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आपरेशन कराना है तो साथ लेकर आएं ब्लड डोनर
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मुरादाबाद। जननी सुरक्षा योजना के अंतर्गत आपरेशन से डिलीवरी करानी पड़ी तो तो ब्लड डोनर साथ लेकर ही सरकारी अस्पताल आएं। डोनर साथ नहीं होने से डिलीवरी के ऐन वक्त आपको ब्लड का इंतजाम करने में जूझना पड़ सकता है। सरकारी अस्पताल का ब्लड बैंक लगभग खाली हो गया है। स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति जागरूकता के अभाव में ब्लड बैंक में मात्र 35 यूनिट ब्लड है। यह कोटा भी वीआईपी और वीवीआईपी के लिए आरक्षित है। ऐसे में थैलेसीमिया के रोगियों के लिए भी बमुश्किल ब्लड का इंतजाम हो रहा है।
जिला अस्पताल में 1000 यूनिट क्षमता का ब्लड बैंक है। जननी सुरक्षा योजना, थैलेसीमिया, एचआईवी और लावारिस मरीजों के लिए निशुल्क ब्लड दिया जाता है। ब्लड बैंक में 65 थैलेसीमिया के मरीज पंजीकृत हैं। अधिकतर मरीजों को सप्ताह में एक या दो बार ब्लड चढ़ता है। जननी सुरक्षा योजना में महिला अस्पताल के लिए प्रतिदिन चार से पांच यूनिट ब्लड जारी होता है। प्रतिदिन एक से दो यूनिट लावारिस मरीजों और एचआईवी पीड़ितों को दिया जाता है। पिछले एक सप्ताह से बैंक में ब्लड की मारामारी हो गई है। स्वैच्छिक रक्तदान के लिए लोग नहीं पहुंच रहे हैं। इससे थैलेसीमिया के मरीज ही नहीं बल्कि ब्लड बैंक कर्मी भी जूझ रहे हैं। बैंक में 35 यूनिट ब्लड है। इसमें भी रेयर ग्रुप नहीं हैं। अस्पताल प्रशासन जननी सुरक्षा योजना के अंतर्गत आपरेशन से डिलीवरी वाले केस में तीमारदारों से रक्तदान करवा रहे हैं।
शिविर न लगने से कमी
ब्लड बैंक प्रभारी डा. आरएस सैनी बताते हैं, डोनर नहीं आने से समस्या बढ़ी है। इमरजेंसी होने पर बैंक कर्मी खुद ही रक्तदान कर रहे हैं। डा. सैनी ने बताया कि विगत दिवस चार साल के एक बच्चे को ब्लड की जरूरत थी। बच्चा एनीमिया से पीड़ित था और तीमारदार भी खून देने की स्थिति में नहीं थे। ब्लड बैंक कर्मी मो नईम ने बच्चे के लिए रक्तदान किया। डा. सैनी ने बताया कि स्वयंसेवी संस्थाओं ने भी पिछले कुछ महीनों से शिविर नहीं लगाए हैं। इससे बैंक में ब्लड की कमी हुई है।
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जिला अस्पताल में 1000 यूनिट क्षमता का ब्लड बैंक है। जननी सुरक्षा योजना, थैलेसीमिया, एचआईवी और लावारिस मरीजों के लिए निशुल्क ब्लड दिया जाता है। ब्लड बैंक में 65 थैलेसीमिया के मरीज पंजीकृत हैं। अधिकतर मरीजों को सप्ताह में एक या दो बार ब्लड चढ़ता है। जननी सुरक्षा योजना में महिला अस्पताल के लिए प्रतिदिन चार से पांच यूनिट ब्लड जारी होता है। प्रतिदिन एक से दो यूनिट लावारिस मरीजों और एचआईवी पीड़ितों को दिया जाता है। पिछले एक सप्ताह से बैंक में ब्लड की मारामारी हो गई है। स्वैच्छिक रक्तदान के लिए लोग नहीं पहुंच रहे हैं। इससे थैलेसीमिया के मरीज ही नहीं बल्कि ब्लड बैंक कर्मी भी जूझ रहे हैं। बैंक में 35 यूनिट ब्लड है। इसमें भी रेयर ग्रुप नहीं हैं। अस्पताल प्रशासन जननी सुरक्षा योजना के अंतर्गत आपरेशन से डिलीवरी वाले केस में तीमारदारों से रक्तदान करवा रहे हैं।
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शिविर न लगने से कमी
ब्लड बैंक प्रभारी डा. आरएस सैनी बताते हैं, डोनर नहीं आने से समस्या बढ़ी है। इमरजेंसी होने पर बैंक कर्मी खुद ही रक्तदान कर रहे हैं। डा. सैनी ने बताया कि विगत दिवस चार साल के एक बच्चे को ब्लड की जरूरत थी। बच्चा एनीमिया से पीड़ित था और तीमारदार भी खून देने की स्थिति में नहीं थे। ब्लड बैंक कर्मी मो नईम ने बच्चे के लिए रक्तदान किया। डा. सैनी ने बताया कि स्वयंसेवी संस्थाओं ने भी पिछले कुछ महीनों से शिविर नहीं लगाए हैं। इससे बैंक में ब्लड की कमी हुई है।
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