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बाल कृष् ण हत्याकांड: पुलिस ने खामोशी से लगाई एफआर
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मुरादाबाद। मंडी धनौरा के बहुचर्चित बाल कृष्ण हत्याकांड की फाइल पुलिस ने खामोशी से फाइनल रिपोर्ट लगाकर बंद कर दी है। बाल कृष्ण की हत्या में नामजद मंडी धनौरा के तत्कालीन इंस्पेक्टर अरविंद मोहन शर्मा समेत नामजद सभी आठ पुलिस कर्मियों को क्लीन चिट दे दी गई है। बाल कृष्ण को अवैध हिरासत में रखने के आरोप से भी पुलिस कर्मियों को मुक्त कर दिया गया है। हत्याकांड में निलंबित किए गए आरोपी पुलिस कर्मियों को बहाल करके नई तैनाती भी दे दी गई हैं।
मंडी धनौरा थाना क्षेत्र के गांव बसी मुस्तकम से मंडी धनौरा पुलिस ने बाल कृष्ण को 22 दिसंबर 2018 को उसके घर से उठाया था। चोरी की कार चलाने के आरोप में पुलिस ने चार दिन तक थाने की हवालात में अवैध हिरासत में रखा था। 26 दिसंबर की सुबह हालत बिगड़ने पर पुलिस उसे लेकर अस्पताल पहुंची थी। बाद में बाल कृष्ण की मौत हो गई थी। उसकी मौत की सूचना मिलते ही परिजन और भीड़ बेकाबू हो गई थी। भीड़ ने सड़क जाम करने के साथ ही एसडीएम की गाड़ी में भी तोड़फोड़ की थी। बालकृष्ण के साले जयप्रकाश ने इंस्पेक्टर अरविंद मोहन शर्मा, एसआई मनोज उपाध्याय, प्रवीण कुमार, सिपाही विनीत चौधरी, जितेद्र बैसला, सतपाल सिंह, बुन्दन खां, और विवेक कुमार के साथ ही तीन अज्ञात होमगार्ड के खिलाफ बाल कृष्ण को अवैध हिरासत में रखने और उसकी हत्या करने के आरोप में एफआईआर दर्ज हुई थी। एसपी अमरोहा ने सभी आरोपी पुलिस कर्मियों को निलंबित कर दिया था। परिजनों का आरोप था कि धनौरा पुलिस ने बाल कृष्ण को छोड़ने की एवज में पांच लाख रुपये मांगे थे। एक लाख रुपये दे दिए गए थे। बाकी रकम वसूलने के लिए लगातार बाल कृष्ण को हवालात में पीटा जा रहा था।
अनुसूचित जाति से होने की वजह से बालकृष्ण की मौत पर अनुसूचित जाति आयोग और स्थानीय भाजपा विधायक राजीव तरारा ने भी काफी सक्रियता दिखाई थी। लेकिन मामला ठंडा होते ही इसे खामोशी से बंद कर दिया गया। खुलासा हुआ है कि पुलिस ने करीब एक महीना पहले इस बहुुचर्चित मामले में फाइनल रिपोर्ट लगाकर सभी आरोपी पुलिस कर्मियों को क्लीन चिट दे दी है। पुलिस अधिकारियों पर पहले से आरोप लग रहे थे कि मुकदमे में नामजद पुलिस वालों पर नरमी बरती जा रही है।
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बाल कृष्ण हत्याकांड में विवेचना के बाद फाइनल रिपोर्ट लगा दी गई है। हत्या और अवैध हिरासत के आरोप विवेचना में साबित नहीं हो सके हैं। इसलिए आरोपी पुलिस कर्मियों को बहाल कर नई तैनाती दी गई है। - मोनिका यादव, सीओ, मंडी धनौरा।
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मंडी धनौरा थाना क्षेत्र के गांव बसी मुस्तकम से मंडी धनौरा पुलिस ने बाल कृष्ण को 22 दिसंबर 2018 को उसके घर से उठाया था। चोरी की कार चलाने के आरोप में पुलिस ने चार दिन तक थाने की हवालात में अवैध हिरासत में रखा था। 26 दिसंबर की सुबह हालत बिगड़ने पर पुलिस उसे लेकर अस्पताल पहुंची थी। बाद में बाल कृष्ण की मौत हो गई थी। उसकी मौत की सूचना मिलते ही परिजन और भीड़ बेकाबू हो गई थी। भीड़ ने सड़क जाम करने के साथ ही एसडीएम की गाड़ी में भी तोड़फोड़ की थी। बालकृष्ण के साले जयप्रकाश ने इंस्पेक्टर अरविंद मोहन शर्मा, एसआई मनोज उपाध्याय, प्रवीण कुमार, सिपाही विनीत चौधरी, जितेद्र बैसला, सतपाल सिंह, बुन्दन खां, और विवेक कुमार के साथ ही तीन अज्ञात होमगार्ड के खिलाफ बाल कृष्ण को अवैध हिरासत में रखने और उसकी हत्या करने के आरोप में एफआईआर दर्ज हुई थी। एसपी अमरोहा ने सभी आरोपी पुलिस कर्मियों को निलंबित कर दिया था। परिजनों का आरोप था कि धनौरा पुलिस ने बाल कृष्ण को छोड़ने की एवज में पांच लाख रुपये मांगे थे। एक लाख रुपये दे दिए गए थे। बाकी रकम वसूलने के लिए लगातार बाल कृष्ण को हवालात में पीटा जा रहा था।
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अनुसूचित जाति से होने की वजह से बालकृष्ण की मौत पर अनुसूचित जाति आयोग और स्थानीय भाजपा विधायक राजीव तरारा ने भी काफी सक्रियता दिखाई थी। लेकिन मामला ठंडा होते ही इसे खामोशी से बंद कर दिया गया। खुलासा हुआ है कि पुलिस ने करीब एक महीना पहले इस बहुुचर्चित मामले में फाइनल रिपोर्ट लगाकर सभी आरोपी पुलिस कर्मियों को क्लीन चिट दे दी है। पुलिस अधिकारियों पर पहले से आरोप लग रहे थे कि मुकदमे में नामजद पुलिस वालों पर नरमी बरती जा रही है।
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बाल कृष्ण हत्याकांड में विवेचना के बाद फाइनल रिपोर्ट लगा दी गई है। हत्या और अवैध हिरासत के आरोप विवेचना में साबित नहीं हो सके हैं। इसलिए आरोपी पुलिस कर्मियों को बहाल कर नई तैनाती दी गई है। - मोनिका यादव, सीओ, मंडी धनौरा।