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Moradabad News: ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट को दिल्ली से मिली स्वीकृति, जल्द आएगा लाइसेंस नंबर
Fri, 26 Jul 2024 11:12 PM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मुरादाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, मुरादाबाद
Updated Fri, 26 Jul 2024 11:12 PM IST
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रामपुर। जिला अस्पताल के ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट को अब स्वीकृति मिल गई है। स्वीकृति के बाद अब लखनऊ से लाइसेंस नंबर मिलने वाला है। इसके बाद इसको संचालित कर दिया जाएगा। इसके संचालन से मरीजों को निजी ब्लड बैंकों के चक्कर नहीं लगाने होंगे। प्लेटलेट्स और प्लाज्मा के लिए तीमारदारों को नहीं भटकना होगा। उम्मीद जताई जा रही है कि इस हफ्ते तक यूनिट का काम शुरू हो जाएगा।
जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन की सुविधा नहीं थी। इसके चलते स्वास्थ्य विभाग ने अगस्त 2021 में शासन को ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट लगाने के लिए प्रस्ताव भेजा था। जिसकी मंजूरी मिलने पर शासन ने इसके निर्माण के लिए 5.5 लाख रुपये दिए थे। फरवरी 2022 में ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट का भवन तैयार हो गया। इसके दो माह बाद एक मशीन जिला अस्पताल में आई थी। इसके बाद धीरे-धीरे मशीनें मिल गईं। मशीनें लगने के बाद दोबारा टीम आई और निरीक्षण किया था, लेकिन इसमें मानकों के हिसाब से कई आपत्तियां मिली थीं। जिसको दुरुस्त करा दिया गया था। इसके बाद अब दिल्ली से इस यूनिट को चलाने के लिए स्वीकृति मिल चुकी है, लेकिन अभी लाइसेंस नंबर नहीं आ सका है, जिससे अभी यूनिट शुरू नहीं की जा सकी है। अस्पताल प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि जल्द इसका लाइसेंस मिल जाएगा और फिर इसको शुरू कर दिया जाएगा।
ये मशीनें हैं
ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. प्रद्युत सिंह ने बताया कि यूनिट में -40 व -80 डिग्री सेल्सियस तापमान पर प्लाज्मा रखने के लिए एक रेफ्रिजरेटर है। इसके अलावा ब्लड बैंक रेफ्रिजरेटर है। ब्लड बैंक रेफ्रिजरेटर जिसमें 2 से 6 डिग्री सेल्सियस पर ब्लड रखा जाता है। एक एलाइजा रीडर वॉस्टर एवं रेफ्रिजरेटर सेंटीफ्यूज आदि मशीनें हैं।
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ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट का काम
ब्लड में रेड ब्लड सेल, प्लाज्मा और प्लेटलेट्स आदि कंपोनेंट होते हैं। सेपरेशन यूनिट में ब्लड के कंपोनेंट अलग किए जाते हैं। जरूरत के हिसाब से मरीजों को आरबीसी, प्लाज्मा, प्लेटलेट्स आदि चढ़ाया जाता है। निकाले गए ब्लड के प्रत्येक तत्व की अलग-अलग अवधि होती है। एक यूनिट ब्लड से तीन से चार लोगों की जरूरत पूरी हो जाता है।
दिल्ली से इस सेपरेशन यूनिट को स्वीकृति मिल चुकी है, लेकिन अभी लाइसेंस नंबर नहीं आया है। नंबर आने के बाद इसको पूरी तरह से संचालित किया जाएगा।
-डॉ. एचके मित्रा, सीएमएस, जिला अस्पताल
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जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन की सुविधा नहीं थी। इसके चलते स्वास्थ्य विभाग ने अगस्त 2021 में शासन को ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट लगाने के लिए प्रस्ताव भेजा था। जिसकी मंजूरी मिलने पर शासन ने इसके निर्माण के लिए 5.5 लाख रुपये दिए थे। फरवरी 2022 में ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट का भवन तैयार हो गया। इसके दो माह बाद एक मशीन जिला अस्पताल में आई थी। इसके बाद धीरे-धीरे मशीनें मिल गईं। मशीनें लगने के बाद दोबारा टीम आई और निरीक्षण किया था, लेकिन इसमें मानकों के हिसाब से कई आपत्तियां मिली थीं। जिसको दुरुस्त करा दिया गया था। इसके बाद अब दिल्ली से इस यूनिट को चलाने के लिए स्वीकृति मिल चुकी है, लेकिन अभी लाइसेंस नंबर नहीं आ सका है, जिससे अभी यूनिट शुरू नहीं की जा सकी है। अस्पताल प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि जल्द इसका लाइसेंस मिल जाएगा और फिर इसको शुरू कर दिया जाएगा।
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ये मशीनें हैं
ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. प्रद्युत सिंह ने बताया कि यूनिट में -40 व -80 डिग्री सेल्सियस तापमान पर प्लाज्मा रखने के लिए एक रेफ्रिजरेटर है। इसके अलावा ब्लड बैंक रेफ्रिजरेटर है। ब्लड बैंक रेफ्रिजरेटर जिसमें 2 से 6 डिग्री सेल्सियस पर ब्लड रखा जाता है। एक एलाइजा रीडर वॉस्टर एवं रेफ्रिजरेटर सेंटीफ्यूज आदि मशीनें हैं।
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ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट का काम
ब्लड में रेड ब्लड सेल, प्लाज्मा और प्लेटलेट्स आदि कंपोनेंट होते हैं। सेपरेशन यूनिट में ब्लड के कंपोनेंट अलग किए जाते हैं। जरूरत के हिसाब से मरीजों को आरबीसी, प्लाज्मा, प्लेटलेट्स आदि चढ़ाया जाता है। निकाले गए ब्लड के प्रत्येक तत्व की अलग-अलग अवधि होती है। एक यूनिट ब्लड से तीन से चार लोगों की जरूरत पूरी हो जाता है।
दिल्ली से इस सेपरेशन यूनिट को स्वीकृति मिल चुकी है, लेकिन अभी लाइसेंस नंबर नहीं आया है। नंबर आने के बाद इसको पूरी तरह से संचालित किया जाएगा।
-डॉ. एचके मित्रा, सीएमएस, जिला अस्पताल