{"_id":"3545b8d3199a487b1ee4fce0f1930ceb","slug":"shameem-wants-murder-in-court-premisis-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कचहरी में ही अधिवक्ता की हत्या करना चाहता था शमीम जैदी","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
कचहरी में ही अधिवक्ता की हत्या करना चाहता था शमीम जैदी
ब्यूरो/अमर उजाला मुरादाबाद
Updated Sun, 28 Feb 2016 02:11 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
स्टेट हाईवे पर भटावली गांव के पास वरिष्ठ अधिवक्ता अली अब्बास को गोली मारकर मौत के घाट उतारने वाले हत्यारोपी शमीम जैदी ने बताया है कि वह अली अब्बास को कचहरी में ही मारना चाहता था। वह तमंचा लेकर कई बार अली अब्बास के चैंबर के पास से गुजरा था। लेकिन उनके चैंबर में कोई न कोई व्यक्ति हमेशा बैठा मिलता था।
जिस कारण वह अपने मकसद में कामयाब नहीं हो पाया था। शमीम ने बताया कि अली अब्बास और उसके परिवार से हमारी दुश्मनी वर्षों पुरानी है। चार साल पहले मेरी भतीजी रबाब बानो जैदी की शादी उदयपुर निवासी जिले हुसैन से हुई थी। लेकिन अली अब्बास ने बीच में पड़कर भतीजी की गृहस्थी को तबाह कर दिया था। पिछले एक साल से वह उसकी हत्या करने की साजिश रच रहा था।
लेकिन हर बार गुस्सा दबाकर शांत बैठ जाता था। घटना से एक दिन पहले ही जिले हुसैन तारीख पर जयपुर से मुरादाबाद आया था। तब वह अली अब्बास से मिला था। इस बार सोच लिया था कि अली अब्बास को अब ठिकाने लगाना ही है। अली अब्बास की हत्या के बाद ही जिले हुसैन से निपटा जा सकता है।
विज्ञापन
घटना वाले दिन वह अपनी दूसरी भतीजे फिजा की स्कूटी से हरथला से वकील के पीछे लग गया था। भटावली के पास शमीम ने अधिवक्ता को पीठ में गोली मार दी थी और अगवानपुर की ओर फरार हो गए थे। इसके बाद दोनों अलग अलग होकर हिमगिरी कालोनी में आकर छिप गए थे।
विज्ञापन
जिस कारण वह अपने मकसद में कामयाब नहीं हो पाया था। शमीम ने बताया कि अली अब्बास और उसके परिवार से हमारी दुश्मनी वर्षों पुरानी है। चार साल पहले मेरी भतीजी रबाब बानो जैदी की शादी उदयपुर निवासी जिले हुसैन से हुई थी। लेकिन अली अब्बास ने बीच में पड़कर भतीजी की गृहस्थी को तबाह कर दिया था। पिछले एक साल से वह उसकी हत्या करने की साजिश रच रहा था।
विज्ञापन
लेकिन हर बार गुस्सा दबाकर शांत बैठ जाता था। घटना से एक दिन पहले ही जिले हुसैन तारीख पर जयपुर से मुरादाबाद आया था। तब वह अली अब्बास से मिला था। इस बार सोच लिया था कि अली अब्बास को अब ठिकाने लगाना ही है। अली अब्बास की हत्या के बाद ही जिले हुसैन से निपटा जा सकता है।
विज्ञापन
घटना वाले दिन वह अपनी दूसरी भतीजे फिजा की स्कूटी से हरथला से वकील के पीछे लग गया था। भटावली के पास शमीम ने अधिवक्ता को पीठ में गोली मार दी थी और अगवानपुर की ओर फरार हो गए थे। इसके बाद दोनों अलग अलग होकर हिमगिरी कालोनी में आकर छिप गए थे।