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अंधेरी लिफ्ट के 40 मिनट .. मुझे लगा सांस थम जाएगी
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मुरादाबाद। नया मुरादाबाद स्थित पार्श्वनाथ प्रतिभा सोसाइटी के टावर ए-3 की लिफ्ट शाम करीब सवा सात बजे बिजली जाने से बंद हो गई। लिफ्ट अटकने की वजह से रिटायर्ड बैंक अधिकारी प्रतीक गुप्ता की पत्नी मृदुला गुप्ता लिफ्ट में फंस गईं। मृदुला करीब 40 मिनट तक लिफ्ट में ‘कैद’ रहीं। बिजली जाने से की वजह से अंधेरा हो गया और सभी स्विच ने भी काम करना बंद कर दिया। उन्होंने फोन से पति और पड़ोसियों को जानकारी दी तो सोसाइटी में खलबली मच गई। 40 मिनट बाद बिजली आने पर बाहर निकली मृदुला के चेहरे पर खौफ था, बोलीं, हर पल लग रहा था कि बस सांस थमने वाली है।
अंधेरी लिफ्ट में फंसी मृदुला मोबाइल पर परिवार और रिश्तेदारों को फोन करती रहीं। कुछ देर में अन्य टावर में रहने वाले लोग लिफ्ट के बाहर इकट्ठा हो गए। तमाम कोशिशों के बावजूद लिफ्ट के दरवाजे नहीं खोले जा सके। सोसाइटी के बिल्डर और मैनेजर को भी फोन किए गए, लेकिन कोई मौके पर नहीं आया। लिफ्ट अचानक इलेक्ट्रिक सप्लाई फेल होने से बंद हुई थी। तकनीकी खामी यह कि बैटरी बैकअप भी नहीं था। जनरेट सोसाइटी में मौजूद था, लेकिन ऐन मौके पर चला नहीं। लिहाजा ब्लड प्रेशर की मरीज मृदुला के लिए यह 40 मिनट सांसों को थमा देने वाले थे। लिफ्ट से बाहर निकलते ही वह जैसे निढाल हो गईं। सोसाइटी की महिलाओं ने उन्हें संभाला। मुंह पर पानी के छींटे मारे। कुछ देर में उनकी हालत में सुधार होने के बाद पूरी सोसाइटी के लोग गाड़ियों में बैठकर मझोला थाने पहुंचे। सोसाइटी के लोगों ने बिल्डर और मैनेजर के खिलाफ लापरवाही की तहरीर सौंपी है।
पड़ोसी के घर जाने को लिया था लिफ्ट का सहारा
मृदुला ने बताया कि वह टावर ए-2 के फ्लैट नंबर 202 में रहती हैं। सोमवार शाम उनके पति काम से बाहर गए हुए थे। वह टावर ए-3 के फ्लैट नंबर 203 में रहने वाली अपने पड़ोसी के घर जाने के लिए निकली थी। टावर ए-3 की दूसरी मंजिल पर फ्लैट 203 में पहुंचने के लिए लिफ्ट का सहारा लिया था। जिस वक्त ये हादसा हुआ।
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बच्चे फंसे थे तो लिफ्ट काटकर निकाले गए थे
सोसाइटी में रहने एक्सपोर्टर अभिषेक अरविंद के मुताबिक यहां 200 परिवार रहते हैं। वह खुद एक साल पहले लिफ्ट में फंस चुके हैं। इससे पहले दो बच्चों के फंसने पर जमकर हंगामा हुआ था। लिफ्ट को काटकर बच्चों को बाहर निकाला गया था। कई सालों से यह हादसे होते आ रहे हैं। लेकिन मेंटीनेंस की व्यवस्थायें दुरुस्त नहीं की गई।
2200 लेते हैं तो मेंटीनेंस भी करें
सोसाइटी के लोगों के मुताबिक हर महीने प्रति परिवार 2200 रुपये मेंटीनेंस के लिए वसूले जाते हैं। लिफ्ट की बेजार व्यवस्था को सुधारने के प्रयास नहीं किए जाते हैं। अब लोग इन लिफ्ट के इस्तेमाल से बचने लगे हैं।
