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Moradabad News: दो साल से 634 छोटे कारोबारियों से किराया नहीं ले रहा निगम, हटाने की आशंका

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 09 Jun 2025 02:03 AM IST
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Corporation has not been collecting rent from 634 small businessmen for two years, fear of removal
मुरादाबाद। शहर की व्यस्त सड़कों और बाजारों में दशकों से अपने खोखे रखकर परिवार चला रहे 634 छोटे कारोबारियों से नगर निगम दो साल से किराया नहीं ले रहा है। कारोबारी किराया जमा करने के लिए निगम कार्यालय के चक्कर भी काट रहे हैं, लेकिन फिर भी किराया नहीं लिया जा रहा है। ऐसे में कारोबारियों को आशंका है कि निगम उनकी दुकानों को हटाने की तैयारी कर रहा है।
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व्यापारी सुरक्षा फोरम के पदाधिकारियों का कहना है कि यह कारोबारी 30-35 साल से दुकानें संचालित कर रहे हैं। सभी दुकानदार अपना किराया भी लगातार देते आ रहे हैं, लेकिन निगम ने अब इन सभी दुकानों से किराया लेना बंद कर दिया है। अधिकारी किराया न वसूलने का कारण भी नहीं बता रहे हैं। ऐसे में निगम की क्या योजना है, यह समझ से परे है। वहीं कारोबारियों के मन में दुकान हटाए जाने का डर है।
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दूसरी ओर बुध बाजार में कई दुकानदारों को मौखिक रूप से दुकान हटाए जाने के लिए कह दिया गया है। दुकानदारों का दावा है कि अपर नगर आयुक्त ने तीन दिनों की मोहलत देकर दुकान खाली करने के लिए कहा है। कारोबारियों का कहना है कि वह लंबे समय से दुकानों का किराया देते आ रहे हैं, फिर भी उन्हें दुकानें खाली करने के लिए कहा जा रहा है।
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यहां संचालित होते हैं खोखे
शहर में 634 खोखे अलग-अलग स्थानों पर संचालित होते हैं। यह खोखे प्रभात मार्केट, टाउनहाल, बुध बाजार, गुरहट्टी, जेल रोड, स्टेशन रोड, डबल फाटक आदि स्थानों पर हैं। इन सभी खोखा संचालकों से किराया वसूलना बंद किया जा चुका है।

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कारोबारियों ने बयां किया दर्द
- मेरी बुध बाजार में घड़ी की दुकान है। दशकों से निगम को किराया देता आ रहा हूं। अब निगम ने दुकान खाली करने के लिए कह दिया है। यह बिल्कुल समझ से परे है। अधिकारी ठीक तरीके से कारण तक बताने को तैयार नहीं हैं। - योगेश आनंद
- मेरी चश्मे की दुकान है। मेरी दुकान की रजिस्ट्री भी है। दुकान खाली करने के लिए तीन दिन का समय दिया गया है। कारण स्पष्ट नहीं किया गया है। अपने वजूद की लड़ाई लड़ेंगे। - नीरज ग्रोवर
- दुकान से पूरे परिवार का खर्च चलता है। मेरा परिवार इसी दुकान पर निर्भर है। दुकानें खाली कर देंगे तो हमारा परिवार सड़कों पर आ जाएगा। - संदीप आहूजा
- निगम ने जब किराया वसूलना बंद किया था तब से ही मन में शंका पैदा हो गई थी। अब जब दुकान खाली करने के लिए कहा गया है तो पूरा माजरा समझ आ गया है। हम दशकों से दुकान का किराया देते आ रहे हैं। यह हमारे नाम आवंटित है। - राहुल आहूजा
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- एक खोखा केवल एक दुकान नहीं होती, बल्कि एक परिवार का आर्थिक ढांचा होता है। इनमें से अधिकतर व्यापारी छोटे स्तर के हैं, जिनकी कमाई से ही उनके बच्चों की पढ़ाई, घर का खर्च, और चिकित्सा जरूरतें पूरी होती हैं। यदि इन्हें बिना वैकल्पिक रोजगार के हटाया जाता है, तो यह सिर्फ अतिक्रमण हटाना नहीं, बल्कि 634 परिवारों को असुरक्षित कर देना है। - विपिन गुप्ता, प्रदेश महामंत्री, संयुक्त व्यापार मंडल



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सुप्रीम कोर्ट और शासन का आदेश है कि नाले या सड़क पर कोई दुकान न हो। इसी का पालन किया जा रहा है। नाले या सड़क पर जिनकी दुकानें हैं, उन्हें वेंडिंग जोन में शिफ्ट होने के लिए कहा गया है। वेंडिंग जोन में बिजली, पानी, पार्किंग और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं दी गई हैं। - अजीत कुमार, अपर नगर आयुक्त
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