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म़ौत का चारा... बेनकाब कर गया सिस्टम सारा
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गोवंशों की सुरक्षा और गोशालाओं का बेहतर रखरखाव भले ही शासन की प्राथमिकताओं में है लेकिन ग्राम पंचायत की देखरेख में संचालित सांथलपुर गोशाला में बृहस्पतिवार को जो हुआ उसने साफ कर दिया कि गोवंशों की देखभाल का काम वैसा नहीं है, जैसी तस्वीर शासन के समक्ष प्रस्तुत की जाती है। भूखे गोवंशों को पेट भरने के लिए जो हरा चारा दिया गया, वो मौत का चारा साबित हुआ। इसे खाने के कुछ देर बाद तड़प-तड़प कर गोवंश दम तोड़ते गए। गोशाला में उनके प्राथमिक इलाज के इंतजाम भी नहीं थे।
गांव सांथलपुर की गोशाला पल्लादेवी मंदिर के पास स्थित है। बृहस्पतिवार को गोशाला में मौजूद 188 गोवंशों को रोज की तरह खेत से आया हरा चारा (बाजरा) कटवाकर खिलाया गया। इसे खाने के कुछ देर बाद से गोवंशों की तबीयत बिगड़ने लगी। उन्हें तत्काल उपचार मिलना तो दूर गोशाला में मौजूद सेवादार को स्थिति भांपने में ही खासा वक्त लग गया।
दोपहर में एक गोवंश की मौत के बाद सेवादार ने ग्राम प्रधान को जानकारी दी। ग्राम प्रधान मौके पर पहुंचे लेकिन गोशाला में प्राथमिक इलाज की व्यवस्था न होने से वह भी असहाय बने रहे। कुछ देर बाद यह जानकारी रहरा के पशु चिकित्सक डॉ. तेजपाल सिंह तक पहुंची। रहरा से गोशाला तक लगभग दस किलोमीटर की दूरी तय करके वह मौके पर पहुंचे लेकिन बीमार गोवंशों की संख्या ज्यादा देख उनके भी हाथ-पांव फूल गए। आनन-फानन आसपास के अन्य पशु चिकित्सक बुलाए गए। इस बीच गोवंशों के दम तोड़ने का सिलसिला बढ़ता गया।
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सूचना मिलते ही डीएम बीके त्रिपाठी ने जिलेभर के पशु चिकित्सकों व कर्मचारियों को मौके पर रवाना कराया। मंडलायुक्त के निर्देश पर मुरादाबाद व मंडल के अन्य जिलों के पशु चिकित्सक भी सांथलपुर पहुंचे। विधिवत उपचार शुरू होने तक जान गंवाने वाले गोवंशों की संख्या 55 पहुंच गई। देर रात तक पशु चिकित्सकों की कुछ टीमें शेष गोवंशों के इलाज में जुटी रहीं, जबकि कुछ टीमें मृत गोवंशों का सैंपल लेकर उनका पोस्टमार्टम करने में। रात में ही जेसीबी मशीनों से गड्ढे खुदवाकर मृत गोवंशों को दफन करने की प्रक्रिया शुरू की गई।
सांथलपुर गोशाला के चारागाह के लिए करीब 300 बीघा भूमि रिकॉर्ड में दर्ज है। इसके बावजूद इस भूमि पर चारा नहीं उगाया जाता है। गोशाला के लिए हरा चारा किसानों के खेतों से खरीदा जाता है।
ग्रामीणों ने बताया कि आजकल चारे की खरीद सौ रुपये प्रति क्विंटल की दर से की जा रही है। बताते हैं कि रोजाना तीस से चालीस क्विंटल चारे की खरीद होती है। बृहस्पतिवार को गोवंशों को जो चारा दिया गया, वो भी ताहिर नामक किसान के खेत से आया था। ताहिर के खेत से चारे की खरीद पहली बार हुई थी। गोवंशों की मौत के बाद ग्रामीणों के बीच यह सवाल उठता रहा कि अपना चारागाह होते हुई भी गोशाला के लिए चारा उगाने की जरूरत को क्यों नजरअंदाज किया जा रहा था। संवाद
