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आईजी तक गए थे मौके पर फिर भी बरती गई लापरवाही
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मुरादाबाद। डॉ. शैली हत्याकांड के खुलासे के प्रयास में लापरवाही बरते जाए जाने पर जहां हाईकोर्ट ने टिप्पणी की और लगभग दोबारा बंद होने जा रहे केेस की पुर्नविवेचना के आदेश दिए हैं। अभी हाईकोर्ट से जारी आदेश पुलिस के पास नहीं पहुंचे हैं हालांकि इससे पहले ही पुलिस अब नए सिरे से इस केस की जांच करने की रणनीति तैयार करने में जुट गई है। जिससे की वारदात का खुलासा हो सके।
16 मई 2014 की दोपहर को जिगर कालोनी में जिस वक्त डॉ. शैली और समेत चार लोगों की हत्या किए जाने का खुलासा हुआ उस वक्त मंडी समिति में लोकसभा चुनाव को लेकर पड़े मतों की गणना हो रही थी। चार लोगों की हत्या की सूचना मिलने पर एसएचओ, सीओ एसएसपी ही नहीं आईजी तक पहुंचे थे। चंद घंटों में चार लोगों की हत्या के मामले की जानकारी मीडिया के जरिए देश भर में फैल गई। आनन फानन में 16 मई की रात को ही तत्कालीन एसएसपी ने उस वक्त सिविल लाइन थाने के एसएचओ से लेकर संबंधित बीट के सिपाही तक को निलंबित कर दिया था। इसके बाद इस वारदात का जल्द खुलासा करने का आश्वासन पीड़ित परिवार को दिया गया लेकिन दो साल तक विवेचना करने के बाद पुलिस ने इस मामले में एफआर लगा दी और केस को बंद कर दिया था। इस दो साल के अंदर सिविल लाइन थाने में करीब छह एसएचओ बदले गए लेकिन कोई भी इस वारदात का खुलासा नहीं कर सका। वक्त के साथ ही अधिकारियों ने भी पुलिस की जांच को लेकर आंखें मूंद ली थी और लगातार इस केस पर नजर नहीं रखी गई, जिस वजह से लापरवाहियां होती रही। अगर उस वक्त सीनियर अधिकारी इस मामले में खुद मॉनिटरिंग करते तो शायद वारदात का खुलासा हो सकता था।
‘ डॉ. शैली हत्याकांड के खुलासे को लेकर पुलिस की ओर से हरसंभव प्रयास किए गए। वारदात के खुलासे में सफलता नहीं मिली है, इस मामले की जांच को लेकर नए सिरे से रणनीति बनाई जाएगी। हाईकोर्ट के आदेश मिलने के बाद उन बिंदुओं को भी जांच में शामिल किया जाएगा, जिनमें कमी रह गई है।’
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जे रविंदर गौड, एसएसपी
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16 मई 2014 की दोपहर को जिगर कालोनी में जिस वक्त डॉ. शैली और समेत चार लोगों की हत्या किए जाने का खुलासा हुआ उस वक्त मंडी समिति में लोकसभा चुनाव को लेकर पड़े मतों की गणना हो रही थी। चार लोगों की हत्या की सूचना मिलने पर एसएचओ, सीओ एसएसपी ही नहीं आईजी तक पहुंचे थे। चंद घंटों में चार लोगों की हत्या के मामले की जानकारी मीडिया के जरिए देश भर में फैल गई। आनन फानन में 16 मई की रात को ही तत्कालीन एसएसपी ने उस वक्त सिविल लाइन थाने के एसएचओ से लेकर संबंधित बीट के सिपाही तक को निलंबित कर दिया था। इसके बाद इस वारदात का जल्द खुलासा करने का आश्वासन पीड़ित परिवार को दिया गया लेकिन दो साल तक विवेचना करने के बाद पुलिस ने इस मामले में एफआर लगा दी और केस को बंद कर दिया था। इस दो साल के अंदर सिविल लाइन थाने में करीब छह एसएचओ बदले गए लेकिन कोई भी इस वारदात का खुलासा नहीं कर सका। वक्त के साथ ही अधिकारियों ने भी पुलिस की जांच को लेकर आंखें मूंद ली थी और लगातार इस केस पर नजर नहीं रखी गई, जिस वजह से लापरवाहियां होती रही। अगर उस वक्त सीनियर अधिकारी इस मामले में खुद मॉनिटरिंग करते तो शायद वारदात का खुलासा हो सकता था।
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‘ डॉ. शैली हत्याकांड के खुलासे को लेकर पुलिस की ओर से हरसंभव प्रयास किए गए। वारदात के खुलासे में सफलता नहीं मिली है, इस मामले की जांच को लेकर नए सिरे से रणनीति बनाई जाएगी। हाईकोर्ट के आदेश मिलने के बाद उन बिंदुओं को भी जांच में शामिल किया जाएगा, जिनमें कमी रह गई है।’
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जे रविंदर गौड, एसएसपी