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हत्या के मामले में आजीवन कारावास
Updated Fri, 27 Jul 2018 02:40 AM IST
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मुरादाबाद।
असमोली के सात साल पुराने चालक हत्याकांड में अदालत ने तीन मुलजिमों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। जबकि प्रत्येक दोषी पर 25-25 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।
संभल के असमोली थाने में राम चरन निवासी मनौटा ने मुकदमा दर्ज कराया कि उसका पुत्र सत्यपाल टाटा सूमो गाड़ी चलाता है। 17 सितंबर 2011 को अरविंद नामक युवक ने कार बुक कराई और सत्यपाल को अपने साथ ले गया। अगले दिन जब वह वापस नहीं आया तो उसके फोन पर संपर्क करना चाहा। लेकिन फोन नहीं उठा। काफी तलाशने के बाद 21 सितंबर 2011 को अखबारों के माध्यम से जानकारी मिली कि डींगरपुर के जंगलों के पास एक लाश मिली है। जाकर देखा तो पता चला कि लाश सत्यपाल की थी। मुकदमे में तफ्तीश के समय पता चला कि कार बुक कराने वाले आरोपी अरविंद का असली नाम मुनेश है। जिसने नाम बदलकर गाड़ी मुन्नू के कहने पर बुक कराई थी। मुन्नू की पहले से सत्यपाल की दुश्मनी रुपये के लेनदेन को लेकर चल रही थी। घटना में मुन्नू के एक अन्य साथी दीपक ने भी सहयोग किया था और सत्यपाल की तीनों ने मिलकर गला रेत कर हत्या कर दी थी। उक्त मामला अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम की अदालत में सुना गया। जिसमें अदालत ने पुख्ता सबूतों के आधार पर तीनों आरोपियों को हत्या में दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास के साथ प्रत्येक पर 25000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है।
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असमोली के सात साल पुराने चालक हत्याकांड में अदालत ने तीन मुलजिमों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। जबकि प्रत्येक दोषी पर 25-25 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।
संभल के असमोली थाने में राम चरन निवासी मनौटा ने मुकदमा दर्ज कराया कि उसका पुत्र सत्यपाल टाटा सूमो गाड़ी चलाता है। 17 सितंबर 2011 को अरविंद नामक युवक ने कार बुक कराई और सत्यपाल को अपने साथ ले गया। अगले दिन जब वह वापस नहीं आया तो उसके फोन पर संपर्क करना चाहा। लेकिन फोन नहीं उठा। काफी तलाशने के बाद 21 सितंबर 2011 को अखबारों के माध्यम से जानकारी मिली कि डींगरपुर के जंगलों के पास एक लाश मिली है। जाकर देखा तो पता चला कि लाश सत्यपाल की थी। मुकदमे में तफ्तीश के समय पता चला कि कार बुक कराने वाले आरोपी अरविंद का असली नाम मुनेश है। जिसने नाम बदलकर गाड़ी मुन्नू के कहने पर बुक कराई थी। मुन्नू की पहले से सत्यपाल की दुश्मनी रुपये के लेनदेन को लेकर चल रही थी। घटना में मुन्नू के एक अन्य साथी दीपक ने भी सहयोग किया था और सत्यपाल की तीनों ने मिलकर गला रेत कर हत्या कर दी थी। उक्त मामला अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम की अदालत में सुना गया। जिसमें अदालत ने पुख्ता सबूतों के आधार पर तीनों आरोपियों को हत्या में दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास के साथ प्रत्येक पर 25000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है।
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