सांथलपुर की गोशाला में गोवंशों की मौत की यह पहली घटना नहीं है। पहले भी समय-समय पर गोवंशों की मौत के मामले सामने आए थे। उन घटनाओं में ग्रामीणों के बीच से पशुओं के भूखा रहने या देखरेख न होने की बात उठती थी लेकिन जिम्मेदारों की ओर से पूर्व के किसी मामले को ज्यादा तवज्जो नहीं दी गई। बृहस्पतिवार को एक साथ बड़ी संख्या में गोवंशों की मौत हुई तो आसपास के लोग ही नहीं आला अफसर भी हिल गए। साथ ही गोशाला के इंतजामों और बदइंतजामी पर भी चर्चा शुरू हो गई। संवाद
वर्ष 2017 में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के साथ ही प्रदेश में गोशालाओं के विकास और गोसंरक्षण की बात शासन की प्राथमिकताओं में आ गई थी। प्रदेश में गोशालाएं बढ़ाने के क्रम में गांव सांथलपुर में करीब 1.30 करोड़ रुपये की लागत से गोशाला का निर्माण कराया गया था। इसका शुभारंभ अगस्त 2019 में पूर्व कैबिनेट मंत्री चेतन चौहान (अब दिवंगत), विधायक महेंद्र सिंह खड़गवंशी और तत्कालीन डीएम उमेश मिश्रा द्वारा कराया गया था। संवाद
सांथलपुर गोशाला में विषैला चारा खाने से इतनी बड़ी संख्या गोवंशों की मौत ने ग्रामीणों का गुस्सा बढ़ा दिया। आक्रोश में आए ग्रामीणों ने गोशाला के बाहर जुटकर हंगामा किया।
उनका आरोप था कि गोशाला में जान गंवाने वाले गोवंशों की वास्तविक संख्या को छिपाया जा रहा है। सच पर परदा डाले रखने के लिए ही किसी ग्रामीण को गोशाला के भीतर नहीं जाने दिया जा रहा है। हंगामा करने वाले ग्रामीणों ने गोशाला के रखरखाव में लापरवाही का आरोप भी लगाया।
आला अफसरों द्वारा दोषियों पर सख्त कार्रवाई का भरोसा देने पर उत्तेजित ग्रामीण बमुश्किल शांत हुए।
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गांव सांथलपुर की गोशाला पल्लादेवी मंदिर के पास स्थित है। बृहस्पतिवार को गोशाला में मौजूद 188 गोवंशों को रोज की तरह खेत से आया हरा चारा (बाजरा) कटवाकर खिलाया गया। इसे खाने के कुछ देर बाद से गोवंशों की तबीयत बिगड़ने लगी। उन्हें तत्काल उपचार मिलना तो दूर गोशाला में मौजूद सेवादार को स्थिति भांपने में ही खासा वक्त लग गया।
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दोपहर में एक गोवंश की मौत के बाद सेवादार ने ग्राम प्रधान को जानकारी दी। ग्राम प्रधान मौके पर पहुंचे लेकिन गोशाला में प्राथमिक इलाज की व्यवस्था न होने से वह भी असहाय बने रहे। कुछ देर बाद यह जानकारी रहरा के पशु चिकित्सक डॉ. तेजपाल सिंह तक पहुंची। रहरा से गोशाला तक लगभग दस किलोमीटर की दूरी तय करके वह मौके पर पहुंचे लेकिन बीमार गोवंशों की संख्या ज्यादा देख उनके भी हाथ-पांव फूल गए। आनन-फानन आसपास के अन्य पशु चिकित्सक बुलाए गए। इस बीच गोवंशों के दम तोड़ने का सिलसिला बढ़ता गया।
