मैं हूं जेल हास्पिटल में ‘रेप’ की घटना का चश्मदीद

ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद Updated Sun, 24 Jul 2016 10:41 AM IST
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अपराध - फोटो : demo

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 जिला जेल के अस्पताल में महिला उम्रकैदी के साथ ‘रेप’ की घटना पर बेशक जेल अफसरों ने पर्दा डाल दिया हो लेकिन इसकी चिंगारी रह - रहकर उठ रही है। अब जेल के एक नंबरदार ने डीएम को चिट्ठी भेजकर दावा किया है कि वह जेल के अस्पताल में हुई ‘रेप’ की घटना का चश्मदीद है। उसने जेल अधिकारियों से अपनी जान को खतरा बताते हुए सुरक्षा की मांग की है। बंदी का आरोप है कि यदि उसे दूसरी जेल में शिफ्ट नहीं किया गया तो जेल में उसके साथ कोई अनहोनी हो सकती है।
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11 जुलाई को जिला जेल के अस्पताल में जेल के ही कुछ कारिंदों ने एक महिला उम्रकैदी और सपा नेता के गुर्गे की एकांत मुलाकात कराई थी। मामले की भनक लगने के बाद डीएम जुहैर बिन सगीर ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए थे। एसएसपी ने भी मामले की जांच कराई थी। लेकिन पीड़िता समेत घटना से जुड़े बाकी लोग जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं ऐसे में जेल अफसरों ने कैदियों पर प्रभाव डालकर जांच को मैनेज कर लिया था।
सीनियर जेल सुपरिंटेंडेंट बीआर वर्मा ने यह तो स्वीकार किया था कि महिला बंदी को बिना जेलर की जानकारी में डाले हेड चीफ वार्डन महिला बैरक से निकालकर जेल अस्पताल ले गया था, लेकिन उन्होंने महिला के साथ कोई घटना होने से इंकार कर दिया था।
लेकिन अब जिला जेल के एक नंबरदार ने पूरी घटना बयां करते हुए डीएम को चिट्ठी भेजी है। नंबरदार का दावा है कि वह घटना का चश्मदीद है। बकौल नंबरदार 11 जुलाई को महिला उम्रकैदी जिला अस्पताल के एक कमरे में बंद मिली थी।

दरवाजे को धक्का देकर खोला गया था और उस वक्त वह जेल अफसर के साथ नंबरदार होने के नाते मौजूद था। नंबरदार ने डीएम को भेजी चिट्ठी में अपनी जान को खतरा बताया है। नंबरदार का कहना है कि जेल अधिकारी उसकी हत्या करा सकते हैं। उसे लगातार इसके लिए धमकियां दी जा रही हैं।

बंदी ने खुद को सुरक्षा दिए जाने और किसी दूसरी जेल में ट्रांसफर करने की मांग की है। एक जेल अफसर ने भी नाम नहीं छापने की शर्त पर पूरे घटनाक्रम को बयां किया है।

क्या कहा है जिला जेल में बंद नंबरदार ने 
   ‘ ग्यारह जुलाई को दोपहर के करीब पौने चार बजे थे तभी एक नंबरदार ने साहब को आकर बताया जेल अस्पताल में कुछ गड़बड़ी चल रही है। नंबरदार की सूचना पर साहब जेल अस्पताल की ओर चले, नंबरदार होने के नाते मैं भी उनके साथ में था।

अमूमन जब भी जेल अफसर जेल में राउंड लेते हैं तो नंबरदार उनके साथ ही होते हैं। जेल अस्पताल पर पहुंचे तो देखा कि एक कमरे का दरवाजा भिड़ा हुआ (बंद) था। साहब ने धक्का दिया तो दरवाजा खुल गया। अंदर महिला उम्रकैदी और एक अन्य नंबरदार था जिसकी ड्यूटी अस्पताल पर ही रहती है। महिला उम्रकैदी के कपड़े अस्तव्यस्त थे और नंबरदार भी ठीक हालत में नहीं था। महिला उम्रकैदी सकपका गई।

उसे तुरंत साहब ने महिला बैरक भिजवा दिया। छानबीन हुई तो पता चला कि सपा नेता के गुर्गे के कहने पर चीफ हेड वार्डन सुबह साढ़े दस बजे ही महिला उम्रकैदी को मिलाई के बहाने महिला बैरक से निकाल लाया था। महिला तीन बजे तक जेल में रही और सपा नेता के गुर्गे से बातें करती रही। लेकिन उस वक्त तक जेल में वरिष्ठ अफसर भी रहते हैं, लिहाजा दोनों की एकांत मुलाकात की व्यवस्था नहीं हो सकी।

दोपहर तीन बजकर दस मिनट पर महिला को बैरक में भेज दिया गया। कुछ बड़े साहबों के जाते ही महिला को कमजोरी दर्शाकर दस मिनट बाद ही फिर से महिला बैरक से बुलाया गया और जेल अस्पताल में भेज दिया। यहां सपा नेता के गुर्गे ने पहले महिला से एकांत मुलाकात की फिर इसके बाद जेल के कारिंदे ने।

पूरे प्रकरण में महिला की सहमति थी लिहाजा उसने शिकायत नहीं की। वो तो ऐन वक्त पर पकड़े गए तो खेल खुल गया। जांच में कोई मुंह न खोले इसके लिए महिला को लालच दिया गया। जेल की बदनामी बचाने के लिए सभी को मुंह बंद रखने की हिदायत दी गई है।’




 
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