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मौत को गले लगा रहे किशोर

Thu, 06 Sep 2018 02:09 AM IST
Updated Thu, 06 Sep 2018 02:09 AM IST
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मौत को गले लगा रहे किशोर
मुरादाबाद।
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तनाव बर्दाश्त न कर पाने पर मौत को गले लगाने का सिलसिला अब किशोरों तक पहुंचा गया। मुरादाबाद जिले में दो माह में चार किशोरों द्वारा आत्महत्या किए जाने से अभिभावक सहम उठे हैं। स्मार्ट फोन, स्कूल और खेलकूद में अच्छा प्रदर्शन करने का दबाव व होम वर्क पूरा न होने के कारण छात्र अपनी जान दे रहे हैं। मां-बाप की डांट तो इन्हें दुश्मनों की तरह लग रही है। इन बच्चों की एक गलती माता पिता के लिए जिंदगी भर के लिए गम दे जाती है। अकेले मुरादाबाद में ही इस साल जनवरी से अगस्त तक आठ किशोर तनाव में आकर अपनी जिंदगी खत्म कर चुके हैं।

होम वर्क पूरा न होने पर सातवीं का छात्र फंदे पर झूला
पाकबड़ा में 18 जुलाई को सातवीं कक्षा के छात्र अनुज ने फंदे पर लटक कर जान दे दी थी। होमवर्क पूरा न होने के कारण छात्र तनाव में था। हुआ है। शाम को जब मां ड्यूटी से लौटी तो बेटा फंदे पर लटका हुआ था।
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अधिवक्ता के बेटे ने दे दी जान
कांशीराम निवासी अधिवक्ता सुनील कुमार के इकलौते बेटा यशजीत सिंह (13) पारकर इंटर कालेज में नौवीं कक्षा में पढ़ता था। मंगलवार दोपहर वह स्कूल से घर लौटा था। दादा के पास बैठकर उसने खाना खाया। इसके बाद वह मकान की ऊपरी मंजिल पर चला गया और फंदे लगाकर आत्महत्या कर ली।
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मां के डांटने पर किशोर ने जहर खाकर दी जान
कटघर के पीतल बस्ती में रहने वाली एक महिला ने अपने नाबालिग बेटे को डांट दिया था। वह चाय की दुकान पर नौकरी करता था। लेकिन एक सप्ताह तक वह दुकान पर नहीं गया और दोस्तों के साथ इधर उधर घूमता रहा। किशोर को मां की डांट इतनी बुरी लगी की उसने जहर खाकर जान दे दी।

पेड़ पर लटक कर की आत्महत्या
बिलारी थानाक्षेत्र में सात अगस्त को छात्र आकाश ने जंगल में पेड़ पर लटक कर जान दे दी। परिजन उसकी तलाश में जुटे थे। लेकिन उसका कहीं पता नहीं चल पाया। अगले दिन ग्रामीण जंगल गए तो उन्होंने छात्र को फंदे पर लटका देखा।


वर्जन
डा. नीरज गुप्ता, मनोचिकित्सक
किशोरों द्वारा आत्महत्या करने के मामले बढ़ गए हैं। इसके पीछे बच्चों पर क्षमता से ज्यादा बोझ डालना और अधिक अपेक्षा करना है। कहीं कहीं देखने में आ रहा है कि जो मां बाप खुद हासिल नहीं कर पाए। वह अपने बच्चों के जरिये अपने सपनों को पूरा करना चाहते हैं। वह ये भी भूल जाते हैं कि हमारे बच्चे में ये हासिल करने की क्षमता है या नहीं। माता पिता दोनों के जॉब में होने के कारण बच्चों को समय नहीं दे पाता। संयुक्त परिवार भी अलग अलग होने लगे हैं। बच्चों से संवाद नहीं हो पा रहा है। बच्चों की इच्छा के अनुसार ही विषयों का चयन करना चाहिए।
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