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पैसेंजर ट्रेनों को देकर स्पेशल का नाम यात्रियों से ले रहे एक्सप्रेस जितना दाम

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 03 Feb 2022 01:51 AM IST
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By giving the name of the special to the passenger trains, the price of the express is taken from the passengers
मुरादाबाद। मेल एक्सप्रेस ट्रेनों से स्पेशल का टैग हटाने के बाद अब रेलवे पैसेंजर ट्रेनों को स्पेशल बनाकर चला रहा है। इन ट्रेनों में यात्रियों से एक्सप्रेस ट्रेन जितना किराया लिया जा रहा है। जबकि यात्रा में एक्सप्रेस की तुलना में लगभग दोगुना समय लग रहा है। इसके चलते रेलवे की इन पैसेंजर ट्रेनों को यात्रियों की अच्छी प्रतिक्रिया नहीं मिल पा रही है।
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वर्तमान में मुरादाबाद रेल मंडल में छह जोड़ी पैसेंजर ट्रेनें संचालित हो रही हैं। इन सभी में किराये की दर एक्सप्रेस ट्रेनों जितनी रखी गई है। दो फरवरी को सुचारु हुई गजरौला-अलीगढ़ पैसेंजर और चंदौसी-ऋषिकेश पैसेंजर में भी यह दरें लागू की गई है। उदाहरण के लिए दिल्ली-बरेली पैसेंजर में मुरादाबाद से बरेली तक का किराया 55 रुपये है। चंदौसी-ऋषिकेश पैसेंजर में मुरादाबाद से हरिद्वार तक का किराया 70 रुपये है। मुरादाबाद-गाजियाबाद पैसेंजर में मुरादाबाद से गाजियाबाद तक का किराया 65 रुपये है। गजरौला-अलीगढ़ पैसेंजर में मुरादाबाद से अलीगढ़ तक का किराया 65 रुपये है। मुरादाबाद-सहारनपुर पैसेंजर में मुरादाबाद से सहारनपुर तक का किराया 75 रुपये है। जबकि कोरोना काल से पहले इन ट्रेनों का किराया एक्सप्रेस ट्रेनों के किराये से आधा था। इसके अलावा नजदीकी स्टेशनों तक की यात्रा का शुल्क भी तीन गुना बढ़ा दिया गया है। यानी मुरादाबाद जंक्शन से हरथला, मछरिया, लोदीपुर या कटघर तक यात्रियों को तीस रुपये चुकाने पड़ रहे हैं, जबकि पहले ये किराया महज 10 रुपये था। हालांकि रेलवे ने यात्रियों की ओर से लगातार की जा रही मांग के बाद सभी पैसेंजर ट्रेनों में एमएसटी को मान्यता दी है। इसके बावजूद महंगे किराये के कारण यात्रियों की संख्या नहीं बढ़ रही है।
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दैनिक रेल यात्री संगठन ने भी इसे लेकर विरोध दर्ज कराया है। संगठन का कहना है कि पैसेंजर ट्रेनों के नाम पर यात्रियों को धोखा दिया जा रहा है। संगठन के अध्यक्ष सुधीर पाठक ने कहा कि संगठन इसे लेकर रेलवे प्रशासन को पत्र लिखेगा और पुराना किराया लागू करने की अपील करेगा। वहीं सीनियर डीसीएम सुधीर सिंह का कहना है कि ट्रेनों का किराया रेलवे बोर्ड स्तर से तय होता है। इस पर निर्णय मुख्यालय ही करेगा।
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