्ड 2019 में मिला। इसके अलावा राष्ट्रीय स्तर की कई पत्रिकाओं में उनके शोध प्रकाशित हुए हैं। डॉ. अतुल का कहना है कि ऑटोमोबाइल, उद्योगों से निकलने वाला धुआं, निर्माण व ध्वस्तीकरण अब भी शहर में प्रदूषण का कारण हैं। ई-कचरे के दोहन व पीतल भट्ठियों पर काफी हद तक नियंत्रण लगा है।
इस तरह सेहत पर प्रभाव डालता है प्रदूषण
डॉ. अतुल चौहान ने बताया कि पीएम-10 यानी वायु में 10 माइक्रोमीटर से कम त्रिज्या वाले कण हैं तो वह शरीर में पहुंचकर इंफेक्शन व टीबी जैसी बीमारियों को जन्म देते हैं। इसके अलावा यदि पीएम-2.5 यानी कणों का आकार 2.5 माइक्रोमीटर या उससे कम है तो ये रक्त में चले जाते हैं और कैंसर का कारण बनते हैं। उन्होंने बताया कि मास्क इससे बचने के लिए बेहद कारगर उपाय है।
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वर्ष 2013 में वह हिंदू कॉलेज से प्रो. डॉ. अनामिका त्रिपाठी के मार्गदर्शन में पीएचडी कर रहे थे। उस दौरान उनके शोध का विषय परिवेशीय वायु में उपस्थित धातु के कणों से होने वाली बीमारियां रहीं। इस शोध के लिए उन्होंने जब शहर की वायु गुणवत्ता को परखा तो उसमें धातु के सूक्ष्म कण मिले। इसके बाद अलग अलग मोहल्लों में जाकर देखा। तब पता चला कि शहर में कई स्थानों पर पीतल भट्ठियां व ई-कचरा जलने से वायु में यह कण पाए जा रहे हैं। इससे लोगों को आंखों का इंफेक्शन, टीबी व कैंसर जैसी बीमारियां हो रही थीं।
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इस पर उन्होंने नेशनल एयर मॉनिटरिंग प्रोग्राम से जुड़कर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को जानकारी देनी शुरू की। बोर्ड ने विभिन्न विभागों के साथ सिटी एक्शन प्लान तैयार किया। इसके तहत शहर में वायु प्रदूषण कम करने के लिए कई प्रयास किए गए।
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ई-कचरे का दोहन कम करने के लिए कानून बनाया गया। कई धाराएं बढ़ाई गईं। पीतल का काम करने वाले लोगों को पर्यावरण फ्रेंडली भट्ठियां वितरित की गईं। कुछ वर्षों में बेहतर परिणाम देखने को मिले।
परिस्थितियां गंभीर थीं, इसलिए उन्होंने पीएचडी पूर्ण होने के बाद भी यह कार्य जारी रखने की इच्छा जताई। इसमें डॉ. अनामिका त्रिपाठी ने उनका सहयोग किया। अब डॉ. अतुल भारत सरकार के एयर एक्शन प्लान पर काम कर रहे हैं। इसमें उद्योगों को गैस बेस्ड बनाने पर काम किया जा रहा है। फिलहाल कई उद्योगों में दहन के लिए लकड़ी व अन्य ईंधनों का प्रयोग किया जाता है। उस प्लान के तहत उद्योगों को पीएनजी से जोड़ा जाएगा।
नेसा ने किया सम्मानित
डॉ. अतुल को उनके कार्यों के लिए राष्ट्रीय पर्यावरण एवं विज्ञान अकादमी की ओर से जूनियर रीसर्च साइंटिस्ट अवार्ड 2019 में मिला। इसके अलावा राष्ट्रीय स्तर की कई पत्रिकाओं में उनके शोध प्रकाशित हुए हैं। डॉ. अतुल का कहना है कि ऑटोमोबाइल, उद्योगों से निकलने वाला धुआं, निर्माण व ध्वस्तीकरण अब भी शहर में प्रदूषण का कारण हैं। ई-कचरे के दोहन व पीतल भट्ठियों पर काफी हद तक नियंत्रण लगा है।
इस तरह सेहत पर प्रभाव डालता है प्रदूषण
डॉ. अतुल चौहान ने बताया कि पीएम-10 यानी वायु में 10 माइक्रोमीटर से कम त्रिज्या वाले कण हैं तो वह शरीर में पहुंचकर इंफेक्शन व टीबी जैसी बीमारियों को जन्म देते हैं। इसके अलावा यदि पीएम-2.5 यानी कणों का आकार 2.5 माइक्रोमीटर या उससे कम है तो ये रक्त में चले जाते हैं और कैंसर का कारण बनते हैं। उन्होंने बताया कि मास्क इससे बचने के लिए बेहद कारगर उपाय है।