फिर खुलेगी शैली हत्याकांड की फाइल, एफआर खारिज

मुरादाबाद/अमर उजाला ब्यूरो Updated Tue, 05 Dec 2017 01:32 AM IST
fir khulegi shali hatyakand ki file
सांकेतिक चित्र - फोटो : अमर उजाला
शहर को दहलाकर रख देने वाले बहुचर्चित शैली हत्याकांड की फाइल फिर से खुलने जा रही है। 15/16 मई 2014 की रात कातिलों ने जिला अस्पताल की पूर्व सीएमएस डा. शैली मेहरोत्रा, उनके पति डा. ओम मेहरोत्रा, ननद डा. रश्मि और छह वर्षीय पोती देवांशी की जिगर कालोनी स्थित घर में नृशंसता से गले रेतकर हत्या कर दी थी।

पुलिस और एसटीएफ ने दो साल तक तहकीकात की लेकिन कातिलों का सुराग नहीं लगा सकी। सितंबर 2016 में पुलिस ने हत्याकांड के खुलासे में हाथ खड़े करते हुए फाइनल रिपोर्ट लगाकर हत्याकांड की फाइल बंद कर दी थी। डा. शैली की बेटी की याचिका पर अदालत ने एफआर को खारिज कर पुलिस को अग्रिम विवेचना करने के आदेश दिए हैं।

कोर्ट ने सीओ स्तर के अधिकारी को विवेचक बनाने के आदेश दिए हैं।वर्ष 2014 में लोकसभा चुनाव के नतीजों वाले दिन हुए इस हत्याकांड से पूरे शहर में सनसनी फैल गई थी। जिला अस्पताल की सेवानिवृत्त सीएमएस डा. शैली अपने पति, ननद और पोती के साथ जिगर कालोनी स्थित अपने मकान में रहती थीं।

घर में घुसे कातिलों ने 15/16 मई की रात मे किसी वक्त चारों की गला रेतकर हत्या कर दी थी। लेकिन लोकसभा चुनावों की मतगणना में लगी पुलिस को 16 मई की दोपहर तक वारदात की भनक तक नहीं लगी। दोपहर बाद हत्याकांड का पता चलने पर पुलिस मौके पर पहुंची तो चारों के खून से लथपथ शव घर में पड़े मिले।

वारदात से गुस्साए डाक्टरों ने महीनों तक आंदोलन किया। पुलिस की मदद के लिए एसटीएफ को भी लगाया गया। पुलिस और एसटीएफ ने कई दिशाओं में काम किया लेकिन सनसनीखेज हत्याकांड की गुत्थी नहीं सुलझी।

आखिरकार 17 सितंबर 2016 को विवेचक/ तत्कालीन एसएचओ सिविल लाइंस बीपी सिंह बालियान ने यह कहते हुए फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी कि हत्याकांड के खुलासे की कोई उम्मीद नहीं है। पुलिस की ओर से कोर्ट में दाखिल इस एफआर को डा. शैली की बेटी डा. गुंजन ने कोर्ट में चुनौती दी थी।

डा. गुंजन का आरोप था कि पुलिस ने गंभीरता से खुलासे के प्रयास करने के बजाए महज थाने में बैठकर जांच की खानापूरी की है। सुनवाई के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रण विजय सिंह ने पुलिस की फाइनल रिपोर्ट खारिज कर दी है। अदालत ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को आदेश दिया है कि सीओ स्तर के अधिकारी से विवेचना कराकर दो माह में रिपोर्ट अदालत में दाखिल करें।

संदिग्ध लोगों का नहीं कराया गया पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट
मुरादाबाद। डा. शैली की बेटी द्वारा अदालत में दाखिल की प्रोटेस्ट याचिका में कहा गया है कि पुलिस ने संदिग्ध लोगों से पूछताछ तक नहीं की। इस मामले में डा. किरण मेहरा, हर पाल सिंह, मो. शमीम सलमानी और सीमा का पॉलीग्राफ व नार्को टेस्ट कराने के लिए अदालत में याचिका दाखिल की गई थी।


लेकिन यह सभी संदिग्ध अदालत में उपस्थित हो गए और पॉलीग्राफ व नार्को टेस्ट कराने में असहमति दी। पुलिस ने इस केस में अनावरण में कोई रूचि नहीं दिखाई।


 सर्जिकल चाकू से की थीं हत्याएं डा. गुंजन अरोरा ने अदालत में दाखिल किए गए  प्रोटेस्ट याचिका में कहा गया है कि विधि विज्ञान प्रयोगशाला की टीम ने सोलह मार्च 2016 को मुरादाबाद पहुंचकर पोस्टमार्टम करने वालों डाक्टरों के बयान दर्ज किए थे।\

इसके बाद टीम ने कहा था कि चारों हत्याएं सर्जिकल चाकू से की गई थीं। जिसके बाद आशंका जताई गई थी कि इस हत्याकांड में डाक्टर पेशे से जुड़े लोग हो सक ते हैं। इसके बाद भी डाक्टर किरण मेहरा से पूछताछ नहीं की गई।


पुलिस की नाकामी के कारण नहीं हुआ सनसनीखेज हत्याकांड का खुलासा  हरथला पुलिस चौकी के सामने मिली डा. शैली की कार के फिंगर प्रिंट लिए गए या नहीं इस बिंदू पर भी नहीं की गई।

न ही संदिग्ध लोगों के फिंगर प्रिंट का मिलान कराया गया। डा. शैली के बेटे डा. उज्जवल मेहरोत्रा ने विवेचक को दिए बयानों में कहा था कि इस हत्याकांड में किसी खास का हाथ है। बेटे ने अपने बयानों में कहा था कि मेरी जानकारी के अनुसार फूफा किरण मेहरा, सीमा, शीला और सिक्योरिटी इंचार्ज आरिफ खान को आने जाने में कोई रुकावट नहीं थी।


मैंने अपने मां-बाप और बेटी को खो दिया। साढ़े तीन साल बाद भी कातिलों के चेहरे सामने नहीं आए हैं। पुलिस ने इस मामले में एफआर लगा दी। हम चाहते हैं कि कातिलों के चेहरे सामने आने चाहिए। इस पूरे मामले की सही जांच होनी चाहिए।
डा. उज्जवल मेहरोत्रा, डा. शैली मेहरोत्रा का बेटा

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