{"_id":"607f509eed20f6655c77ddb7","slug":"dead-bodies-of-covid-patients-changed-in-moradabad","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोरोना काल : दफन हुए रामप्रताप, चिता पर पहुंचाए गए नसीर अहमद, और फिर जो हुआ वो... ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोरोना काल : दफन हुए रामप्रताप, चिता पर पहुंचाए गए नसीर अहमद, और फिर जो हुआ वो...
Wed, 21 Apr 2021 06:45 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Wed, 21 Apr 2021 06:45 AM IST
सार
- कोरोना से हुई दोनों की मौत, अस्पताल की लापरवाही से सील शव एक-दूसरे के परिजनों के पास पहुंचे
- संक्रमण प्रसार रोकने के लिए सील शव को खोलने की नहीं थी इजाजत, बिना देखे किया दफन
- अंतिम संस्कार के दौरान नसीर का चेहरा देखने पर सामने आई हकीकत, किया हंगामा
विज्ञापन
हंगामा होने के बाद पुलिस ने संभाला मोर्चा...
- फोटो : amar ujala
विस्तार
एक ही दिन, एक ही अस्पताल में दो लोगों की मौत हुई। अस्पताल प्रशासन की लापरवाही रही कि उन्होंने सील शव को बिना जांच किए एक दूसरे के परिवार को शव थमा दिया। मुस्लिम परिवार ने अपनी रीति रिवाज के अनुसार शव को दफन कर दिया। हिंदू परिवार ने जब दाह संस्कार शुरू किया तो हकीकत सामने आई। इसके बाद हंगामा शुरू हो गया।
विज्ञापन
इस कहानी को पढ़कर आपको मरहूम अभिनेता इरफान खान की कारवां फिल्म की कहानी याद आ जाएगी। लेकिन ये कहानी हकीकत बनी मुरादाबाद के कॉसमॉस अस्पताल में जहां 19 अप्रैल को दोनों की मृत्यु कोरोना के कारण हुई। 16 अप्रैल को बरेली के डेलापीर निवासी रामप्रताप सिंह और रामपुर के मोहल्ला शहीद खां निवासी नसीर अहमद को भर्ती कराया गया था। दोनों की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव थी। हालत नाजुक होने के कारण दोनों को आईसीयू में रखा गया था। इत्तेफाक रहा कि दोनों ने ही 19 अप्रैल की शाम दम तोड़ दिया। दोनों के शव को कोरोना प्रोटोकॉल के अनुसार सील कर परिजनों को सूचना दी गई। परिजनों के पहुंचने पर शव उन्हें सुपुर्द किए गए।
विज्ञापन
मंगलवार को जब रामप्रताप के परिजन शाम को रामगंगा विहार स्थित मोक्षधाम पर शव का अंतिम संस्कार कर रहे थे तो उनके बेटे सिद्धार्थ ने शव की सील खोलकर देखी तो वह हैरान रह गया। उन्हें सौंपा गया शव उनके पिता का नहीं था। परिजनों ने शव को चिता से उठा लिया और मोक्षधाम में हंगामा शुरू कर दिया। पुलिस को मौके पर बुला लिया। इसके बाद अस्पताल प्रशासन से बातचीत की गई। रामप्रताप के परिजन शव को लेकर अस्पताल पहुंच गए और वहां हंगामा शुरू कर दिया। अस्पताल प्रशासन और पुलिस ने किसी तरह उन्हें शांत कराया।
विज्ञापन
देर शाम नसीर अहमद के परिजनों से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि उन्होंने चक्कर की मिलक स्थित कब्रिस्तान में अपने पिता को दफन कर दिया है। तब उन्हें जानकारी दी गई कि उनके पिता के स्थान पर दूसरा शव उन्हें गलती से दे दिया गया है। वह जिसे दफन कर गए हैं वह रामप्रताप का शव था। जबकि नसीर अहमद का शव अभी मुरादाबाद में है।
पुलिस जानकारी पाकर रामप्रताप के परिजनों के साथ कब्रिस्तान पहुंची। वहां दफन किए गए शव को निकाला गया। इसके बाद शव परिजनों के सुपुर्द किया गया। नसीर अहमद के परिजनों को भी फोन कर बुला लिया गया। मंगलवार रात परिजन रामप्रताप का शव मोक्षधाम ले गए और अंतिम संस्कार कर दिया गया। जबकि नसीर के शव को चक्कर की मिलक स्थित कब्रिस्तान में दफना दिया गया है।
सिद्धार्थ ने देख लिया चेहरा, नसीर को मिल गई दो गज जमीन
कोरोना संक्रमण से जान गंवाने वाले रामपुर के नसीर का नसीब अच्छा था। राम प्रताप के बेटे सिद्धार्थ ने शव का चेहरा देख लिया। वरना मुकद्दस रमजान के इस महीने में उन्हें दो गज जमीन नसीब नहीं होती। चिता पर दाह संस्कार के लिए पहुंच चुके नसीर का शव बाद में दफन कर दिया गया। वहीं राम प्रताप को चिता मिल गई। अगर सिद्धार्थ ने शव का चेहरा नहीं देखा होता तो नसीर दो गज जमीन नहीं मिलती और रामप्रताप को चिता।
मामला संज्ञान में आने पर शवों की अदला-बदली करा दी गई है। दफन किए गए शव को कब्रिस्तान से निकलवाकर रामप्रताप के परिजनों और नसीर का शव उनके परिजनों को सौंप दिया गया है। इस मामले में कोई तहरीर नहीं मिली है। परिजन यदि तहरीर देंगे तो उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
- शलभ माथुर, डीआईजी, मुरादाबाद
दोनों के शव ले जाने के लिए एंबुलेंस खड़ी थी। कोरोना संक्रमित होने से दोनों शव पूरी तरह ढके हुए थे। मानवीय चूक से दोनों शव बदल गए। हालांकि शव ले जाने से पहले स्टाफ उनकी शिनाख्त कराते हैं। परिजनों की पहचान के बाद शव सौंपा जाता है।
- डॉ. अनुराग अग्रवाल, प्रबंध निदेशक, कॉसमॉस हॉस्पिटल