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देववाणी बोलने वाले विद्यार्थियों के भविष्य को मजबूत कर रही कोडिंग
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काशीरानगर सेंट मिराज एकडेमी में कंप्यूटर पर वीडियो के माध्यम से पढ़ाई करते बच्चे।
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मुरादाबाद। सेंटमीरा अकादमी के विद्यार्थी देववाणी संस्कृत बोलने के साथ कोडिंग सीखकर अपना भविष्य मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं। स्कूल प्रबंधन विद्यार्थियों को आठ पीरियड से अलग एक जीरो पीरियड संचालित कर संस्कृत बोलने और कोडिंग सीखने का मौका दे रहा है। प्रबंधक अक्षरी प्रकाश के मुताबिक कोरोना संक्रमण के दो वर्षों ने उन्हें शिक्षण पद्धति में बदलाव करने के लिए सोचने का अवसर दिया था और इसी वर्ष से उन्होंने इस पर कार्य शुरू कर दिया है।
मानसरोवर कालोनी और कांशीराम कालोनी में स्थित सेंट मीरा अकादमी की शाखाओं में कक्षा प्री नर्सरी से 12वीं कक्षा तक की पढ़ाई करवाई जा रही है। अक्षरी प्रकाश ने बताया कि कोरोना संक्रमण काल पहला ऐसा मौका था, जहां पर शिक्षा के क्षेत्र में तकनीक का इतना अधिक इस्तेेमाल किया गया है। शिक्षा का तारतम्य बनाए रखने के लिए आनलाइन शिक्षा का विकल्प तलाशा गया, जिसमें विभिन्न एप्स और वेबसाइट के माध्यम से विद्यार्थियों को पढ़ाई से जोड़ा गया था। शिक्षा के बहुत से एप्लीकेशंस देखकर उनके मन में विद्यार्थियों को कोडिंग सिखाने का विचार आया, ताकि वह इंटरमीडिएट करने के साथ विद्यार्थी एप्लीकेशंस डेवलप करने की समझ विकसित कर सकें। उनका कहना है कि कंप्यूटर, आईटी और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस वर्तमान समय की जरूरत बन चुके हैं। आज सामान्य जीवन में घर के भीतर हो या बाहर, हर जगह इनका प्रयोग देखा जा सकता है। छोटी कक्षाओं से ही इन सब चीजों की पढ़ाई और समझ विकसित करना विद्यार्थियों के लिए लाभकारी होगा।
सामान्य तौर पर जहां विद्यालय संचालन का समय साढ़े पांच घंटे का होता है तो वहीं, उनके विद्यालय के संचालन का समय साढ़े छह से सात घंटे का है। अतिरिक्त समय में अलग से जीरो पीरियड का संचालन कर संस्कृत बोलना, कोडिंग सीखना, खेल की गतिविधियों में भाग लेने को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
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गायत्री मंत्र और मंत्रोच्चारण से शुरू होती है पढ़ाई
विद्यालय में प्री नर्सरी के विद्यार्थियों को सबसे पहले गायत्री मंत्र का उच्चारण और उसका महत्व समझाया जाता है। इसके अलावा कुछ अन्य मंत्रों का उच्चारण भी करवाया जाता है। शिक्षिकाओं का कहना है कि आधुनिक समय में पढ़ाई और नौकरी के लिए अंग्रेजी का बोलबाला है और हिंदी सामान्य तौर पर सभी घरों में बोली जाती है, लेकिन संस्कृत पूरी तरह उपेक्षित है, जबकि यह हमारी संस्कृति का आधार है। इसलिए आने वाली पीढ़ी के मन में अपनी संस्कृति को रचाए-बसाए रखने के लिए यह प्रयास किया गया है, जहां पर विद्यार्थी सामान्य बातचीत भी संस्कृत के वाक्यों में करते हैं।
यह बोले विद्यार्थी...