सोसाइटी के लोग थाने आए थे। मैने सभी की बातें सुनी है। बिल्डर और मैनेजर पर लापरवाही बरतने के आरोप लगाए गए हैं। सोसाइटी के लोगों ने तहरीर सौंपी है। - विकास सक्सेना, प्रभारी निरीक्षक, मझोला थाना
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अंधेरी लिफ्ट में फंसी मृदुला मोबाइल पर परिवार और रिश्तेदारों को फोन करती रहीं। कुछ देर में अन्य टावर में रहने वाले लोग लिफ्ट के बाहर इकट्ठा हो गए। तमाम कोशिशों के बावजूद लिफ्ट के दरवाजे नहीं खोले जा सके। सोसाइटी के बिल्डर और मैनेजर को भी फोन किए गए, लेकिन कोई मौके पर नहीं आया। लिफ्ट अचानक इलेक्ट्रिक सप्लाई फेल होने से बंद हुई थी। तकनीकी खामी यह कि बैटरी बैकअप भी नहीं था। जनरेट सोसाइटी में मौजूद था, लेकिन ऐन मौके पर चला नहीं। लिहाजा ब्लड प्रेशर की मरीज मृदुला के लिए यह 40 मिनट सांसों को थमा देने वाले थे। लिफ्ट से बाहर निकलते ही वह जैसे निढाल हो गईं। सोसाइटी की महिलाओं ने उन्हें संभाला। मुंह पर पानी के छींटे मारे। कुछ देर में उनकी हालत में सुधार होने के बाद पूरी सोसाइटी के लोग गाड़ियों में बैठकर मझोला थाने पहुंचे। सोसाइटी के लोगों ने बिल्डर और मैनेजर के खिलाफ लापरवाही की तहरीर सौंपी है।
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पड़ोसी के घर जाने को लिया था लिफ्ट का सहारा
मृदुला ने बताया कि वह टावर ए-2 के फ्लैट नंबर 202 में रहती हैं। सोमवार शाम उनके पति काम से बाहर गए हुए थे। वह टावर ए-3 के फ्लैट नंबर 203 में रहने वाली अपने पड़ोसी के घर जाने के लिए निकली थी। टावर ए-3 की दूसरी मंजिल पर फ्लैट 203 में पहुंचने के लिए लिफ्ट का सहारा लिया था। जिस वक्त ये हादसा हुआ।
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बच्चे फंसे थे तो लिफ्ट काटकर निकाले गए थे
सोसाइटी में रहने एक्सपोर्टर अभिषेक अरविंद के मुताबिक यहां 200 परिवार रहते हैं। वह खुद एक साल पहले लिफ्ट में फंस चुके हैं। इससे पहले दो बच्चों के फंसने पर जमकर हंगामा हुआ था। लिफ्ट को काटकर बच्चों को बाहर निकाला गया था। कई सालों से यह हादसे होते आ रहे हैं। लेकिन मेंटीनेंस की व्यवस्थायें दुरुस्त नहीं की गई।
2200 लेते हैं तो मेंटीनेंस भी करें
सोसाइटी के लोगों के मुताबिक हर महीने प्रति परिवार 2200 रुपये मेंटीनेंस के लिए वसूले जाते हैं। लिफ्ट की बेजार व्यवस्था को सुधारने के प्रयास नहीं किए जाते हैं। अब लोग इन लिफ्ट के इस्तेमाल से बचने लगे हैं।
सोसाइटी के लोग थाने आए थे। मैने सभी की बातें सुनी है। बिल्डर और मैनेजर पर लापरवाही बरतने के आरोप लगाए गए हैं। सोसाइटी के लोगों ने तहरीर सौंपी है। - विकास सक्सेना, प्रभारी निरीक्षक, मझोला थाना