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खड़े खड़े कबाड़ बन रहे ई-रिक्शा
ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद
Updated Tue, 26 Jul 2016 11:29 AM IST
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लापरवाही
- फोटो : अमर उजाला
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गरीबाें को रोजगार देने के उद्देश्य से खरीदे गए ई रिक्शा वितरण के इंतजार में सर्किट हाउस में खडे़ हुए हैं। कभी मंत्री जी का समय नहीं मिल पाने के कारण तो कभी पात्र चयन में धांधली की शिकायत के बहाने इनका वितरण नहीं हुआ। फिर चुनाव आचार संहिता ने लाभार्थियों का इंतजार और बढ़ाया ही साथ ही ई रिक्शा की दुर्गत भी बनवा दी। सर्किट हाउस में खड़े ई रिक्शा कबाड़ में तब्दील होते जा रहे हैं।
नगरी रोजगार और गरीब उन्मूलन योजना के तहत मुरादाबाद में 533 लोगाें को ई रिक्शा का वितरण होना है। इसमें मुरादाबाद नगर, बिलारी, कांठ आदि नगरीय क्षेत्र के लाभार्थी भी शामिल हैं। वितरण के लिए ई रिक्शा खरीदकर महीनों पहले ही सर्किट हाउस में खड़े कर दिए गए।
इन रिक्शों का वितरण नगर विकास मंत्री आजम खान को करना है। कई बार मंत्री जी के आकर वितरण करने की घोषणा हुई। लेकिन हर बार किसी न किसी वजह से कार्यक्रम टलता रहा। एक बार कार्यक्रम तय हो गया और मुरादाबाद पहुंचने से पहले ही मंत्रीजी को लाभार्थी सूची में धांधली की शिकायत मिल गई।
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उन्होंने पहले सूची दुरुस्त करने का आदेश कर दिया। इसी दौरान नगर निगम महापौर उप चुनाव की आचार संहिता लागू हो गई। महीनों से खड़े खड़े रिक्शा देखभाल के अभाव में कबाड़ में तब्दील हो चुके हैं। किसी की लाइट निकाल ली गई तो किसी विंड स्क्रीन तो किसी बैटरी तो किसी से कुछ सामान गायब है।
एक रिक्शे की कीमत करीब पौने दो लाख रुपये बताई जा रही है। कुल मिलाकर करोड़ों रुपये के सरकारी खजाने से खरीदे गए ई रिक्शा कबाड़ होते जा रहे हैं और किसी को इसकी फिक्र नहीं है।
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नगरी रोजगार और गरीब उन्मूलन योजना के तहत मुरादाबाद में 533 लोगाें को ई रिक्शा का वितरण होना है। इसमें मुरादाबाद नगर, बिलारी, कांठ आदि नगरीय क्षेत्र के लाभार्थी भी शामिल हैं। वितरण के लिए ई रिक्शा खरीदकर महीनों पहले ही सर्किट हाउस में खड़े कर दिए गए।
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इन रिक्शों का वितरण नगर विकास मंत्री आजम खान को करना है। कई बार मंत्री जी के आकर वितरण करने की घोषणा हुई। लेकिन हर बार किसी न किसी वजह से कार्यक्रम टलता रहा। एक बार कार्यक्रम तय हो गया और मुरादाबाद पहुंचने से पहले ही मंत्रीजी को लाभार्थी सूची में धांधली की शिकायत मिल गई।
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उन्होंने पहले सूची दुरुस्त करने का आदेश कर दिया। इसी दौरान नगर निगम महापौर उप चुनाव की आचार संहिता लागू हो गई। महीनों से खड़े खड़े रिक्शा देखभाल के अभाव में कबाड़ में तब्दील हो चुके हैं। किसी की लाइट निकाल ली गई तो किसी विंड स्क्रीन तो किसी बैटरी तो किसी से कुछ सामान गायब है।
एक रिक्शे की कीमत करीब पौने दो लाख रुपये बताई जा रही है। कुल मिलाकर करोड़ों रुपये के सरकारी खजाने से खरीदे गए ई रिक्शा कबाड़ होते जा रहे हैं और किसी को इसकी फिक्र नहीं है।