कोरोना काल में विद्यार्थियों ने एनीमेटेड कंटेंट देखकर भी काफी कुछ सीखा है। यह कोडिंग द्वारा संभव है। ऐसे में यह समझना हमारे लिए बहुत जरूरी था। अब प्रशिक्षण से काफी जानकारी मिल रही हैं।
ध्रुव गौड़, छात्र।
पहले हम कंप्यूटर एक विषय के तौर पर ही पढ़ते थे, लेकिन कोडिंग सीखकर सॉफ्टवेयर बनाने की भी जानकारी दी जा रही है। वर्तमान समय में नई-नई तकनीक ईजाद हो रही हैं। ऐसे में कोडिंग सीखना सभी के लिए जरूरी है।
अमन कुमार, छात्र।
कोडिंग के माध्यम से मैंने कई तरह की भाषा जैसे जावा, सी प्लस, पाइथन आदि को सीखीं हैं। प्रोग्रामिंग भविष्य के लिए जरूरी है। इससे कई तरह के एप्स बनाना मैं सीख जाऊंगी।
नेहा, छात्रा।
मैं एलकेजी में पढ़ता हूं। मैंने रामायण की कहानी को सीखा है। मेरी मैम ने मुझे स्कूल में सिखाया है और मैंने जब मम्मी को बताया तो वह बहुत खुश हुईं थीं। मेरी मम्मी ने मुझे बहुत प्यार किया था।
अनंत अवस्थी, छात्र।
यह बोले अभिभावक...
घर पर रहने के दौरान मेरे बेटे की शिक्षा अच्छी नहीं हो पाई थी, लेकिन स्कूल खुलने के बाद उसे शिक्षा के साथ संस्कारों का भी पाठ पढ़ाया जा रहा है, जिससे उसके व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहा है। हमारे ही नहीं, बल्कि कालोनी में रहने वाले बड़े लोगों के पैर छूकर नमस्ते करता है तो बहुत अच्छा लगता है।
सुधीर अवस्थी, अभिभावक।
मेरी बेटी और बेटा स्कूल खुलने के बाद खेल गतिविधियों में बढ़चढ़ कर प्रतिभाग कर रहे हैं और खुश रहते हैं, जबकि कोरोना संक्रमण काल में ऐसा नहीं था। मेरी बेटी कक्षा चार में है और वह कोडिंग सीख रही है। अब तक वह कक्षा में कंप्यूटर खोलना, बंद करना ही सीखती थी।
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मानसरोवर कालोनी और कांशीराम कालोनी में स्थित सेंट मीरा अकादमी की शाखाओं में कक्षा प्री नर्सरी से 12वीं कक्षा तक की पढ़ाई करवाई जा रही है। अक्षरी प्रकाश ने बताया कि कोरोना संक्रमण काल पहला ऐसा मौका था, जहां पर शिक्षा के क्षेत्र में तकनीक का इतना अधिक इस्तेेमाल किया गया है। शिक्षा का तारतम्य बनाए रखने के लिए आनलाइन शिक्षा का विकल्प तलाशा गया, जिसमें विभिन्न एप्स और वेबसाइट के माध्यम से विद्यार्थियों को पढ़ाई से जोड़ा गया था। शिक्षा के बहुत से एप्लीकेशंस देखकर उनके मन में विद्यार्थियों को कोडिंग सिखाने का विचार आया, ताकि वह इंटरमीडिएट करने के साथ विद्यार्थी एप्लीकेशंस डेवलप करने की समझ विकसित कर सकें। उनका कहना है कि कंप्यूटर, आईटी और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस वर्तमान समय की जरूरत बन चुके हैं। आज सामान्य जीवन में घर के भीतर हो या बाहर, हर जगह इनका प्रयोग देखा जा सकता है। छोटी कक्षाओं से ही इन सब चीजों की पढ़ाई और समझ विकसित करना विद्यार्थियों के लिए लाभकारी होगा।
