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निकाय चुनाव की गर्मी में ‘झुलस’ रही पढ़ाई

Sun, 12 Nov 2017 01:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Sun, 12 Nov 2017 01:09 AM IST
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chunav ki garmi me jhulas rahi padhai
book - फोटो : अमर उजाला
 स्थानीय निकाय चुनावों की स्कूलों में भी जमकर चर्चा हो रही है। शुक्रवार से ड्यटी बंटना शुरू होने के बाद शिक्षक पल-पल अपने नाम की जानकारी ले रहे हैं। उनका कहना है कि दिसंबर अंत तक उन पर पाठ्यक्रम को पूरा करने का दबाव बढ़ गया है।
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जिले में तीसरे चरण में 29 नवंबर को निकाय चुनाव होने हैं। इसके लिए 13 से 15 नवंबर तक राजकीय पालीटेक्निक में प्रथम प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके बाद तीन दिन के लिए चुनाव में ड्यूटी रहेगी। शुक्रवार से मतदान कर्मियों के रूप में शामिल किए गए शिक्षकों की ड्यूटी को भेजा जाने लगा है।
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ऐसे में जिन शिक्षकों की ड्यूटी आ गई है, उन्हें बोर्ड परीक्षाओं के हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के पाठ्यक्रम को समय से पूरा करने की चिंता बढ़ गई है।

देर से शुरू हुआ था सत्र
माध्यमिक शिक्षा परिषद का नया शैक्षिक सत्र 2017-18 जुलाई माह में शुरू हुआ था। इस बार हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की वार्षिक परीक्षा छह फरवरी से शुरू हो रही हैं। वहीं लगभग एक जनवरी से प्रैक्टीकल होने की संभावना है।
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शिक्षकों का कहना है कि परीक्षा से 15 दिन पहले उन्हें पाठ्यक्रम को पूरा करना होता है, ताकि बाद के 15 दिन छात्र सिर्फ पढ़ाई को याद करने में दे सकें। ऐसे में उनके पास पाठ्यक्रम को पूरा करने के लिए दिसंबर अंत तक का समय बचा है।

अतिरिक्त कक्षाओं पर जोर
निकाय चुनाव में ड्यूटी से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने की पूरी संभावना है, लेकिन इससे उनका नुकसान न हो, इसके लिए शिक्षक अपने स्तर से अतिरिक्त कक्षा संचालित करने की योजना बना रहे हैं। साथ ही वह प्रैक्टीकल के समय भी बच्चों के लिए उपलब्ध रहने की भी बात कह रहे हैं।


चुनाव ड्यूटी कटती नहीं है, इसलिए इसे ड्यूटी की तरह ही लेना शुरू कर दिया है। यह तो पूरा सत्र चुनाव में ही बीत गया। पहले विधानसभा और अब स्थानीय निकाय चुनाव से सत्र गड़बड़ हुआ है। प्राचार्यों पर अतिरिक्त कक्षा संचालित करवाने की जिम्मेदारी है। अगला सत्र ही नियमित हो पाएगा।
डॉ. सुनीत गिरि, मंडलीय अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (शर्मा गुट)।

15 जनवरी को प्रैक्टीकल होने के बाद पाठ्यक्रम के अभ्यास का समय ही बच पाएगा। इसलिए पाठ्क्रम तो दिसंबर अंत तक पूरा करने की समस्या है। कालेजों में अब चुनाव, प्रैक्टीकल और परीक्षा की ही चर्चा हो रही है।



इससे न सिर्फ पाठ्यक्रम प्रभावित होगा, बल्कि परीक्षा परिणाम पर भी असर आएगा। यदि शिक्षकों की चुनावी ड्यूटी लगानी है तो सरकार को सभी तरह के चुनाव मई और जून में ही कराने चाहिए।
विमलेंद्र शर्मा, मंडलीय अध्यक्ष, उप्र माध्यमिक शिक्षक संघ (चेतनारायण गुट)।
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