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निजामुद्दीन जलसे का कोई दोषी बख्शा न जाए : डा. हसन
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मुरादाबाद। सांसद डा. एसटी हसन ने दिल्ली में निजामुद्दीन जलसे पर कार्रवाई की मांग की है। डा. हसन ने कहा कि भारत में सभी धर्मों के लोग प्यार मोहब्बत से रहते हैं। धार्मिक कार्यक्रमों में जमावड़े लगते हैं। सिर्फ निजामुद्दीन में जमावड़ा नहीं हुआ है। हरिद्वार और कई गुरुद्वारों में लोग फंसे हैं।
डा. हसन ने कहा कि निजामुद्दीन जलसे में बाहर के देशों के लोग आए थे। जहां तक जानकारी मिल रही है कि आयोजकों ने स्थानीय प्रशासन को सूचना दी थी। प्रशासन खामोश रहा। तेलंगाना में जब छह लोगों की मौत हो गई, तब प्रशासन सक्रिय हुआ। उन्होंने कहा कि यदि अयोजकों ने सूचना दी थी कि प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही होनी चाहिए। आयोजकों ने सूचना नहीं दी थी तो उनके खिलाफ भी सख्त कार्यवाही होनी चाहिए। सांसद ने कहा कि कोरोना से डरने की जरूरत है। ईरान और ईटली ने इसे गंभीरता से नहीं लिया और वहां के हालात बेहद खराब है। डा. हसन ने सरकार के लॉकडाउन की पहल की सराहना की। कहा कि लॉकडाउन की घोषणा जनता कर्फ्यू के दिन ही हो जानी चाहिए थी, ताकि लोगों को तीन दिन का समय मिल जाता है। अब लोगों की रोजी के साथ रोटी के संकट हो गया है। लोग लॉकडाउन तोड़कर रोटी की तलाश में घरों से निकल रहे हैं।
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डा. हसन ने कहा कि निजामुद्दीन जलसे में बाहर के देशों के लोग आए थे। जहां तक जानकारी मिल रही है कि आयोजकों ने स्थानीय प्रशासन को सूचना दी थी। प्रशासन खामोश रहा। तेलंगाना में जब छह लोगों की मौत हो गई, तब प्रशासन सक्रिय हुआ। उन्होंने कहा कि यदि अयोजकों ने सूचना दी थी कि प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही होनी चाहिए। आयोजकों ने सूचना नहीं दी थी तो उनके खिलाफ भी सख्त कार्यवाही होनी चाहिए। सांसद ने कहा कि कोरोना से डरने की जरूरत है। ईरान और ईटली ने इसे गंभीरता से नहीं लिया और वहां के हालात बेहद खराब है। डा. हसन ने सरकार के लॉकडाउन की पहल की सराहना की। कहा कि लॉकडाउन की घोषणा जनता कर्फ्यू के दिन ही हो जानी चाहिए थी, ताकि लोगों को तीन दिन का समय मिल जाता है। अब लोगों की रोजी के साथ रोटी के संकट हो गया है। लोग लॉकडाउन तोड़कर रोटी की तलाश में घरों से निकल रहे हैं।
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