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सामान्य तौर पर जहां विद्यालय संचालन का समय साढ़े पांच घंटे का होता है तो वहीं, उनके विद्यालय के संचालन का समय साढ़े छह से सात घंटे का है। अतिरिक्त समय में अलग से जीरो पीरियड का संचालन कर संस्कृत बोलना, कोडिंग सीखना, खेल की गतिविधियों में भाग लेने को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
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गायत्री मंत्र और मंत्रोच्चारण से शुरू होती है पढ़ाई
विद्यालय में प्री नर्सरी के विद्यार्थियों को सबसे पहले गायत्री मंत्र का उच्चारण और उसका महत्व समझाया जाता है। इसके अलावा कुछ अन्य मंत्रों का उच्चारण भी करवाया जाता है। शिक्षिकाओं का कहना है कि आधुनिक समय में पढ़ाई और नौकरी के लिए अंग्रेजी का बोलबाला है और हिंदी सामान्य तौर पर सभी घरों में बोली जाती है, लेकिन संस्कृत पूरी तरह उपेक्षित है, जबकि यह हमारी संस्कृति का आधार है। इसलिए आने वाली पीढ़ी के मन में अपनी संस्कृति को रचाए-बसाए रखने के लिए यह प्रयास किया गया है, जहां पर विद्यार्थी सामान्य बातचीत भी संस्कृत के वाक्यों में करते हैं।
यह बोले विद्यार्थी...
कोरोना काल में विद्यार्थियों ने एनीमेटेड कंटेंट देखकर भी काफी कुछ सीखा है। यह कोडिंग द्वारा संभव है। ऐसे में यह समझना हमारे लिए बहुत जरूरी था। अब प्रशिक्षण से काफी जानकारी मिल रही हैं।
ध्रुव गौड़, छात्र।
पहले हम कंप्यूटर एक विषय के तौर पर ही पढ़ते थे, लेकिन कोडिंग सीखकर सॉफ्टवेयर बनाने की भी जानकारी दी जा रही है। वर्तमान समय में नई-नई तकनीक ईजाद हो रही हैं। ऐसे में कोडिंग सीखना सभी के लिए जरूरी है।
अमन कुमार, छात्र।
कोडिंग के माध्यम से मैंने कई तरह की भाषा जैसे जावा, सी प्लस, पाइथन आदि को सीखीं हैं। प्रोग्रामिंग भविष्य के लिए जरूरी है। इससे कई तरह के एप्स बनाना मैं सीख जाऊंगी।
नेहा, छात्रा।
मैं एलकेजी में पढ़ता हूं। मैंने रामायण की कहानी को सीखा है। मेरी मैम ने मुझे स्कूल में सिखाया है और मैंने जब मम्मी को बताया तो वह बहुत खुश हुईं थीं। मेरी मम्मी ने मुझे बहुत प्यार किया था।
अनंत अवस्थी, छात्र।
यह बोले अभिभावक...
घर पर रहने के दौरान मेरे बेटे की शिक्षा अच्छी नहीं हो पाई थी, लेकिन स्कूल खुलने के बाद उसे शिक्षा के साथ संस्कारों का भी पाठ पढ़ाया जा रहा है, जिससे उसके व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहा है। हमारे ही नहीं, बल्कि कालोनी में रहने वाले बड़े लोगों के पैर छूकर नमस्ते करता है तो बहुत अच्छा लगता है।
सुधीर अवस्थी, अभिभावक।
मेरी बेटी और बेटा स्कूल खुलने के बाद खेल गतिविधियों में बढ़चढ़ कर प्रतिभाग कर रहे हैं और खुश रहते हैं, जबकि कोरोना संक्रमण काल में ऐसा नहीं था। मेरी बेटी कक्षा चार में है और वह कोडिंग सीख रही है। अब तक वह कक्षा में कंप्यूटर खोलना, बंद करना ही सीखती थी।