Chhath Puja 2023: कल से तीन दिन तक पीतल नगरी में रहेगी सूर्य उपासना की धूम, पूजा सामग्री की दुकानें सजीं
मुरादाबाद में छठ पूजा की तैयारी शुरू हो गई है। नगर निगम ने घाटों की सफाई करवा दी है। बाजारों में छठी के व्रत में इस्तेमाल होने वाले सामान बाजार में जमकर बिकने लगे हैं।
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मुरादाबाद में छठ महापर्व की तैयारियां शुरू हो गई हैं। शुक्रवार से चार दिन तक छठ पर्व के व्रत पूजा के तहत बिहार की लोक संस्कृति की रौनक छाएगी। रामगंगा विहार, बुद्धि विहार और लाइनपार क्षेत्र में पारंपरिक तरीके से सूर्य भगवान की आराधना की जाएगी। इसके लिए घाट बनाए जा रहे हैं। वहीं बाजार में भी व्रत के सामान की दुकानें सज गई हैं।
पूर्वांचलजन कल्याण संस्था की ओर से रामगंगा किनारे सीएल गुप्ता नेत्र संस्थान के पास छठ पर्व मनाया जाएगा। सचिव अशोक कुमार चतुर्वेदी ने बताया कि नगर निगम के सहयोग से बुधवार को घाट पर सफाई व्यवस्था में सहयोग किया गया। नगरायुक्त संजय चौहान ने कर्मचारियों के साथ घाट का निरीक्षण किया गया। उन्होंने भव्य आयोजन के लिए सभी व्यवस्थाएं पूर्ण करवाने का आश्वासन दिया।
छठी के व्रत में इस्तेमाल होने वाली बांस की टोकरी कंजरी सराय में दुकान पर मिल रही है। इस दौरान संरक्षक डॉ. अतुल नाथ, जटाशंकर द्विवेदी, अध्यक्ष नागेंद्र कुमार शर्मा, उपाध्यक्ष सदानंद पांडेय, संस्थापक सुधीर कुमार मिश्रा, आचार्य कामेश्वर मिश्रा, विमलेश पांडेय, लक्ष्मी भूषण मिश्रा आदि मौजूद रहे।
पूर्वांचलवासी संस्था के महासचिव अमित दुबे ने बताया कि बुधवार को मुख्य रूप से घाटों की साफ सफाई शुरू हो गई है। बुद्धि विहार में छठी मैया पूजा पार्क में भूपेश सिंह ओर अमन सिंह की देखरेख में घटों की साफ-सफाई की गई। लाइनपार आदर्श नगर के पास छठ घाट की तैयारी अंकित सिंह एवं डी वी सिंह द्वारा की गई।
कपूर कंपनी होलिका मंदिर के पास भी छठ पूजा की तैयारी विशाल सिंह गोलू, दिशांत शुक्ला की देखरेख में हुई। रेलवे हरथला कॉलोनी में आरपीएफ ग्राउंड में अमित दुबे द्वारा छठ घाट की तैयारी करवाई गई। इस दौरान समिति के सदस्य अजित सिंह, परमजीत सिंह, भूपेश कुमार सिंह, धर्मवीर सिंह, अमन सिंह, मुनेंद्र गिरी, निशांत कुमार सिंह, राजेश कुमार सिंह, उमेश भारती, अंकित सिंह, शिवम सिंह आदि मौजूद रहे।
नहाय-खाय
17 नवंबर को नहाय खाय के साथ पर्व का शुभारंभ होगा। गंगाजल युक्त पानी से स्नान करके व्रत रखने वाली महिलाएं छठी मैया का पूजन करेंगी। इसमें नया अरवा चावल, चने की दाल और लौकी की सब्जी के साथ मूली फल का भोजन करेंगी। शाम को शुद्ध आटे की रोटी, चने की दाल मिलाकर लौकी की सब्जी का सेवन किया जाएगा और परिजनों को प्रसाद दिया जाएगा।
खरना
18 नवंबर को खरना किया जाएगा। इसमें महिलाएं पूरे दिन निर्जल व्रत रखती हैं। शाम को शुद्ध आटे की रोटी, साठी के चावल गाय के दूध में खीर बनाकर, नए गुड़ के साथ अपने घर पर छठी मैया को नमन कर भोग लगाती हैं। इस समय से ही भोजन में नमक का प्रयोग बंद कर दिया जाता है। इस प्रसाद को पूरे परिवार को वितरित किया जाता है।
पहला अर्घ्य
19 नवंबर को नहाने के बाद नए वस्त्र पहनकर शुद्ध आटे के ठेकुआ, नए गुड़ व चीनी के साथ देसी घी में खजूर बनाया जाता है। सभी प्रकार के फल, गन्ना का शाम के समय गंगाजल के साथ डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। महिलाएं नदी, तालाब में खड़ी होकर सूर्य को अर्घ्य देती हैं।
व्रत पारणा
निर्जल व्रत रखने वाली महिलाएं 20 नवंबर को सुबह उगते सूर्य को सभी प्रकार का फल, ठेकुआ, खजूर, गाय के दूध के साथ अर्घ्य देंगी। इसके बाद व्रत रखने वाली महिलाएं एक दूसरे को सिंदूर लगाकर कौंछ भरेंगी और आपस में गले मिलेंगी। बुजुर्गों के चरण छूकर आशीर्वाद लेंगी। इसके बाद प्रसाद का सेवन का व्रत पूर्ण करेंगी।