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‘मुरादाबाद के गांधी’ के पौत्र बने कोलकाता पुलिस कमिश्नर
ब्यूरो/अमर उजाला मुरादाबाद
Updated Sun, 31 Jan 2016 08:53 PM IST
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पूर्व सांसद और मुरादाबाद के गांधी कहे जाने वाले स्वर्गीय प्रो. रामसरन के पौत्र और चंदौसी के एसएम कालेज के प्रो. आनंद कुमार के प्रतिभाशाली पुत्र राजीव कुमार पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के पुलिस कमिश्नर बन गए हैं। मूल रूप से संभल जिले की चंदौसी जिले के निवासी राजीव कुमार को उनके बचपन के साथी आज भी उनके घरेलू नाम गुड्डू से ही जानते हैं। उनमें खुशी की लहर हैं।
सभी कहते हैं कि गुड्डू शुरू से ही अत्यंत प्रतिभाशाली रहे हैं। एसएम कालेज चंदौसी में समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. आनंद कुमार शहर के भागवतनगर में मुखर्जी बिल्डिंग में रहते थे। प्रो. आनंद कुमार के सबसे बड़े पुत्र राजीव कुमार ने पुलिस विभाग में रुचि दिखाई तो छोटे पुत्र शरद कुमार डाक्टर बनकर सूरत में चले गए व छोटी पुत्री डा. ऋचा गुप्ता अमेरिका चली गईं।
चंदौसी निवासी राजीव कुमार के मौसा राजील गोविल बताते हैं कि करीब 1973 में जब राजीव, शरद व ऋचा छोटे छोटे थे तो राजीव घर की फर्श पर ही चॉक से लिखकर गणित के सवाल लिखकर, उन्हें हल करके भाई बहन व मोहल्ले के बच्चों को बुलाकर समझाते रहते थे। राजीव की मां मुन्नी देवी ने बताया कि उनके पति प्रो. आनंद कुमार का स्वभाव था कि जब वह ट्रेन आदि से सफर करते थे तो भी अपने बच्चों को व सहयात्रियों को लगातार जो भी दिखाई देता था, उसकी जानकारी देते रहते थे।
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बच्चों की हर जिज्ञासा को समझाकर शांत करते थे। राजीव का जन्म ननिहाल अलीगढ़ जिले के अतरौली में हुआ था लेकिन अधिकांश समय चंदौसी में ही बीता। इंटरमीडिएट तक की शिक्षा एसएम कालेज चंदौसी से ली। इसके बाद आईआईटी रुड़की गए तो कंप्यूटर से इंजीनियरिंग में टॉप किया। एचसीएल नोएडा में भी कोर्स किया। इसी दौरान उनका आईपीएस में सेलेक्शन हो गया। पश्चिमी बंगाल कैडर मिल गया। आज वह कोलकाता के पुलिस कमिश्नर बन गए हैं।
जब छू लिए रिक्शाचालक के पैर
आईपीएस राजीव कुमार की सहजता व सरलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जब वह एसएम कालेज पढ़ाई के लिए जाते थे तो चंदौसी का ही एक रिक्शाचालक बाबू उन्हें कालेज तक छोड़ने व लेेने जाता था। वह आईपीएस बनने के बाद भी चंदौसी आए तो वही रिक्शाचालक उन्हें मिल गया तो उन्होंने तत्काल झुककर रिक्शाचालक के पैर छू लिए। यह देख रिक्शा चालक भी भावविभोर हो गया।
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सभी कहते हैं कि गुड्डू शुरू से ही अत्यंत प्रतिभाशाली रहे हैं। एसएम कालेज चंदौसी में समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. आनंद कुमार शहर के भागवतनगर में मुखर्जी बिल्डिंग में रहते थे। प्रो. आनंद कुमार के सबसे बड़े पुत्र राजीव कुमार ने पुलिस विभाग में रुचि दिखाई तो छोटे पुत्र शरद कुमार डाक्टर बनकर सूरत में चले गए व छोटी पुत्री डा. ऋचा गुप्ता अमेरिका चली गईं।
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चंदौसी निवासी राजीव कुमार के मौसा राजील गोविल बताते हैं कि करीब 1973 में जब राजीव, शरद व ऋचा छोटे छोटे थे तो राजीव घर की फर्श पर ही चॉक से लिखकर गणित के सवाल लिखकर, उन्हें हल करके भाई बहन व मोहल्ले के बच्चों को बुलाकर समझाते रहते थे। राजीव की मां मुन्नी देवी ने बताया कि उनके पति प्रो. आनंद कुमार का स्वभाव था कि जब वह ट्रेन आदि से सफर करते थे तो भी अपने बच्चों को व सहयात्रियों को लगातार जो भी दिखाई देता था, उसकी जानकारी देते रहते थे।
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बच्चों की हर जिज्ञासा को समझाकर शांत करते थे। राजीव का जन्म ननिहाल अलीगढ़ जिले के अतरौली में हुआ था लेकिन अधिकांश समय चंदौसी में ही बीता। इंटरमीडिएट तक की शिक्षा एसएम कालेज चंदौसी से ली। इसके बाद आईआईटी रुड़की गए तो कंप्यूटर से इंजीनियरिंग में टॉप किया। एचसीएल नोएडा में भी कोर्स किया। इसी दौरान उनका आईपीएस में सेलेक्शन हो गया। पश्चिमी बंगाल कैडर मिल गया। आज वह कोलकाता के पुलिस कमिश्नर बन गए हैं।
जब छू लिए रिक्शाचालक के पैर
आईपीएस राजीव कुमार की सहजता व सरलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जब वह एसएम कालेज पढ़ाई के लिए जाते थे तो चंदौसी का ही एक रिक्शाचालक बाबू उन्हें कालेज तक छोड़ने व लेेने जाता था। वह आईपीएस बनने के बाद भी चंदौसी आए तो वही रिक्शाचालक उन्हें मिल गया तो उन्होंने तत्काल झुककर रिक्शाचालक के पैर छू लिए। यह देख रिक्शा चालक भी भावविभोर हो गया।