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Moradabad News: 28 साल के नगर निगम इतिहास में एक उप चुनाव भी
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मुरादाबाद। वर्ष 1994 से लेकर अब तक कुल छह बार चुनाव हुए, जिसमें एक बार उप चुनाव भी हुआ। यही नहीं इस नगर निगम में एक दंपती को ही दो बार महापौर चुने जाने का गौरव प्राप्त हो सका। शेष कोई भी दुबारा महापौर नहीं बन सका।
वर्ष 1994 में शहर को नगर निगम का दर्जा मिला। इससे पहले यह नगर पालिका का दर्जा था। नगर निगम का पहला चुनव वर्ष 1995 में हुआ। सपा के हुमायूं कदीर यहां के पहले चेयरमैन निर्वाचित हुए थे। वह 29 नवंबर 2000 तक यहां के मेयर रहे। वर्ष 2001 में दूसरा चुनाव हुआ। महिला के लिए मेयर का पद आरक्षित हो जाने के कारण भाजपा ने यहां बीना अग्रवाल को प्रत्याशी बनाया और वह मेयर निर्वाचित हुईं। 2006 में यह सीट फिर से अनारक्षित हो गई। इस चुनाव में सपा के डॉ. एसटी हसन मेयर चुने गए। वह वर्ष 2011 तक मेयर रहे। वर्ष 2012 में हुए चुनाव में भाजपा ने एक बार फिर बीना अग्रवाल को मैदान में उतारा और वह जीतीं। लेकिन वर्ष 2016 में बीमारी के चलते उनका निधन हो गया। जिसके बाद हुए उप चुनाव में भाजपा ने उनके पति विनोद अग्रवाल को मैदान में उतारा और वह जीते। वर्ष 2017 में निकाय के हुए आम चुनाव में भाजपा ने फिर विनोद अग्रवाल पर अपना विश्वास जताया। इस बार भी उन्होंने जीत दर्ज की और 2022 तक वह मेयर के पद पर रहे। इस तरह नगर निगम के इतिहास में अब तक हुए एक उप चुनाव समेत छह चुनावों में चार लोग ही मेयर की कुर्सी तक पहुंचे।
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वर्ष 1994 में शहर को नगर निगम का दर्जा मिला। इससे पहले यह नगर पालिका का दर्जा था। नगर निगम का पहला चुनव वर्ष 1995 में हुआ। सपा के हुमायूं कदीर यहां के पहले चेयरमैन निर्वाचित हुए थे। वह 29 नवंबर 2000 तक यहां के मेयर रहे। वर्ष 2001 में दूसरा चुनाव हुआ। महिला के लिए मेयर का पद आरक्षित हो जाने के कारण भाजपा ने यहां बीना अग्रवाल को प्रत्याशी बनाया और वह मेयर निर्वाचित हुईं। 2006 में यह सीट फिर से अनारक्षित हो गई। इस चुनाव में सपा के डॉ. एसटी हसन मेयर चुने गए। वह वर्ष 2011 तक मेयर रहे। वर्ष 2012 में हुए चुनाव में भाजपा ने एक बार फिर बीना अग्रवाल को मैदान में उतारा और वह जीतीं। लेकिन वर्ष 2016 में बीमारी के चलते उनका निधन हो गया। जिसके बाद हुए उप चुनाव में भाजपा ने उनके पति विनोद अग्रवाल को मैदान में उतारा और वह जीते। वर्ष 2017 में निकाय के हुए आम चुनाव में भाजपा ने फिर विनोद अग्रवाल पर अपना विश्वास जताया। इस बार भी उन्होंने जीत दर्ज की और 2022 तक वह मेयर के पद पर रहे। इस तरह नगर निगम के इतिहास में अब तक हुए एक उप चुनाव समेत छह चुनावों में चार लोग ही मेयर की कुर्सी तक पहुंचे।
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