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सूचना मिलते ही डीएम बीके त्रिपाठी ने जिलेभर के पशु चिकित्सकों व कर्मचारियों को मौके पर रवाना कराया। मंडलायुक्त के निर्देश पर मुरादाबाद व मंडल के अन्य जिलों के पशु चिकित्सक भी सांथलपुर पहुंचे। विधिवत उपचार शुरू होने तक जान गंवाने वाले गोवंशों की संख्या 55 पहुंच गई। देर रात तक पशु चिकित्सकों की कुछ टीमें शेष गोवंशों के इलाज में जुटी रहीं, जबकि कुछ टीमें मृत गोवंशों का सैंपल लेकर उनका पोस्टमार्टम करने में। रात में ही जेसीबी मशीनों से गड्ढे खुदवाकर मृत गोवंशों को दफन करने की प्रक्रिया शुरू की गई।
सांथलपुर गोशाला के चारागाह के लिए करीब 300 बीघा भूमि रिकॉर्ड में दर्ज है। इसके बावजूद इस भूमि पर चारा नहीं उगाया जाता है। गोशाला के लिए हरा चारा किसानों के खेतों से खरीदा जाता है।
ग्रामीणों ने बताया कि आजकल चारे की खरीद सौ रुपये प्रति क्विंटल की दर से की जा रही है। बताते हैं कि रोजाना तीस से चालीस क्विंटल चारे की खरीद होती है। बृहस्पतिवार को गोवंशों को जो चारा दिया गया, वो भी ताहिर नामक किसान के खेत से आया था। ताहिर के खेत से चारे की खरीद पहली बार हुई थी। गोवंशों की मौत के बाद ग्रामीणों के बीच यह सवाल उठता रहा कि अपना चारागाह होते हुई भी गोशाला के लिए चारा उगाने की जरूरत को क्यों नजरअंदाज किया जा रहा था। संवाद
सांथलपुर की गोशाला में गोवंशों की मौत की यह पहली घटना नहीं है। पहले भी समय-समय पर गोवंशों की मौत के मामले सामने आए थे। उन घटनाओं में ग्रामीणों के बीच से पशुओं के भूखा रहने या देखरेख न होने की बात उठती थी लेकिन जिम्मेदारों की ओर से पूर्व के किसी मामले को ज्यादा तवज्जो नहीं दी गई। बृहस्पतिवार को एक साथ बड़ी संख्या में गोवंशों की मौत हुई तो आसपास के लोग ही नहीं आला अफसर भी हिल गए। साथ ही गोशाला के इंतजामों और बदइंतजामी पर भी चर्चा शुरू हो गई। संवाद
वर्ष 2017 में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के साथ ही प्रदेश में गोशालाओं के विकास और गोसंरक्षण की बात शासन की प्राथमिकताओं में आ गई थी। प्रदेश में गोशालाएं बढ़ाने के क्रम में गांव सांथलपुर में करीब 1.30 करोड़ रुपये की लागत से गोशाला का निर्माण कराया गया था। इसका शुभारंभ अगस्त 2019 में पूर्व कैबिनेट मंत्री चेतन चौहान (अब दिवंगत), विधायक महेंद्र सिंह खड़गवंशी और तत्कालीन डीएम उमेश मिश्रा द्वारा कराया गया था। संवाद
सांथलपुर गोशाला में विषैला चारा खाने से इतनी बड़ी संख्या गोवंशों की मौत ने ग्रामीणों का गुस्सा बढ़ा दिया। आक्रोश में आए ग्रामीणों ने गोशाला के बाहर जुटकर हंगामा किया।
उनका आरोप था कि गोशाला में जान गंवाने वाले गोवंशों की वास्तविक संख्या को छिपाया जा रहा है। सच पर परदा डाले रखने के लिए ही किसी ग्रामीण को गोशाला के भीतर नहीं जाने दिया जा रहा है। हंगामा करने वाले ग्रामीणों ने गोशाला के रखरखाव में लापरवाही का आरोप भी लगाया।
आला अफसरों द्वारा दोषियों पर सख्त कार्रवाई का भरोसा देने पर उत्तेजित ग्रामीण बमुश्किल शांत हुए।