UP Police: बीटेक-बीसीए डिग्रीधारी देंगे पुलिस को मजबूती, साइबर ठगों को 830 दरोगा देंगे मुंहतोड़ जवाब
मुरादाबाद पुलिस अकादमी और अन्य संस्थाओं से पास आउट होकर यूपी पुलिस को 2764 दरोगा मिले हैं। इनमें से अधिकांश फर्राटेदार अंग्रेजी बोलने के साथ ही तकनीकी तौर पर भी बेहद मजबूत हैं। बीटेक, बीसीए समेत अन्य डिग्री के साथ ही पोस्ट ग्रेजुएट हैं। इन सभी को आधुनिक अपराध से निपटने की विशेष ट्रेनिंग मिली है।
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ये नए दौर के सब इंस्पेक्टर हैं। फर्राटेदार अंग्रेजी बोलने के साथ ही ये तकनीकी तौर पर भी बेहद मजबूत हैं। बीटेक, बीसीए समेत अन्य डिग्री के साथ ही पोस्ट ग्रेजुएट की भरमार है। इतना ही नहीं 830 दरोगा ऐसे भी हैं जो पहले भी पुलिस विभाग में सिपाही के पद पर तैनात रहते हुए सेवाएं दे चुके हैं। इन्होंने नौकरी के दौरान अपनी तैयारी जारी रखी और कंधों पर टू स्टार हासिल किया।
पुलिस ट्रेनिंग स्कूल (पीटीएस) से 889 महिला दरोगा पासआउट हुई हैं। इनमें 269 दरोगा पहले भी पुलिस विभाग में सिपाही के पद पर तैनात थीं। डॉ. बीआर आंबेडकर पुलिस अकादमी से 749 प्रशिक्षु दरोगा पासआउट हुए। इनमें 224 दरोगा भी पहले सिपाही रह चुके हैं।
इसी तरह पीटीसी से पासआउट होने वाले 1126 दरोगाओं में पहले 337 सिपाही रह चुके हैं। सिपाही बनने के लिए उन्होंने छह माह का प्रशिक्षण किया था। जिसमें इन्होंने आउटडोर और इनडोर में पुलिस विभाग की बारीकियां सीखीं थीं।
पासआउट होने के बाद सिपाही बनीं और अलग-अलग जनपदों में पोस्टिंग के दौरान भी पुलिसिंग को नजदीक से देखा था। सिपाही बनने के अनुभव का इन्हें दरोगा के प्रशिक्षण में लाभ मिला। आईपीसी, सीआरपीसी से लेकर फोरेंसिक, घटना स्थल से साक्ष्य जुटाना, विवेचना करना, भीड़ नियंत्रण करना हो या मोटर चलाना, फायरिंग और घुड़सवारी करने में बहुत मदद मिली।
साथ ही ट्रेनिंग के दौरान उन प्रशिक्षु दरोगाओं को भी इनसे काफी मदद की, जो पहली बार विभाग में हिस्सा बने हैं। पुलिस अकादमी में सर्वांग सर्वाेत्तम चंदन कुमार मिश्रा, इनडोर और आउटडोर के टॉपर खुर्शीद और सौरभ कुमार पटेल भी पहले सिपाही रह चुके हैं।
दरोगाओं के इन बैच की एक और खास बात है, दरोगा बनने के लिए शैक्षिक योग्यता स्नातक तय थी लेकिन आउटपास होने वाले इस बैच में 1660 दरोगा बीटेक, बीसीए, एमएससी, एमए बीएड, पॉलीटेक्निक, एलएलबी समेत अन्य डिग्री हासिल हैं।
इन्होंने साइबर क्राइम, फोरेंसिक साइंस, डिजिटल साक्ष्य जुटाने की बारीकियां समझती हैं। अपराध के बदलते तौर तरीकों की रोकथाम करने के लिए इस नए बैच से पुलिस विभाग को तकनीकी मजबूती भी मिलेगी।
63 प्रशिक्षु दरोगा ने दे दिया था त्यागपत्र
पुलिस अकादमी में ट्रेनिंग के लिए 804 प्रशिक्षु दरोगा भेजे गए थे लेकिन 760 ही प्रशिक्षु दरोगा ने ट्रेनिंग में भाग लिया। ट्रेनिंग के दौरान 11 प्रशिक्षु दरोगा दूसरे विभागों में नौकरी लगने पर त्यागपत्र देकर चले गए थे। पीटीसी में 1203 अभ्यर्थी ट्रेनिंग के लिए भेजे गए थे। इनमें 1156 की ट्रेनिंग शुरू हुई थी।
बाकी ट्रेनिंग में भाग लेने ही नहीं पहुंचे थे। ट्रेनिंग के दौरान 24 प्रशिक्षु ट्रेनिंग छोड़कर चले गए थे। इसी तरह पीटीसी के लिए 972 महिला अभ्यर्थी आवंटित की गई थीं। लेकिन 917 महिला अभ्यर्थी ही ट्रेनिंग के लिए आईं। ट्रेनिंग के दौरान शिक्षक, लेखपाल, डिप्टी एसपी समेत अन्य पदों पर चयनित होने पर 28 प्रशिक्षु दरोगा ट्रेनिंग छोड़कर चली गई थीं।
ये सिखाया
ट्रेनिंग के दौरान प्रशिक्षु दरोगाओं को आईपीसी, सीआरपीसी, भारतीय संविधान, मनाधिकार, भारतीय साक्ष्य अधिनियम, विवेचना परीक्षण, विधि विज्ञान, साइबर अपराध, कंप्यूटर साइंस, प्रयोगात्मक अध्ययन, भीड़ प्रबंधन, मेला प्रबंधन, आउटडोर में कमांड लीडरशिप, भीड़ नियंत्रण, छेद करना, फील्ड क्राफ्ट और रणनीति, घुड़सवारी प्रशिक्षण, बम निरोधक एवं विस्फोटक, वाहनों का संचालन एवं रख-रखाव, तैरना, फायरिंग, ग्रेनेड फेंकना, किसी भवन में आतंकी घुसे हैं तो उस भवन को कैसे कवर किया जाएगा, सर्च आपरेशन, रेस्क्यू, तत्काल कार्रवाई, मेला ड्यूटी, यातायात प्रबंधन, वीआईपी ड्यूटी, बाधाएं पार करना, रस्सा चढ़ना आदि।