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चार अधिकारियों की कमेटी करेगी विधायक के आरोपों की जांच
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मुरादाबाद। नगर निगम के जलकल विभाग पर दो साल पहले करीब 16 करोड़ रुपये का भुगतान बिना कार्य कराए चहेते ठेकेदारों को कर देने के मामले के आरोप की जांच को चार सदस्यीय कमेटी गठित कर दी गई है। यह आरोप शहर विधायक रितेश गुप्ता ने तीन दिन पहले लगाए थे। कमेटी के अध्यक्ष अपर नगर आयुक्त अनिल कुमार ने नगर आयुक्त का आदेश मिलने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी है।
शहर विधायक रितेश गुप्ता ने तीन दिन पहले मुख्यमंत्री, नगर विकास मंत्री और मंडलायुक्त को एक पत्र लिखा था। जिसमें उन्होेंने कहा था कि 27 अप्रैल 2018 को नगर निगम के विभिन्न वार्डों में जलापूर्ति के लिए ई-टेंडरिंग के माध्यम से निविदा निकाली गईं थीं। लेकिन धरातल पर यह कार्य नहीं किए गए। उसका भुगतान कर दिया गया। वर्ष 2019-20 में 16 करोड़ रुपये के कार्य जलकल विभाग के द्वारा बिना टेंडर की प्रक्रिया को अपनाए कोटेशन के आधार पर अधिकारियों ने भुगतान चहेते ठेकेदारों को कर दिया। कुछ स्थानों पर एक ही कार्य को फर्जी तरीके से नाम बदल कर तथा उन्हें अन्य मदों से पूर्ण दिखाकर दो से तीन बार तक भुगतान करने का भी आरोप लगाया था। शहर विधायक के इस पत्र के बाद से मंडलायुक्त ने नगर आयुक्त को मामले की जांच कर रिपोर्ट मांगी है।
मामले के संज्ञान में आने के बाद नगर आयुक्त संजय चौहान ने जांच के आदेश दे दिए हैं। इसके लिए उन्होंने सोमवार चार अधिकारियों की कमेटी का गठन भी किया है। अपर नगर आयुक्त अनिल सिंह कमेटी के अध्यक्ष होंगे। कमेटी के लोगों से जांच कर जल्द रिपोर्ट देने को कहा गया है। अपर नगर आयुक्त अनिल कुमार सिंह ने बताया कि नगर आयुक्त के आदेश पर मामले की जांच शुरू कर दी गई है। पूरे मामले की गहनता से तथ्यात्मक जांच की जाएगी। जांच पूर्ण कर शीघ्र ही रिपोर्ट प्रेषित की जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर उच्चाधिकारियों के जो आदेश होंगे उसके मुताबिक कार्रवाई की जाएगी।
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शहर विधायक का पत्र अभी मुझे प्राप्त नहीं हो सका है। प्रकरण 2018-19 का होने और 16 करोड़ रुपये का मामला होने से ऐसा प्रतीत हो रहा है कि यह वही मामला है जो मेरे ज्वाइन करने के समय भी सामने आया था। तब मैंने आठ सदस्यीय कमेटी गठित का गठन कर पूरे मामले की जांच कराई थी। कमेटी ने 682 पत्रावलियों की जांच की थी। 405 पत्रावलियां ऐसी थीं जिसमें कार्य ठीक पाए गए थे। 125 में कार्य आरंभ नहीं हुए थे। 97 कार्य ऐसे थे जिनके कार्य पूर्व में पूर्ण हो चुके थे। जलकल विभाग का कहना था कि वह कटपेस्ट के कारण रिपीट हो गए। लिहाजा आरंभ न होने वाले 125 कार्य व गलती से रिपीट 97 कार्य निरस्त कर दिए गए थे। इनका कोई भुगतान नहीं किया गया था।
संजय चौहान, नगर आयुक्त
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शहर विधायक रितेश गुप्ता ने तीन दिन पहले मुख्यमंत्री, नगर विकास मंत्री और मंडलायुक्त को एक पत्र लिखा था। जिसमें उन्होेंने कहा था कि 27 अप्रैल 2018 को नगर निगम के विभिन्न वार्डों में जलापूर्ति के लिए ई-टेंडरिंग के माध्यम से निविदा निकाली गईं थीं। लेकिन धरातल पर यह कार्य नहीं किए गए। उसका भुगतान कर दिया गया। वर्ष 2019-20 में 16 करोड़ रुपये के कार्य जलकल विभाग के द्वारा बिना टेंडर की प्रक्रिया को अपनाए कोटेशन के आधार पर अधिकारियों ने भुगतान चहेते ठेकेदारों को कर दिया। कुछ स्थानों पर एक ही कार्य को फर्जी तरीके से नाम बदल कर तथा उन्हें अन्य मदों से पूर्ण दिखाकर दो से तीन बार तक भुगतान करने का भी आरोप लगाया था। शहर विधायक के इस पत्र के बाद से मंडलायुक्त ने नगर आयुक्त को मामले की जांच कर रिपोर्ट मांगी है।
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मामले के संज्ञान में आने के बाद नगर आयुक्त संजय चौहान ने जांच के आदेश दे दिए हैं। इसके लिए उन्होंने सोमवार चार अधिकारियों की कमेटी का गठन भी किया है। अपर नगर आयुक्त अनिल सिंह कमेटी के अध्यक्ष होंगे। कमेटी के लोगों से जांच कर जल्द रिपोर्ट देने को कहा गया है। अपर नगर आयुक्त अनिल कुमार सिंह ने बताया कि नगर आयुक्त के आदेश पर मामले की जांच शुरू कर दी गई है। पूरे मामले की गहनता से तथ्यात्मक जांच की जाएगी। जांच पूर्ण कर शीघ्र ही रिपोर्ट प्रेषित की जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर उच्चाधिकारियों के जो आदेश होंगे उसके मुताबिक कार्रवाई की जाएगी।
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शहर विधायक का पत्र अभी मुझे प्राप्त नहीं हो सका है। प्रकरण 2018-19 का होने और 16 करोड़ रुपये का मामला होने से ऐसा प्रतीत हो रहा है कि यह वही मामला है जो मेरे ज्वाइन करने के समय भी सामने आया था। तब मैंने आठ सदस्यीय कमेटी गठित का गठन कर पूरे मामले की जांच कराई थी। कमेटी ने 682 पत्रावलियों की जांच की थी। 405 पत्रावलियां ऐसी थीं जिसमें कार्य ठीक पाए गए थे। 125 में कार्य आरंभ नहीं हुए थे। 97 कार्य ऐसे थे जिनके कार्य पूर्व में पूर्ण हो चुके थे। जलकल विभाग का कहना था कि वह कटपेस्ट के कारण रिपीट हो गए। लिहाजा आरंभ न होने वाले 125 कार्य व गलती से रिपीट 97 कार्य निरस्त कर दिए गए थे। इनका कोई भुगतान नहीं किया गया था।
संजय चौहान, नगर आयुक्त